24/08/2026
Central Sanskrit University, Lucknow Campus केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर में एक दिवसीय सेमिनार एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात् राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का आयोजन राज्य कार्यालय, खादी और ग्रामोद्योग आयोग, लखनऊ, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं में खादी, स्वदेशी उत्पादों, ग्रामोद्योग तथा आत्मनिर्भर भारत के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम का संचालन श्री आर.पी. विश्वकर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर इन्क्यूबेटर, जूट क्लस्टर की श्रीमती अंजली सिंह, NSCST HUP लखनऊ के श्री रवि ओरान, KVIC लखनऊ की श्रीमती श्रुति अग्रवाल, वरिष्ठ कार्यकारी, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, श्री काली चरण प्रसाद, कार्यकारी, खादी और ग्रामोद्योग आयोग तथा केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के निदेशक प्रो.सर्वनारायण झा, वरिष्ठ आचार्य प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी, खादी और ग्रामोद्योग आयोग की सह निदेशक श्रीमती दिव्या श्रीवास्तव तथा आयोग के कार्यकारी श्री आर.पी. विश्वकर्मा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गांधी जी के विचारों, स्वावलंबन, खादी, ग्रामोद्योग तथा सामाजिक सरोकारों से परिचित कराया गया। वक्ताओं ने कहा कि आत्मनिर्भरता और स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग की गांधीवादी अवधारणा आज भी प्रासंगिक है। विद्यार्थियों को स्वरोजगार एवं कौशल विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में बी.ए. (ऑनर्स) संस्कृत एवं लोक सेवा अध्ययन के छात्र रास बिहारी एवं प्रणव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। मेघना शुक्ला एवं अंजली कुमारी द्वितीय तथा जाह्नवी एवं नेहा तृतीय स्थान पर रहीं। इसी क्रम में निबन्ध प्रतियोगिता में प्रतीक्षा मिश्रा एवं रूपाली सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। संतोष झा एवं समृद्धि देश पाण्डेय को द्वितीय तथा आशी दूबे को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
परिसर निदेशक प्रो.सर्वनारायण झा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि स्वदेशी, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की विचारधारा का प्रतीक है। युवाओं को शिक्षा और कौशल के माध्यम से रोजगार पाने के साथ रोजगार सृजन की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। विद्यार्थियों से महात्मा गांधी के स्वावलंबन और श्रम की प्रतिष्ठा के विचारों को अपनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता राष्ट्र निर्माण से जुड़ी सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग को युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता का प्रभावी माध्यम बताया। कार्यक्रम में परिसर के वरिष्ठ आचार्य प्रो.भारत भूषण त्रिपाठी, प्रो.अवनीश अग्रवाल, डॉ.कृति रस्तोगी, प्राध्यापकगण तथा परिसर के छात्र-छात्राएँ सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के अंत में परिसर निदेशक के द्वारा विजेता प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र व पुरस्कार वितरित किए गए। अध्यक्षीय उद्बोधन एवं धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात् राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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