26/01/2021
आज अल-करीम यूनिवर्सिटी, कटिहार के कुलाधिपति जनाब डॉ अहमद अशफाक करीम ने गणतंत्र दिवस पर झंडोत्तोलन किया। उन्होंने तिरंगे झंडे को सलामी देकर, राष्ट्र गान के उपरांत अपने संबोधन में दिल का उद्गार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि हम अपना 72वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। इस अवसर पर उनलोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन लोगों में महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में अंग्रेजों को इस देश से भगाने और आज़ादी दिलाने का काम किया। 26 जनवरी 1950 को लागू संविधान के अनुसार आज़ादी का मतलब ये है कि देश के सभी नागरिकों को इंसाफ, बराबरी और बोलने की आज़ादी मिले। आज़ादी का मकसद ये है कि अपने-अपने मज़हब के अनुसार जीवन व्यतीत करते हुए और दूसरे धर्मों को सम्मान और हिफाज़त करने की जिम्मेदारी हिंदुस्तान के सभी वाशिन्दों की है।
देश के एक सबसे वंचित इलाके में से एक सीमांचल, कोसी अंचल में अल करीम यूनिवर्सिटी तालीम से तरक्की की ओर बढ़ने हेतु कई ऐसे कोर्सेज की शुरुआत कर चुकी है। जिससे गरीब/कमज़ोर तबका के लोग लाभांवित हो सके और कम पैसे में उनकी तालीम पूरी हो सके। जिसके बदौलत वो कहीं न कहीं रोजगार पा सके। यह प्रयास देश को आगे बढाने और और मज़बूत करने का काम करेगी। अल करीम यूनिवर्सिटी इसकी कड़ी है। शिक्षा के क्षेत्र में 1987 से कटिहार मेडिकल कॉलेज के रूप में अपना योगदान दे रही है। अब अल करीम यूनिवर्सिटी 2018 में बनने के बाद 2019 में UGC से संबद्धता मिलने के बाद अलग-अलग विषयों में स्नातक की पढ़ाई शुरू कर चुकी है। ताकि जो मकसद था सीमांचल में आकर कटिहार के धरती पर इस तरह के इरादे बनाने का, वो ख़्वाब आज साकार हो रहे हैं। सिर्फ कटिहार मेडिकल कॉलेज और अल करीम यूनिवर्सिटी की नहीं बल्कि सीमांचल और कोशी के लोगों के ख्वाब पूरा हो रहे हैं।
और यह संविधान अनेकता में एकता का प्रतीक है। इसका ध्यान हमें रखना चाहिए, चाहे जिस मज़हब के लोग हों। भाईचारगी बरक़रार रहना चाहिए। चाहे कोई भी सियासतदान बंटवारा करना चाहे अलग-अलग मज़हब के लोगों का, इसमें नहीं जाना चाहिए। बल्कि संविधान, उसकी आत्मा और धर्म के आधार पर हमलोगों को एकजुट रहना चाहिए। क्योंकि धर्म भी एकजुट रहने की सलाह देता है, एकजुट रखना चाहता है। तभी हमरा देश एकजुट रहेगा। और हमारे आने वाली पीढ़ी सही से आगे जाएंगे और उनको अच्छी सीख मिल पाएगी।