Kurukshetra University Central Library

Kurukshetra University Central Library Kurukshetra University Central Library The Kurukshetra University Library is centrally located and is an air conditioned three storey building having 49,230 sq.

feet plinth area and its extension as Golden Jubilee Reading Hall having plinth area of 57,500 sq. feet is also under progress. It has seating capacity of 470 users at a time and remains open on 360 days from 9.00 a.m. to 12.00 midnight. The University Library has a rich collection of 339817 volumes in the stream of Sciences, Management, Social Science, Commerce and Humanities too. The Library ERN

ET Centre with 150 computers for the faculty members, students and Research Scholars has an internet connectivity of 10 mbps leased line. Library has also provided internet connectivity to almost all the teaching and non-teaching Departments, Hostels and the entire Campus through WI FI internet connection. In addition to this, under U.G.C.-INFONET E-Journals consortium library provides an access to 8453 scholarly journals.

आप में से बहुत से लोग जानते कि इस पेज को एक नहीं, बल्कि कई Admins  मिलकर चलाते हैं।हर Admin की अपनी रुचियाँ, अपने अनुभव ...
11/06/2026

आप में से बहुत से लोग जानते कि इस पेज को एक नहीं, बल्कि कई Admins मिलकर चलाते हैं।

हर Admin की अपनी रुचियाँ, अपने अनुभव और अपना दृष्टिकोण है।

इसलिए कभी आपको KU की पुरानी तस्वीरें देखने को मिलती हैं...

कभी कोई हिस्टोरिकल पोस्ट्स ...

कभी कैंपस मेमोरीज ...

कभी विभाग सबंधी पोस्ट ...

कभी पुरानी यादों या कंफेशंस से जुडी पोस्ट ...

और कभी Students Life से जुड़ी Nostalgic कहानियाँ।

लेकिन अब हम आपसे पूछना चाहते हैं—

👇 आप इस पेज पर सबसे ज्यादा क्या देखना पसंद करेंगे?

अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

क्योंकि यह पेज केवल Admins का नहीं...

यह पूरे K*K परिवार का साझा मंच है।

🌟 एक और महत्वपूर्ण बात...

अगर आप यूनिवर्सिटी से सबंधित इतिहास, फोटोग्राफी, लेखन, या कैंपस मेमोरीज में रुचि रखते हैं...

और इस कम्युनिटी को आगे बढ़ाने में योगदान देना चाहते हैं...

तो हम नए Moderators और Admins का स्वागत करना चाहेंगे।

अगर आपका किसी पेज से जुड़े होने का का कोई अनुभव है और आप हमारे इस पेज से जुड़कर इसे वक़्त दे सकते हैं तो कमैंट्स या इनबॉक्स में संपर्क करें।

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के दिनों की सबसे सस्ती और सबसे यादगार ट्रीट अगर किसी ने दी है, तो वो है **गीता बॉयज़ स्कूल के सा...
10/06/2026

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के दिनों की सबसे सस्ती और सबसे यादगार ट्रीट अगर किसी ने दी है, तो वो है **गीता बॉयज़ स्कूल के सामने वाला Gupta Burger Center ❤️🍔**

आज भी जब उस रास्ते से गुजरता हूँ, तो याद आ जाता है वो स्टूडेंट लाइफ वाला दौर...

जेब में सिर्फ 20-30 रुपये होते थे, लेकिन दिल में दोस्तों के साथ शाम बिताने की पूरी प्लानिंग। और फिर सीधा कदम बढ़ते थे गुप्ता जी की रेहड़ी की तरफ।

उस समय 10 रुपये का बर्गर सिर्फ एक बर्गर नहीं था, एक एहसास था। 😍

सबसे खास बात? उनके बर्गर में डाला जाने वाला 'पनीर' । उस दौर में जब बाकी जगह सिर्फ नाम के बर्गर मिलते थे, इस बर्गर का स्वाद अलग ही लेवल पर था। कम कीमत, अच्छी क्वालिटी और वो देसी अंदाज़... बस दिल जीत लेता था।

हाँ, वहाँ कोई बैठने की जगह नहीं थी। न कोई फैंसी कैफे वाली कुर्सियाँ, न एसी। बस एक छोटी सी रेहड़ी, कुछ दोस्त, सड़क किनारे खड़े होकर बर्गर खाना और घंटों की बातें...

लेकिन सच कहूँ तो, शायद इसी वजह से वो जगह इतनी खास थी।

आज बड़े-बड़े कैफे आ गए हैं, हजारों के बिल आ जाते हैं, लेकिन जो खुशी 10 रुपये के बर्गर में मिलती थी, वो कहीं और नहीं मिली। ❤️

KU के हर पुराने स्टूडेंट के पास इस जगह की कोई न कोई याद ज़रूर होगी।

अगर आपने भी गगुप्त जी का बर्गर खाया है, तो कमेंट में लिखिए —
**"Present Sir! 🍔❤️"**

और अपने उस दोस्त को टैग करो जिसके साथ तुमने वहाँ सबसे ज़्यादा बर्गर खाए थे। 😄

🎓 **कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति: जब चुनाव विचारों के होते थे, ताकत के नहीं...**आज के छात्रों को शायद यह ज...
09/06/2026

🎓 **कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति: जब चुनाव विचारों के होते थे, ताकत के नहीं...**

आज के छात्रों को शायद यह जानकर आश्चर्य हो कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में छात्र संघ हमेशा से नहीं था।

1968-69 में एक उग्र छात्र आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके बाद 1969-70 में छात्र संघ के चुनाव हुए और विश्वविद्यालय ने अपने पहले निर्वाचित छात्र नेताओं को देखा।

मैं उन दिनों का प्रत्यक्ष साक्षी हूँ।

मैंने 1967 से 1972 तक अपने जीवन के पाँच अमूल्य वर्ष कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के फिजिक्स विभाग में बिताए। उन वर्षों में मैंने न केवल पढ़ाई की, बल्कि विश्वविद्यालय को बदलते हुए भी देखा।

मैं स्वयं 1969-70 और फिर 1971-72 के छात्र संघ चुनावों में उम्मीदवार रहा। चुनाव लड़ा, हारा भी... लेकिन आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि हार से भी बहुत कुछ सीखा था।

उस समय चुनाव केवल पोस्टर और वोट तक सीमित नहीं थे।

वो विचारों की लड़ाई थी।
व्यक्तित्व की पहचान थी।
दोस्ती, बहस और संवाद का दौर था।

मुझे आज भी विश्वविद्यालय के पहले छात्र संघ अध्यक्ष **पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया** याद हैं।

बेहद मृदुभाषी, सरल और सज्जन व्यक्ति।

उन दिनों मतभेद थे, लेकिन मनभेद कम थे।
नेतृत्व था, लेकिन आक्रामकता नहीं।
प्रतिस्पर्धा थी, लेकिन हिंसा नहीं।

विश्वविद्यालय का माहौल अधिकतर शैक्षणिक था और छात्र राजनीति उस माहौल का एक हिस्सा थी, पूरा केंद्र नहीं।

समय बदला...

और छात्र राजनीति भी बदल गई।

आज जब विश्वविद्यालयों की राजनीति में बाहरी प्रभाव, दलगत सोच और कभी-कभी हिंसा की खबरें सुनता हूँ, तो मन अनायास उन दिनों में लौट जाता है जब छात्र नेता पहले छात्र होते थे, नेता बाद में।

यह पोस्ट किसी पक्ष या विपक्ष में नहीं है।

बल्कि एक सवाल है—

क्या छात्र राजनीति नेतृत्व निर्माण का माध्यम है?

या विश्वविद्यालय का मूल उद्देश्य शिक्षा और ज्ञान अर्जन ही होना चाहिए?

शायद इसका उत्तर हर पीढ़ी अलग-अलग देगी।

लेकिन एक पुराने K*K विद्यार्थी के रूप में मेरी सबसे खूबसूरत याद चुनाव जीतने या हारने की नहीं है...

बल्कि उन दिनों की है जब पूरा विश्वविद्यालय विचारों से जीवंत था, और असहमति के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मान बना रहता था।

💙

यदि आप K*K के छात्र रहे हैं, तो कमेंट में बताइए—

क्या आपने छात्र संघ चुनाव देखे हैं?

और आपके अनुसार, छात्र राजनीति ने विश्वविद्यालय को क्या दिया—नेतृत्व, संघर्ष, या दोनों?

🏛️ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का कम्युनिटी सेंटर — जहां सिर्फ कार्यक्रम नहीं, यादें बनती हैं।किसी भी विश्वविद्यालय की पहच...
08/06/2026

🏛️ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का कम्युनिटी सेंटर — जहां सिर्फ कार्यक्रम नहीं, यादें बनती हैं।

किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसके विभागों, कक्षाओं या परीक्षाओं से नहीं होती। उसकी असली पहचान उन स्थानों से बनती है जहां लोग मिलते हैं, विचार साझा करते हैं और यादें संजोते हैं।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का कम्युनिटी सेंटर ऐसा ही एक विशेष स्थान है।

वर्षों से यह केंद्र विश्वविद्यालय परिवार के सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक आयोजनों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। चाहे कोई सम्मान समारोह हो, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सेमिनार, विवाह समारोह या किसी उपलब्धि का उत्सव—कम्युनिटी सेंटर ने अनगिनत अवसरों को यादगार बनाया है।

यह सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि उन हजारों मुस्कुराहटों, तालियों और यादगार पलों का साक्षी है जो यहां वर्षों से गूंजते रहे हैं।

कई छात्रों के लिए यह वह स्थान है जहां उन्होंने पहली बार किसी बड़े विश्वविद्यालयीय कार्यक्रम में भाग लिया।
कई शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए यह उनके जीवन के महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजनों का हिस्सा रहा है।
और कई पूर्व छात्रों के लिए यह आज भी उन दिनों की याद दिलाता है जब पूरा विश्वविद्यालय एक परिवार जैसा लगता था।

समय के साथ भवन बदल सकते हैं, सुविधाएं आधुनिक हो सकती हैं, लेकिन किसी स्थान की असली पहचान वहां से जुड़ी यादों से बनती है।

💙 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का कम्युनिटी सेंटर केवल एक स्थल नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की सामूहिक स्मृतियों का जीवंत हिस्सा है।

👇 क्या आपने कभी यहां किसी कार्यक्रम, समारोह या विशेष अवसर में भाग लिया है?

अपनी सबसे यादगार स्मृति कमेंट में साझा कीजिए।

अगर आप कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं, तो संभव है कि आपकी जिंदगी के कुछ खास पल **Kathi King** में जरूर गुज़र...
07/06/2026

अगर आप कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं, तो संभव है कि आपकी जिंदगी के कुछ खास पल **Kathi King** में जरूर गुज़रे हों।

कुछ जगहें अपने खाने से याद रहती हैं...
और कुछ जगहें उन लोगों की वजह से, जिनके साथ वहां गए थे।

Kathi King उन्हीं जगहों में से एक है।

पहले सेमेस्टर में दोस्तों के साथ पहली ट्रीट...
प्लेसमेंट लगने के बाद की पार्टी...
बर्थडे सेलिब्रेशन...
एग्जाम खत्म होने की खुशी...
या फिर बिना किसी वजह के शाम को "चल यार Kathi चलते हैं" वाला प्लान...

न जाने कितनी कहानियों का गवाह रहा है यह स्थान। ❤️

यहां का खाना हमेशा बातचीत का हिस्सा रहा है। किसी को Cheese Tomato पसंद है, किसी को शाही पनीर, तो किसी को Non-Veg dishes। लेकिन सच कहें तो खाने से ज्यादा स्वाद उन पलों में था जो यहां बिताए गए।

कितने ही K*K स्टूडेंट्स होंगे जिन्हें आज भी याद होगा कि Birthday Cake काटने के बाद सबसे ज्यादा फोटो Kathi King में ही खींची गई थीं। 📸🎂

और फिर खाना खत्म होने के बाद सड़क के दूसरी तरफ जाकर Ice Cream खाना...

जैसे यह पूरा रिवाज हो। 🍨😊

हां, पार्किंग की थोड़ी परेशानी हमेशा रही...
सड़क भी व्यस्त रही...
लेकिन यादें कभी पार्किंग देखकर नहीं बनतीं।

यादें बनती हैं उन दोस्तों से,
जो आज दुनिया के अलग-अलग शहरों में हैं।

यादें बनती हैं उन शामों से,
जो दोबारा कभी वापस नहीं आतीं।

और यादें बनती हैं उन जगहों से,
जो कॉलेज खत्म होने के बाद भी दिल में बसी रहती हैं।

💙 **Kathi King शायद हर K*K वाले की कहानी में कहीं न कहीं मौजूद है।**

अब आपकी बारी...

👇 कमेंट में बताइए:

🍽️ Kathi King में आपका Favourite Dish क्या था?

🎂 सबसे यादगार Birthday Celebration किस Batch के दौरान हुआ था?

👥 और वह दोस्त कौन था जो हर बार बिल बांटने से पहले Washroom चला जाता था? 😄

** *KConfession ❤️**शायद यह पोस्ट कभी उस तक पहुंचे, शायद नहीं...आज मेरी डिग्री पूरी हुए 5 साल हो गए हैं। नौकरी भी है, जि...
06/06/2026

** *KConfession ❤️**

शायद यह पोस्ट कभी उस तक पहुंचे, शायद नहीं...

आज मेरी डिग्री पूरी हुए 5 साल हो गए हैं। नौकरी भी है, जिंदगी भी आगे बढ़ गई है। लेकिन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की एक याद है जो आज भी वहीं रुकी हुई है...

मैंने तुम्हें पहली बार यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी के बाहर देखा था।

तुम्हारे हाथ में किताब थी और मेरे हाथ में बहाना...

बहाना सिर्फ तुम्हें दोबारा देखने का। ❤️

अगले दो साल तक हम शायद सैकड़ों बार एक-दूसरे के सामने से गुजरे होंगे। कभी लाइब्रेरी, कभी डिपार्टमेंट, कभी थर्ड गेट, कभी ब्रह्मसरोवर के आसपास।

तुम मुझे नहीं जानती थीं...
लेकिन मैं तुम्हारा टाइमटेबल तक जानता था। 😅

मैंने कभी हिम्मत नहीं जुटाई कि तुम्हें बता सकूं कि तुम्हें देखकर मेरा पूरा दिन अच्छा हो जाता था।

दोस्त कहते थे, "जा कर बात कर ले।"

लेकिन हर बार दिल की धड़कन दिमाग से जीत जाती थी।

फिर एक दिन पता चला कि तुम्हारा आखिरी सेमेस्टर है।

उस दिन पहली बार महसूस हुआ कि कुछ बातें कहने के लिए सही समय का इंतजार नहीं करना चाहिए।

लेकिन तब भी मैं कुछ नहीं कह पाया...

Convocation की तस्वीरों में तुम थी...
और मैं भी था...

बस फर्क इतना था कि तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान थी,
और मेरे दिल में एक अधूरी कहानी।

आज इतने साल बाद भी जब कभी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की कोई तस्वीर देखता हूं, तो डिग्री, क्लासरूम, एग्जाम कुछ याद नहीं आता...

बस एक चेहरा याद आता है।

अगर तुम यह पोस्ट पढ़ रही हो और तुम्हें लगता है कि यह कहानी तुम्हारी हो सकती है...

तो बस एक कमेंट कर देना—

**"मैंने पढ़ लिया।"** ❤️

नाम आज भी नहीं लिखूंगा...

क्योंकि कुछ मोहब्बतें मुकम्मल होने के लिए नहीं,
याद रहने के लिए होती हैं।

— एक पुराना K*Kian

📚❤️ **इस तस्वीर को देखते ही कितनों की यादें ताज़ा हो गईं?**कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों की जिंदगी का एक अ...
05/06/2026

📚❤️ **इस तस्वीर को देखते ही कितनों की यादें ताज़ा हो गईं?**

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों की जिंदगी का एक अहम पड़ाव...

**Unique Book Center** 📖

किताबों की वो खुशबू...
नए सेमेस्टर की शुरुआत...
सिलेबस की लंबी लिस्ट...
जेब में सीमित पैसे...
और दुकानदार का वो सवाल —
*"कौनसा कोर्स ?"* 😊

यहीं से खरीदी गई थीं वो किताबें जिन्होंने एग्जाम पास करवाए...
यहीं से खरीदे गए थे वो नोट्स जो आखिरी रात के "ब्रह्मास्त्र" बन जाते थे...
और यहीं खड़े होकर दोस्तों के साथ यह बहस भी होती थी कि किताब खरीदनी है या फोटोकॉपी से काम चल जाएगा! 😄

समय बदल गया...
बैच बदल गए...
कई लोग दुनिया के अलग-अलग कोनों में बस गए...

लेकिन बुकशॉप की यादें आज भी वैसी ही ताज़ा हैं। ❤️

📖 **अब एक सवाल हर पुराने विद्यार्थी के लिए...**

👉 **आपने Unique Book Center से पहली कौन-सी किताब खरीदी थी?**

👉 **और आखिरी कौन-सी किताब खरीदकर यहां से निकले थे?**

अपना Department, Batch और किताब का नाम कमेंट में ज़रूर लिखिए।

कौन जाने...
आपका कमेंट पढ़कर कोई पुराना दोस्त आपको पहचान ले। ❤️

👇 चलिए, आज फिर उन दिनों में लौटते हैं...

04/06/2026

✨ **UIET, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय — एक कॉलेज नहीं, जिंदगी का सबसे खूबसूरत अध्याय!** ❤️🎓

कुछ जगहें सिर्फ इमारतें नहीं होतीं, वे यादों का खजाना होती हैं...

**UIET, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय** भी ऐसी ही एक जगह है।

जिस धरती पर हजारों वर्ष पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म, कर्तव्य और संघर्ष का संदेश दिया था, उसी ऐतिहासिक कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर खड़ा है UIET — जहां हर साल हजारों युवा अपने सपनों को नई उड़ान देते हैं।

यहां आने वाला हर छात्र एक सपना लेकर आता है...
कोई इंजीनियर बनने का,
कोई अपने परिवार का नाम रोशन करने का,
तो कोई अपनी पहचान बनाने का।

फिर शुरू होती है एक ऐसी यात्रा, जिसमें पहली क्लास की घबराहट होती है, लैब की भागदौड़ होती है, सेमेस्टर की रातों की मेहनत होती है, कैंटीन की अंतहीन बातें होती हैं और दोस्तों के साथ बिताए वे पल होते हैं जो जिंदगी भर याद रहते हैं।

UIET ने वर्षों में न केवल इंजीनियर तैयार किए हैं, बल्कि ऐसे युवा भी दिए हैं जिन्होंने देश-विदेश की बड़ी कंपनियों, शोध संस्थानों और स्टार्टअप्स में अपनी पहचान बनाई। यहां के छात्रों की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि प्रतिभा को सिर्फ अवसर चाहिए, और UIET ने हमेशा वह मंच प्रदान किया है।

लेकिन UIET की असली पहचान इसकी इमारतों या प्लेसमेंट रिकॉर्ड में नहीं है...

इसकी असली पहचान हैं वे दोस्तियां जो आज भी कायम हैं।
वे शिक्षक जिनकी सीख आज भी रास्ता दिखाती है।
वे संघर्ष, जिन्होंने आत्मविश्वास सिखाया।
और वे यादें, जो वर्षों बाद भी चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं।

समय बदलता रहेगा...
बैच बदलते रहेंगे...
लेकिन UIET से जुड़ी भावनाएं कभी नहीं बदलेंगी।

💙 **Once a UIETian, always a UIETian।**

अगर UIET ने आपकी जिंदगी में भी कोई खूबसूरत याद छोड़ी है, तो कमेंट में अपना Batch और अपनी सबसे यादगार कहानी जरूर लिखें।

शायद आपका एक कमेंट किसी जूनियर को प्रेरणा दे दे। ❤️

2014 में मैंने K*K के  कॉमर्स  डिपार्टमेंट  में एडमिशन लिया था।कॉलेज की जिंदगी उस समय बस दोस्तों, कैंटीन, क्लास बंक और ए...
02/06/2026

2014 में मैंने K*K के कॉमर्स डिपार्टमेंट में एडमिशन लिया था।
कॉलेज की जिंदगी उस समय बस दोस्तों, कैंटीन, क्लास बंक और एग्जाम पास करने तक ही सीमित लगती थी। 😄
लेकिन 2017 में जब डिग्री पूरी हुई और जिंदगी ने असली सवाल पूछने शुरू किए, तब समझ आया कि “कॉलेज खत्म होना” और “करियर शुरू होना” — दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं। ❤️

सरकारी नौकरी का सपना तो था,
लेकिन उस सपने के पीछे कितनी भूख, कितना संघर्ष और कितनी तन्हाई छिपी होती है… ये कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी ने सिखाया। 📚✨

शांति नगर में एक छोटा सा कमरा लिया था।
सुबह की चाय से लेकर रात की आखिरी नींद तक…
बस किताबें, नोट्स, टेस्ट सीरीज और भविष्य की चिंता साथ रहती थी।

तब पता लगा कि लाइब्रेरी में घंटों बैठने वाले लोग सिर्फ पढ़ नहीं रहे होते…
वो अपनी किस्मत बदल रहे होते हैं। 🔥

कई बार सीट नहीं मिलती थी…
कभी आई-कार्ड एक्सपायर होने की परेशानी…
कभी गार्ड की नजर बचाकर अंदर जाना…
तो कभी रोज़ गार्डन की बेंच ही लाइब्रेरी बन जाती थी। 🌿

लेकिन शायद संघर्ष कभी बेकार नहीं जाता।
2019 में जब हाथ में सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र आया,
तो सबसे पहले याद वही कुर्सियाँ, वही लाइब्रेरी और वही थकी हुई शामें आईं। ❤️

आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है —
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने सिर्फ डिग्री नहीं दी…
जीवन जीने की हिम्मत दी है। 🙏

जो लोग आज भी लाइब्रेरी में बैठे अपने सपनों के लिए लड़ रहे हैं…
यकीन मानिए, एक दिन यही संघर्ष आपकी सबसे बड़ी कहानी बनेगा। ✨

कुरुक्षेत्र। 26 मई , 2026----------------------------------------------------------------कुरुक्षेत्र ‘ज्ञान भारतम मिशन’ ...
01/06/2026

कुरुक्षेत्र। 26 मई , 2026

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कुरुक्षेत्र ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान और संरक्षण में हरियाणा का अग्रणी जिला बनकर उभरा है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने सोमवार को यह जानकारी दी। अब तक जिले में 15,818 पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है।

जिला लघु सचिवालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त ने बताया कि जिले में बड़े स्तर पर संरक्षण और डिजिटलीकरण का कार्य जारी है। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व की पांडुलिपियों की खोज के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 515 सर्वेयर तैनात किए गए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के श्रीकृष्ण संग्रहालय की 140 पांडुलिपियां तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय स्थित पांडुलिपि संसाधन एवं संरक्षण केंद्र की 15,678 पांडुलिपियां पहले ही ‘ज्ञान भारतम मिशन’ पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी हैं।

उपायुक्त ने बताया कि मिशन के तहत 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों को शामिल किया जा रहा है। सर्वेयर लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं तथा गांवों और शहरों में उपलब्ध पांडुलिपियों को पोर्टल पर अपलोड करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

प्रशासन ने मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में उपलब्ध पांडुलिपियों की सूची तैयार करने का निर्णय भी लिया है। संस्कृत, हिंदी, फ़ारसी सहित अन्य भाषाओं की पांडुलिपियों का वैज्ञानिक तरीके से डिजिटलीकरण कर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

उपायुक्त ने कहा कि इस पहल से शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और आम लोगों को भारत की ज्ञान परंपरा तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि महाभारत काल से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण यह अभियान कुरुक्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है।

इससे पहले हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यभर के उपायुक्तों के साथ मिशन की प्रगति की समीक्षा की।

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