11/08/2015
फिर इश्क़ का जुनूं चढ़ रहा है सिर पे ,
मयख़ाने से कह दो दरवाज़ा खुला रखे...
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साथ दिल दे रहा है न किस्मत मेरी,
हो गये सब ख़फ़ा, आप ही की तरह.
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हश्र के दिन मेरी चुप का माज़रा,
कुछ न कुछ आपसे भी पूछा जाएगा.
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अब शिकायत ना करना हमसे...
गर हम भी तुम्हारे जैसे हो गये...!!
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कई मौसम गुज़र जायेंगे, उनकी परवरिश में
ही...
जो तेरे वादे मेरी आँखों में सपने बो गए ...
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उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या
अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और
किसी का होने भी नहीं देती....!!
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इश्क़ वो नहीं जो तुझे मेरा कर दे....
इश्क़ वो है जो तुझे किसी और का ना
होने दे !!
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बहुत गौर से देखने पर जिंदगी को जाना
मैंने...
दिल से बड़ा दुश्मन पूरे जमाने में नहीं है...!!!
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देखकर सोचा तो पाया फासला ही
फासला ......
सोचकर देखा तो बहुत करीब हो तुम ....
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तेरी कुर्बत ना हासिल तो ना सही .......
तेरा खयाल हर वक्त मेरे साथ होता है ......
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यूँ तो कोई शिकायत नहीं मुझे, मेरे आज से,
मगर,
कभी-कभी बीता हुआ कल बहुत याद आता
हैं...
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कभी हमसे भी पुछो हाल हमारा ........
कभी हम भी कहें दुआ है आपकी ......
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पता नही ये बादल क्यूँ भटक रहे हैं फ़िज़ा में
दर बदर,
शायद इनसे भी बात नहीं करता इनका
अपना कोई...
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टूट कर बिखर कर भी तेरा अपना नहीे हुआ,
मैं शीशे का शीशा रहा कभी आईना नहीं
हुआ...
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तुम्हारा नाम किसी अजनबी के लब पर
था...
ज़रा सी बात थी दिल को मगर लगी है
बहुत.
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चलो माना मे बहुत बुरा हु, लेकिन तुम तो
अच्छे बनो तुम्हे किसने रोका है....!!
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जिस्म कि दरारो से रुह दिखने लगी है
बहुत अंदर तक तोड़ गया मुझे इश्क तेरा
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कैसे चलूँ तेरे_एहसास के बिना दो_कदम भी
मैं, लड़खड़ाती जिदंगी की
आखरी_बैसाखी हो तुम..
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दिल हमारा भी खूबसूरत कम तो न था..
मगर मरने वाले हर बार सूरत पे ही मरे..
____...'; लफ्जो से तो K.G. के बच्चे भी खेलते हैं,
';पर मजा तब हैं..जब लिखने का अंदाज कुछ
शायराना हो !