25/04/2025
आज दिनाँक 25.04.2025 को कालीचरण पी0जी0 कालेज लखनऊ में ’भारतीय ज्ञान परम्परा: विविध आयाम’ विषय पर ’एक दिवसीय राष्ट्रीय-संगोष्ठी’ का आयोजन किया गया संगोष्ठी में गौरवशाली भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर चिन्तन किया गया और वाह्य आक्रांताओं मुगलों, अंग्रेजों विशेषकर मैकाले ने हमारी जिस ज्ञान परम्परा को नष्ट किया उसे पुनःस्थापित करने वाले पहलुओं पर विचार किया गया संगोष्ठी का प्रारम्भ सरस्वती वन्दना और स्वागत गीत से हुआ महाविद्यालय के प्रबन्धक इं0 वी0के0 मिश्र ने मुख्य अतिथि प्रो0 जे0पी0 पाण्डेय, कुलपति, अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) लखनऊ, मुख्य वक्ता प्रो0 आर0पी0 मिश्र, पूर्व डीन कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृतिचिन्ह देकर स्वागत किया। अपने स्वागत उद्बोधन में आपने कहा कि भारत खगोल, वास्तु, ज्योतिष, गणित, विज्ञान चित्रकला, स्थापत्य कला आदि क्षेत्रों में विश्व का मार्ग दर्शक रहा है। हमें अपनी गौरवशाली परम्परा से जुड़कर एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना है। जो पुनः विश्व का नेतृत्व कर सके। मुख्य अतिथि प्रो0 जे0पी0 पाण्डेय ने संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा गुरू केन्द्रित रही लेकिन किन्ही कारणों से बीच में इस परम्परा से हम भटक गये। आज भी देश को चाणक्य जैसे गुरूओं की आवश्यकता है। जो देश को नैराश्य के वातावरण से निकाल कर शिक्षा, संस्कृति और मानवता का विकास कर सके, जिससे एक ऐसे धर्म आधारित समाज का निर्माण हो सके जिसमें राजधर्म, राष्ट्रधर्म, गुुरू का धर्म, पिता का धर्म आदि का पालन करने वाले नागरिकों की संकल्पना साकार की जा सके। मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो0 आर0पी0 मिश्र जी ने कहा कि भारतीय शिक्षा प्रकृति के साथ समन्वय पर आधारित थी और संवेदना के विकास पर अधिक जोर दिया जाता था। लेकिन वर्तमान शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थी सेंवेदनहीन बनाये जा रहे हैं। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो0 चन्द्र मोहन उपाध्याय ने संगोष्ठी में आए हुए अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि आज की संगोष्ठी पुनर्जागरण की ओर बढ़ने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। शोध की प्रक्रिया से गुजरते हुए हमें स्वयं को विश्वपटल पर स्थापित करना होगा। तभी हम वास्तविक विकास कर पाएंगे।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे उत्तर-प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री प्रो0 सतीश चन्द्र द्विवेदी ने यूरोपीय देशों की पेटेंट वाली मानसिकता की ओर ध्यान आकर्षिक करते
हुए कहा कि भारत का चिन्तन वसुधैव कुटुम्बकम् का है। हमारा ज्ञान सभी के लिए हमारा ज्ञान सभी के लिए जड़ से जग को जोड़ने वाला है। विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता कर रहे प्रबन्ध समिति के सदस्य श्री अमित टण्डन जी ने कहा कि इस तरह के आयोजन हमें अपनी पुरातन परम्परा से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं और युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करते हैं।
पैनल डिस्कशन में अपने विचार रखते हुए नवयुग महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो0 मंजुला उपाध्याय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में विज्ञान की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारतीय
शिक्षा मूल्यों पर आधारित थी। हमें अपने देश को आगे ले जाने के लिए नैतिक अर्थशास्त्र को केन्द्र में रखकर विचार करना होगा। लुआक्टा के अध्यक्ष प्रो0 मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि हमें भारतीय ज्ञान परम्परा के उस पहलू को जानना होगा जिसमें लघु और कुटीर उद्योग अर्थव्यवस्था का आधार होते थे। सत्र में प्रो0 बीना राय, प्रो0 सारिका दुबे, प्रो0 रचना श्रीवास्तव, प्रो0 अनिल कुमार सिंह ने भी अपने विचार रखे। पैनल डिस्कशन सत्र का संचालन राजनीतिशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य श्री डी0सी0डी0आर0 पाण्डेय ने किया।
संगोष्ठी में तीन तकनीकि सत्रों का भी संचालन किया गया। श्यामसुन्दर दास सभागार में तकनीकि सत्र का संचालन प्राचीन भारतीय इतिहास की अध्यक्षा प्रो0 अर्चना मिश्रा के द्वारा किया गया और आई0सी0टी0 काॅमर्स विभाग में तकनीकि सत्र का संचालन समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्षा प्रो0 मीना कुमारी के द्वारा किया गया। इन सत्रों में शोधार्थियों ने अपने शोधपत्रों का वाचन किया और श्रोताओं की जिज्ञासाओं को उचित समाधान प्रस्तुत किया। हिन्दी विभाग के विभागध्यक्ष प्रो0 मनोज कुमार पाण्डेय द्वारा संगोष्ठी में आए हुए अतिथियों, शोधार्थियों और छात्रों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य डाॅ0 अरूण कुमार यादव के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अन्त में संगोष्ठी के सह-संयोजक डाॅ0 मुकेश कुमार मिश्र के द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी। आपने बताया कि संगोष्ठी में देश के 15 राज्यों से लगभग 340 प्रतिभागियों ने आॅनलाइन/आॅफलाइन सहभागिता की और 190 शोधपत्रों का वाचन किया गया।
कार्यक्रम में कृष्णा देवी गल्र्स डिग्री कालेज की प्राचार्या प्रो0 सारिका दुबे, अवध गल्र्स डिग्री कालेज की प्राचार्या प्रो0 बीना राय, सी0एस0एन0 पी0जी0 कालेज हरदोई के प्राचार्य प्रो0 कौशलेन्द्र सिंह, कालीचरण इण्टर कालेज के प्राचार्य श्री अनिल मिश्रा, महाविद्यालय के प्रो0 वी0एन0 मिश्रा, डाॅ0 अल्का द्विवेदी, प्रो0 कल्याणी द्विवेदी, डाॅ0 मनीषा सिंह सहित, महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण और विविध महाविद्यालयों से आए हुए शोधार्थी एवं छात्र उपस्थित रहे।