07/07/2024
दोपहर एक बजे के करीब अपने पत्नी को फोन किया तो उन्होंने कहा कि शिवांश (छोटा पुत्र) अपने स्कूल में टाफी बांटने के लिए पैसा मांग रहे। मैंने पूछा, आज क्या है? उन्होंने भी कहा कि वे कह रहे थे कि तुम्हारी विवाह की वर्षगांठ पर सबको टाफी देकर बताऊंगा। मैं तो आवाक रह गया कि हमें याद भी नहीं आज ही के दिन हम श्रद्धा के साथ दाम्पत्य जीवन में आये थे।
खैर, अब यह सब देखते-देखते वह भी अभ्यस्त हो चुकी हैं। उनको भी कोई गिला सिकवा नहीं रहा। ऐसी धर्मपत्नी भी मिल सकती है, जिसे ऐसी बातों का मलाल नहीं, यह तो ऊपर वाले की हम पर बहुत बड़ी कृपा ही रही होगी। हमने तो सात जन्मों की कसम खाई थी, लेकिन अगले सौ जन्मों में भी यही मिलें। मेरी भोले शंकर से यही प्रार्थना है।