Bharat Kala Bhavan, BHU

Bharat Kala Bhavan, BHU Bharat Kala Bhavan, Museum is the University museum of Banaras Hindu University, Varanasi. The museum is open for visit.

Renovation work at the museum is ongoing due to which First Floor of the museum is not open for visitors.

Bharat Kala Bhavan presents a special exhibition "Gangā-Kāveri Sampravāha" on the occasion of the fourth edition of the ...
02/12/2025

Bharat Kala Bhavan presents a special exhibition "Gangā-Kāveri Sampravāha" on the occasion of the fourth edition of the Kashi Tamil Sangamam. It will remain on view from December 3 - 15, 20





During World Heritage Week, the team of Bharat Kala Bhavan conducted a special outreach programme at Central Hindu Schoo...
26/11/2025

During World Heritage Week, the team of Bharat Kala Bhavan conducted a special outreach programme at Central Hindu School (CHS).
This initiative is rooted in a simple yet powerful thought: “Not everyone can reach the museum… so sometimes the museum must reach them.”
Students explored rare artworks, museum replicas, and inspiring stories from India’s rich cultural heritage.

विश्व विरासत सप्ताह के अवसर पर भारत कला भवन की टीम ने सेंट्रल हिंदू स्कूल में एक विशेष बाह्य सैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का आधार एक सरल लेकिन बेहद अर्थपूर्ण विचार है कि “हर कोई संग्रहालय तक नहीं पहुँच पाता… इसलिए कभी-कभी संग्रहालय को ही उनके पास जाना चाहिए।”
छात्रो ने भारत की कला, संस्कृति और इतिहास से जुड़ी दुर्लभ प्रतिकृतियाँ, चित्रकृतियाँ और प्रेरक कथाएँ नज़दीक से देखीं और समझीं।

🎨📚 भारत कला भवन – सांस्कृतिक धरोहर को सबके और करीब लाते हुए।

HeritageForAll ArtEducation MuseumOutreach Varanasi InspiringYoungMinds

विश्व विरासत सप्ताह के अंतर्गत भारत कला भवन, बीएचयू में आयोजित “अतीत से वर्तमान” बाल कला प्रदर्शनी बड़ी संख्या में दर्शक...
22/11/2025

विश्व विरासत सप्ताह के अंतर्गत भारत कला भवन, बीएचयू में आयोजित “अतीत से वर्तमान” बाल कला प्रदर्शनी बड़ी संख्या में दर्शकों व अन्य स्कूली छात्रों का ध्यान आकर्षित कर रही है। यह प्रदर्शनी सेंट्रल हिन्दू स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा इतिहास, कला और विरासत से प्रेरित मॉडलों एवं पर्यावरण–हितैषी सामग्रियों से तैयार की गई कृतियों का अनूठा संग्रह प्रस्तुत करती है।

आज संग्रहालय में GIC शेखूपुर (प्रतापगढ़), डालिम्स स्कूल रोहनिया, सनबीम स्कूल इंद्रानगर सहित कई संस्थानों के विद्यार्थियों के साथ-साथ देशी-विदेशी दर्शकों ने प्रदर्शनी का भ्रमण किया। इसमें प्रदर्शित कलाकृतियाँ, प्राचीन मूर्तिकला के नमूने, पौराणिक कथाओं के दृश्य और बच्चों की रचनात्मक प्रस्तुति देखकर विद्यार्थी अत्यंत प्रेरित हुए। विद्यार्थियों ने भारतीय इतिहास की विविध परंपराओं, पुरातात्विक धरोहरों और शिल्पकला की समृद्धि को निकट से समझा तथा अपनी जिज्ञासाओं को विशेषज्ञों से साझा किया।

आगंतुक दर्शकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के अनुसार यह प्रदर्शनी न केवल जानकारीपूर्ण है, बल्कि बच्चों में सृजनात्मकता, सांस्कृतिक चेतना और विरासत संरक्षण की भावना को भी प्रोत्साहित करती है। भारत कला भवन पूरे सप्ताह विभिन्न विद्यालयों एवं आगंतुकों का स्वागत करते हुए आनंदित है और आशा करता है कि इस प्रकार की पहल, नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।




















भारत कला भवन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में विश्व विरासत सप्ताह (19–26 नवंबर, 2025) एवं बाल दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ...
21/11/2025

भारत कला भवन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में विश्व विरासत सप्ताह (19–26 नवंबर, 2025) एवं बाल दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित बाल कला प्रदर्शनी “अतीत से वर्तमान” का सफल आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा इतिहास, कला और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किए गए, जिनमें पर्यावरण–अनुकूल एवं अपशिष्ट सामग्री का रचनात्मक उपयोग विशेष आकर्षण रहा।

प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रो. सुषमा घिल्डीयाल, चेयरपर्सन, स्कूल बोर्ड, बीएचयू द्वारा किया गया। इस अवसर पर भारत कला भवन के निदेशक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने बच्चों की कल्पनाशीलता, शोध–भावना और भारतीय धरोहर से उनके जुड़ाव की सराहना की।

प्रतियोगिता का मूल्यांकन प्रो. अर्पिता चटर्जी, विभाग— प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व (AIHC & Archaeology), बीएचयू द्वारा किया गया।

इस प्रतियोगीता में प्रथम पुरस्कार: नालंदा के खण्डहर (Ruins of Nalanda) – आस्था सिंह एवं शाम्भवी, द्वितीय पुरस्कार: प्राचीन सिक्कों का मॉडल – अपराजिता सिंह एवं काव्या वर्मा एवं तृतीय पुरस्कार संयुक्त रूप से : प्रिस्ट किंग (Priest King) मॉडल – अस्तित्व विश्वकर्मा और हड़प्पा सभ्यता मॉडल – आयुषी एवं शिक्षा को प्रदान किया गया।

इस प्रदर्शनी ने बच्चों की रचनात्मक क्षमता, सांस्कृतिक चेतना और भारतीय इतिहास के प्रति उनकी गहरी दिलचस्पी को प्रभावपूर्ण ढंग से उजागर किया। भारत कला भवन विजेताओं के साथ सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देता है। सेंट्रल हिन्दू बॉय्ज़ स्कूल एवं सेंट्रल हिन्दू गर्ल्स स्कूल, कमच्छा, वाराणसी के सहयोग के लिए आभार प्रकट करता है। पूरे कार्यक्रम की परिकल्पना उप निर्देशक डॉ निशांत द्वारा की गई जिसका संचालन डॉ0प्रियंका चंद्रा द्वारा इनटर्न के साथ मिलकर किया गया। सहायक संग्रहाध्यक्ष डॉ देवेन्द्र बहादुर सिंह ,डॉ0 दीपक भरथन अलथुर तथा कार्यालय से श्री राजेन्द्र प्रसाद, श्री मुन्ना लाल पाल एवं श्री अनूप कुमार संग समस्त भारत कला भवन परिवार ने किया। छात्रों द्वारा प्रदर्शित वस्तुएं 19 - 26 नवम्बर तक भारत कला भवन में दर्शकों के अवलोकनार्थ हेतु उपलब्ध रहेगी l



















🌍✨ World Heritage Week 2025 ✨🌍Bharat Kala Bhavan proudly celebrates World Heritage Week (19–25 November 2025) with “Atee...
19/11/2025

🌍✨ World Heritage Week 2025 ✨🌍
Bharat Kala Bhavan proudly celebrates World Heritage Week (19–25 November 2025) with “Ateet se Vartamaan” — a vibrant Children’s Art Exhibition created in collaboration with Central Hindu Boys School and Central Hindu Girls School.
Young minds have explored India’s rich history, art, and heritage through imaginative models and eco-friendly creations.
Their creativity reminds us that heritage is not just preserved — it is re-imagined by every new generation.
Join us in celebrating the spirit of learning, culture, and childhood!
📍 Venue: Temporary Exhibition Hall, Bharat Kala Bhavan, BHU
🕘 20–25 November | 10:30 AM – 4:30 PM

भारत कला भवन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में आयोजित बाल दिवस समारोह में सेंट्रल हिंदू बॉयज़ स्कूल और सेंट्रल हिंदू गर्ल्स...
16/11/2025

भारत कला भवन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में आयोजित बाल दिवस समारोह में सेंट्रल हिंदू बॉयज़ स्कूल और सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कला, संस्कृति एवं विरासत थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और एक्सटेम्पोर (तात्कालिक भाषण) का आयोजन प्रमुख आकर्षण रहे।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल की टीम विजेता घोषित हुई। विजेता छात्रों — तृप्ति राज, ऋति राज, कुमारी ज्योतिका, अंशिका प्रियांशी और अनुष्का रजक — ने उत्कृष्ट टीमवर्क और क्षमता का प्रदर्शन किया।
त्वरित भाषण प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे:
• प्रथम पुरस्कार: शांभवी सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल
• द्वितीय पुरस्कार: पार्थ श्रीवास्तव, सेंट्रल हिंदू बॉयज़ स्कूल
• तृतीय पुरस्कार: केशव कुमार, सेंट्रल हिंदू बॉयज़ स्कूल
प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन डॉ0 प्रवीन सिंह राणा और डॉ. कुमार सूर्य प्रकाश द्वारा किया गया। भारत कला भवन के निदेशक प्रो0 श्रीरूप रायचौधुरी तथा उप-निदेशक डॉ0 निशांत ने विजेताओं एवं प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि "ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में सांस्कृतिक विरासत के प्रति संवेदनशीलता व रुचि को बढ़ावा देते हैं।"
बाल दिवस समारोह ने शिक्षा और मनोरंजन का सुंदर संगम प्रस्तुत किया और छात्रों में भारतीय इतिहास तथा संस्कृति के प्रति गहरी समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन डा0 प्रियंका चंद्रा ने प्रशिक्षु इनटर्न के सहयोग से किया गया ।







Let’s make heritage fun together!👧🧒 ✨ Activities include:🧩 Quiz Competition – Guess the Image!🎙️ Extempore – Culture, Hi...
13/11/2025

Let’s make heritage fun together!

👧🧒
✨ Activities include:
🧩 Quiz Competition – Guess the Image!
🎙️ Extempore – Culture, History & Tradition
🎨 Exhibition by Children – Eco-friendly Heritage Models

📅 Date: 14 November 2025
🕚 Time: 11 AM onwards
📍 Venue: Bharat Kala Bhavan, BHU

In collaboration with Central Hindu Boys’ School & Central Hindu Girls’ School, Kamachha, Varanasi.

मालवीय जी की तस्वीर,हाथी दांत पर जल रंग उस्ताद राम प्रसाद द्वारा निर्मित, बीसवीं सदी ई.भारत रत्न महामना पण्डित मदन मोहन ...
12/11/2025

मालवीय जी की तस्वीर,
हाथी दांत पर जल रंग
उस्ताद राम प्रसाद द्वारा निर्मित, बीसवीं सदी ई.

भारत रत्न महामना पण्डित मदन मोहन मालवीय जी की पुण्यतिथि पर भारत कला भवन परिवार की तरफ़ से विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🙏

भारत कला भवन, बीएचयू में “Dhaka to Banaras” द्वि-कलाकार प्रदर्शनी का उद्घाटन माननीय कुलपति प्रो0 अजित कुमार चतुर्वेदी द्...
12/11/2025

भारत कला भवन, बीएचयू में “Dhaka to Banaras” द्वि-कलाकार प्रदर्शनी का उद्घाटन माननीय कुलपति प्रो0 अजित कुमार चतुर्वेदी द्वारा 10 नवम्बर 2025 को सम्पन्न हुआ। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने प्रदर्शनी की सृजनात्मक और सांस्कृतिक ऊर्जा को विशेष आयाम प्रदान किया।

प्रदर्शनी में Md. Fariaz Emran और Niharika Awhona Barsaat की रचनाएँ प्रदर्शित हैं, जिनका क्यूरेशन डॉ0 राजीव मण्डल ने किया है। यह प्रदर्शनी ढाका और बनारस के सांस्कृतिक भाव-बिम्बों को एक साझा दृश्य-यात्रा के रूप में प्रस्तुत करती है। माननीय कुलपति प्रो0 अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि “भारत कला भवन बीएचयू का सांस्कृतिक धरोहर-केन्द्र है, जहाँ प्राचीन मूर्तिकला, चित्रकला, पांडुलिपियाँ और लोक-संस्कृति का विशाल संग्रह भारतीय कला-इतिहास की जीवंत यात्रा प्रस्तुत करता है।

इस अवसर पर भारत कला भवन के निदेशक प्रो0 श्रीरूप रायचौधुरी ने प्रदर्शनी को “दो शहरों की सांस्कृतिक चेतना का जीवंत संवाद” बताया, वहीं भारत कला भवन के उप-निदेशक डॉ0 निशांत ने इसे “सृजनात्मक विकास और संग्रहालय शिक्षा का महत्त्वपूर्ण संसाधन” कहा।

फ़रियाज़ की रचनाएँ प्राचीन हड़प्पाई रूपों से प्रेरित हैं, जबकि निहारिका द्वारा निर्मित कलाकृतियाँ भारतीय लघुचित्र परंपरा, वस्त्र-शिल्प और अलंकरण की बारीकियों को समकालीन रूप देती है। प्रदर्शनी रंग, रूप और स्थान के माध्यम से एक सांस्कृतिक यात्रा का सूक्ष्म मानचित्र प्रस्तुत करती है। यह प्रदर्शनी दर्शकों के अवलोकनार्थ हेतु 10–14 नवम्बर 2025, प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 4:30 बजे तक भारत कला भवन में खुली रहेगी।






भारत कला भवन में युवा मूर्तिकार राजीव रंजन की एकल मूर्तिकला प्रदर्शनी 'काशीस्थ' का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन समारोह में ...
07/11/2025

भारत कला भवन में युवा मूर्तिकार राजीव रंजन की एकल मूर्तिकला प्रदर्शनी 'काशीस्थ' का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन समारोह में वरिष्ठ कवि एवं प्रख्यात कला-आलोचक श्री व्योमेश शुक्ल ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जबकि प्रसिद्ध मूर्तिशिल्पी एवं बी.एच.यू. के सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. हीरालाल प्रजापति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कलाकार राजीव रंजन की मूर्तियाँ मुख्यतः पीतल (Brass), कांस्य (Bronze) और लकड़ी (Wood) जैसे पारंपरिक माध्यमों में निर्मित हैं। इन कृतियों में आधुनिक संवेदनशीलता के साथ-साथ भारतीय कला की शिल्प परंपरा का गहन समावेश देखने को मिलता है। पीतल की मूर्तियाँ अपनी धात्विक चमक और सूक्ष्म बारीकियों से दर्शकों को आकर्षित करती हैं; कांस्य मूर्तियाँ दृढ़ता, स्थायित्व और आत्मविश्वास का प्रतीक हैं; जबकि लकड़ी की नक्काशी में कलाकार ने लोकजीवन, अनुभूति और प्रकृति के साथ गहरे संवाद को मूर्त रूप दिया है।

व्योमेश शुक्ल ने अपने उद्बोधन में कहा —“काशी के घाट, गलियाँ, थातियाँ, झिलमिलाते हुए उपासना दीप, हज़ारों भक्तों का पड़ाव — सब मिलकर इस प्रदर्शनी की काशी रूप विशेषता पर एक अद्भुत रूप देकर बदल देते हैं, जिसकी मिसाल और कुछ नहीं। इस निपुणता और अद्वितीय प्रस्तुति का हर्षित यह रूप है। हृदय से राजीव रंजन को शुभकामना जिन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए, कड़ी मेहनत और कर्मनिष्ठा से यह प्रदर्शनी तैयार की है।"

इस अवसर पर भारत कला भवन से डॉ. डी. बी. सिंह और डा. प्रियंका चन्द्र के साथ कला-जगत के अनेक विद्वान, शोधार्थी, विद्यार्थी और संस्कृति-प्रेमी उपस्थित रहे।

Bharat Kala Bhavan, Banaras Hindu University, is pleased to announce the presentation of a research paper titled ‘Royal ...
06/11/2025

Bharat Kala Bhavan, Banaras Hindu University, is pleased to announce the presentation of a research paper titled ‘Royal Court Culture and Museums: Cotton Tentage in the Bharat Kala Bhavan Collection, Varanasi’ by Dr. Priyanka Chandra, Assistant Curator, Textiles and Decorative Arts, Bharat Kala Bhavan, BHU, at the 53rd Annual Conference on South Asia, organized by the Center for South Asia, University of Wisconsin–Madison, USA.
This research investigates the historical and cultural significance of Mughal tent panels executed in kalamkari, a traditional Indian textile art involving block-printing and hand-painting on cotton fabrics, and their interpretation within museum contexts today. Drawing upon the seminal scholarship of Rosemary Crill and Sylvia Houghteling, Dr. Chandra examines the symbolic role of tents, carpets, and textiles as expressions of imperial grandeur and authority.
Through a comprehensive study of twenty-three royal cotton tent panels preserved in the Bharat Kala Bhavan collection, alongside comparative examples from museums in India, Europe, Germany, and the United States, the paper explores the making, function, and aesthetic significance of kalamkari techniques. Miniature paintings from the same period are also analyzed to contextualize the material culture of mobility and courtly aesthetics.
The study offers new insights into the socio-political and cultural milieu of the 17th and 18th centuries, illuminating how royal textiles embodied narratives of artistry, power, and identity. It further emphasises Bharat Kala Bhavan’s sustained contribution to the global discourse on Indian art, material culture, and heritage preservation.

Address

Bhara Kala Bhavan, Museum, Banaras Hindu University, Varanasi
Kashi
2210005

Opening Hours

Monday 10:30am - 4:30pm
Tuesday 10:30am - 4:30pm
Wednesday 10:30am - 4:30pm
Thursday 10:30am - 4:30pm
Friday 10:30am - 4:30pm
Saturday 10:30am - 4:30pm

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