AISA - All India Students' Association - Uttar Pradesh

AISA - All India Students' Association - Uttar Pradesh AISA is a radical students movement defending the principles of Equality, Gender Justice, Education & Employment from the assault of Neo-liberal Policies.

Manifesto:
AISA is a revolutionary, democratic students’ organization. We have led struggles for the democratization of campus life, for a pro-people and scientific education system and for the right to education and employment. Through mobilizing the revolutionary, left, democratic and liberal sections of the student community, we are committed to organizing a broad-based students’ movement as an

important organ in the revolutionary transformation of Indian society. AISA derives it’s ideological path from the progressive ideologies of democratic movements. We believe that Marxism is the science of revolutionary change and human emancipation. Through waging a relentless struggle against reactionary ideologies and cultural values, we are committed towards a creative and popular propagation of scientific culture, democracy and modern thought. AISA integrates itself with all democratic movements of the Indian people. In giving them a coherent, democratic ideological and political line, we accept the role of CPI-ML as the true communist party. We emphasize the solidarity of the students’ movement with struggles of the working class, especially with revolutionary peasant struggles in our country. The formation of AISA in 1990 came about through the integration of student movements inspired by the ideological line of the Naxalbari peasant revolt as well as those who derived their understanding from the 1974 peoples’ movement in Bihar. Over the years, AISA has emerged as a popular left students’ organization struggling against the anti-student, anti-people right-wing organization like NSUI and ABVP, exposing at the same time opportunist and semi-anarchist trends in the left democratic movement. The hollow “left” rhetoric and ritual activities of SFI and AISF have become completely disconnected with the democratic aspirations of students and the dynamic student movement. Through following an opportunist ideological- political line, they have gradually declined and become marginalized forces in the student movement. Especially in the Hindi-Urdu speaking areas they could never become the representative forces of the aspirations of the student community. Similarly, AISA has provided a positive negation of the semi-anarchist tendencies of those organizations which identify with the Naxalbari movement but fail to distinguish the difference between the mass organization and the party. Failing to build a broad based student movement addressing the popular aspirations of the larger student community they have been reduced to many fighting sects. Ultimately, trapped in endless left “phrase mongering” they are gradually disintegrating as a force of the student movement. As opposed to this, AISA has led the struggle for a radical democratization of education, culture, society and politics. AISA wages a firm and uncompromising struggle against all reactionary organizations and lumpen leaders within the student movement. At each step, we have upheld the dignity and equality of women and stood for their participation and leadership in both the student movement and social life. In this light, as a successor and student of the glorious legacy of student struggles, AISA commits itself to stand against the prevailing backwardness of our country and its dependence on external powers, which has provided a fertile ground for fundamentalism, medieval barbarism, casteism and communal frenzy, causing a gradual erosion of our national sovereignty and subjecting India to the threat of neocolonialism. The alarming rise of communal fascism is not only a threat for our rich cultural legacy of communal harmony but has also posed a grave threat to nation building and the very foundations of democratic politics. To counter the monster of communal fascism and uphold a secular politics, AISA holds that religion is primarily an individual concern and should be completely separated from politics and from the institutions of governance. We struggle to carry forward the modern idea of secularism– “Sarva Dharma Varjate” as against the conventional notion of “Sarva Dharma Sambhav.”
We are committed to defending national sovereignty and revolutionary democracy. We also extend our solidarity to ongoing people’s movements against imperialism in Third World countries, just as we support democratic movements within these imperialist countries. As a leading force of the anti-imperialist democratic front of Asian students, the Asian Students Association (ASA), AISA endeavours to consolidate the unity and fraternity of the people of south Asia against the onslaught of imperialism.

चारु मजूमदार अमर रहे।
15/05/2026

चारु मजूमदार अमर रहे।

14/05/2026

पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के खिलाफ लखनऊ विश्वविद्यालय के आइसा का प्रदर्शन

एनटीए को भंग करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठी

करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले और देशभर में लगातार बढ़ते परीक्षा घोटालों के खिलाफ आज लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर 1 पर छात्रों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), नेशनल स्टूडेंट्स यूथ फेडरेशन (NSYF), भीम आर्मी स्टूडेंट फेडरेशन (BASF) और भगत सिंह छात्र मोर्चा (BSM) के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया। प्रदर्शन के बाद छात्रों ने भारत की राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से सौंपा।

प्रदर्शन में छात्रों ने “एनटीए को भंग करो”, “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो”, “पेपर लीक बंद करो”, “शिक्षा का निजीकरण बंद करो” जैसे नारे लगाए। वक्ताओं ने कहा कि हाल के वर्षों में देशभर में दर्जनों भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक और परीक्षा घोटालों से प्रभावित हुई हैं, जिनसे करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं। NEET-UG 2026 पेपर लीक उसी व्यापक संकट का हिस्सा है, जिसने छात्रों के भीतर पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर गहरा अविश्वास पैदा किया है।

आइसा लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष शान्तम निधि ने कहा कि “आज देश का युवा लगातार परीक्षा घोटालों, बेरोजगारी और शिक्षा के बढ़ते निजीकरण के बीच जी रहा है। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन सरकार एक निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था तक सुनिश्चित नहीं कर पा रही है। एनटीए पारदर्शिता का नहीं बल्कि केंद्रीकृत, अपारदर्शी और ठेका आधारित परीक्षा व्यवस्था का प्रतीक बन चुका है। जब परीक्षा संचालन को निजी कंपनियों और ठेका मॉडल के हवाले किया जाएगा, तब पेपर लीक और संगठित भ्रष्टाचार लगातार बढ़ेंगे। एनटीए को तत्काल भंग किया जाना चाहिए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।”

NSYF के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल राज ने कहा कि “लगातार हो रहे पेपर लीक यह साबित करते हैं कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है। एक ओर रोजगार के अवसर लगातार कम किए जा रहे हैं, दूसरी ओर प्रतियोगी परीक्षाओं को भ्रष्टाचार और माफिया नेटवर्कों के हवाले कर दिया गया है। मेहनत करने वाले छात्र आज असुरक्षा और निराशा के बीच जीने के लिए मजबूर हैं।”

BASF के उपाध्यक्ष वरुण आजाद ने कहा कि “शिक्षा व्यवस्था को धीरे-धीरे बाजार और निजी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है। इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब, ग्रामीण, दलित, पिछड़े और मेहनतकश तबकों के छात्रों को उठाना पड़ता है। जब शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था दोनों मुनाफे और ठेका मॉडल के अधीन चली जाती हैं, तब समान अवसर का दावा खोखला हो जाता है।”

BSM के दीपांकर ने कहा कि “पेपर लीक अब अपवाद नहीं बल्कि व्यवस्था का हिस्सा बनते जा रहे हैं। जब करोड़ों युवाओं का भविष्य कुछ केंद्रीकृत परीक्षाओं पर निर्भर हो और वही परीक्षाएं बार-बार भ्रष्टाचार और लीक से प्रभावित हों, तब यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि सामाजिक अन्याय का प्रश्न बन जाता है।”

ज्ञापन में छात्रों ने मांग की कि NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की सर्वोच्च न्यायिक निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तत्काल भंग किया जाए, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, परीक्षा संचालन में निजी कंपनियों और ठेका मॉडल की भूमिका समाप्त की जाए तथा पेपर लीक से प्रभावित छात्रों को न्याय और मुआवजा दिया जाए।

छात्र संगठनों ने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार टूटती रही, तो देश के करोड़ों युवाओं का लोकतांत्रिक संस्थाओं और समान अवसर के विचार पर विश्वास भी कमजोर होगा। छात्रों ने कहा कि शिक्षा और रोजगार को बाजार और भ्रष्ट नेटवर्कों के हवाले करने के बजाय सार्वजनिक, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

*जारीकर्ता:*
शान्तम निधि, अध्यक्ष, आइसा लखनऊ विश्वविद्यालय
हर्षवर्धन, सचिव, आइसा लखनऊ विश्वविद्यालय

पेपर लीक के ख़िलाफ़ आइसा का प्रदर्शन , धर्मेन्द्र प्रधान का मांगा इस्तीफ़ाइलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन पर ऑल इ...
14/05/2026

पेपर लीक के ख़िलाफ़ आइसा का प्रदर्शन , धर्मेन्द्र प्रधान का मांगा इस्तीफ़ा

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने NEET UG 2026 पेपर लीक के संदर्भ में NTA और भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया। आइसा ने मांग की NTA जैसी भ्रष्ट संस्था को ख़त्म किया जाए और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफ़ा दें।

आइसा इलाहाबाद की अध्यक्ष कॉम. सोनाली ने कहा कि जब से भाजपा सरकार बनी है तब से पेपर लीक की घटनाएं देश में लगातार बढ़ रही हैं। UGC NET से NEET किसी भी परीक्षा में पारदर्शिता नहीं बची है इसके बावजूद NTA को भाजपा सरकार द्वारा न केवल संरक्षण दिया जा रहा है बल्कि उसकी संलिप्तता भी दिखाई देती है।

आइसा उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव कॉम. शशांक ने बात रखते हुए कहा कि देश में जितने भी भ्रष्टाचारी, बलात्कारी लोग हैं उनको संरक्षण देने का काम मोदी सरकार कर रही है। अमेरिकी साम्राज्यवाद का असर पूरे देश में महंगाई के रूप में पड़ रहा है ऐसे में मोदी सरकार NTA और कोचिंग माफियाओं के साथ मिलकर छात्रों का लगातार शोषण कर रही है।

आइसा इलाहाबाद के सहसचिव कॉम. मानवेन्द्र ने कहा कि शिक्षा और रोजगार पर मोदी सरकार लगातार हमला कर रही है। इसी क्रम में हम लोग देखते हैं कि पिछले दशक से डबल इंजन की सरकार पुलिस से लेकर शिक्षक भर्ती, RO/ARO और NTA द्वारा NEET, JEE, UGC– NET और तमाम परीक्षाओं के पेपर लगातार लीक हो रहे हैं लेकिन भाजपा सरकार अपनी जिम्मेदारी से भागती रहती है। AISA की मांग है कि परीक्षा लीक की घटनाओं में शामिल सभी दोषियों पर कार्रवाई हो और अपनी जवाबदेही तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफ़ा दें।

प्रदर्शन में आयुष, विपुल, किशन , शिवांशु, लेनिन, आदर्श, आदित्य, पल्लवी, साक्षी, अमन, मनीष, विश्वेंद्र, सुमित, शशिभूषण, शिल्पी सहित तमाम छात्र शामिल रहे।

पिछले दशक से पेपर लीक की तमाम घटनाएँ हम लोग लगातार देख रहे हैं। NTA द्वारा कराई जा रही JEE, UGC–NET, NEET की परीक्षा हो,...
13/05/2026

पिछले दशक से पेपर लीक की तमाम घटनाएँ हम लोग लगातार देख रहे हैं। NTA द्वारा कराई जा रही JEE, UGC–NET, NEET की परीक्षा हो, इनका बार–बार लीक हो जाना NTA और सरकार की छात्रों के प्रति लापरवाही को दिखाता है। इस बार NEET UG 2026 पेपर लीक भी NTA और मोदी सरकार की उसी लापरवाही को दिखाता है।

उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में RO/ARO से लेकर पुलिस और शिक्षक भर्ती के पेपर लीक हो जा रहे हैं, इसके बावजूद संबंधित अधिकारी और मंत्रालय अपनी जवाबदेही से दूर भागते रहते हैं।

देश में युवाओं की आत्महत्या दर लगातार बढ़ रही है जिसका बड़ा कारण शिक्षा और रोजगार का संकट है। NTA और तमाम कोचिंग संस्थान हर बार इन लापरवाहियों का हिस्सा बनते हैं उसके बावजूद भाजपा सरकार उनको संरक्षण देती है। भाजपा सरकार देश के युवाओं की शिक्षा और रोजगार के संदर्भ में क्या सोचती है? ये सब अब स्पष्ट है।

इलाहाबाद में कल 14 मई को AISA द्वारा छात्रसंघ भवन (AU) पर दोपहर 02: 30बजे छात्रों की मांग को लेकर प्रदर्शन* किया जायेगा।

NTA जैसी भ्रष्ट संस्था को खत्म करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफ़ा देने की मांग में आप सब भी शामिल रहें।✊🏽*

03/05/2026

समता साहित्य उत्सव

प्रणय कृष्ण का वक्तव्य

यूजीसी समता रेगुलेशन के ख़िलाफ़ याचिका दायर करने वाला मृत्युंजय तिवारी, जिसकी सराहना भी ख़ुद बलात्कारियों द्वारा की गई थ...
02/05/2026

यूजीसी समता रेगुलेशन के ख़िलाफ़ याचिका दायर करने वाला मृत्युंजय तिवारी, जिसकी सराहना भी ख़ुद बलात्कारियों द्वारा की गई थी।


#यूजीसी

01/05/2026

अनामिका सिंह की मौत हादसा नहीं, यह संस्थागत लापरवाही से हुई हत्या है।
हॉस्टल की खराब हालत, इलाज में देरी और अब छात्रों की आवाज़ दबाने की कोशिश, यह साफ दिखाता है कि प्रशासन जिम्मेदारी से भाग रहा है।
बीबीएयू प्रशासन जवाब दे, दमन बंद करे और दोषियों पर कार्रवाई करे।
न्याय सिर्फ मांग नहीं, संघर्ष से हासिल होगा।

संस्थागत लापरवाही से मौत, प्रशासन का दमन: आइसा की मांग—अनामिका सिंह को न्याय और बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय स...
01/05/2026

संस्थागत लापरवाही से मौत, प्रशासन का दमन: आइसा की मांग—अनामिका सिंह को न्याय और बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से जवाबदेही

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) लखनऊ के बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की छात्रा अनामिका सिंह की मौत की कड़ी निंदा करता है। यह मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाही, प्रशासन की उदासीनता और छात्र कल्याण की पूरी व्यवस्था के विफल हो जाने का परिणाम है। आइसा बीबीएयू के उन छात्रों के साथ मजबूती से खड़ा है जो पिछले 3 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।

अनामिका 19-20 अप्रैल को बीमार हुईं, बताया जा रहा है कि यह हॉस्टल के खाने से जुड़ी समस्या थी। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और 26 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई। यह बेहद गंभीर बात है कि एक छात्रा विश्वविद्यालय के अंदर बीमार होती है, उसे समय पर उचित इलाज नहीं मिलता और कुछ ही दिनों में उसकी जान चली जाती है। यह दिखाता है कि विश्वविद्यालय अपनी बुनियादी जिम्मेदारियों में पूरी तरह असफल हो चुका है। जब कोई विश्वविद्यालय सुरक्षित भोजन, समय पर चिकित्सा और आपातकालीन सहायता नहीं दे सकता, तो वह शिक्षा का संस्थान नहीं रह जाता, बल्कि छात्रों को असुरक्षित छोड़ देने की जगह बन जाता है।

और भी अधिक निंदनीय है कि अनामिका की मृत्यु के बाद प्रशासन का रवैया कैसा रहा। छात्रों ने हॉस्टल की स्थिति, चिकित्सा में लापरवाही और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई, लेकिन इन सवालों का जवाब देने के बजाय प्रशासन ने दमन का रास्ता चुना। छात्रों ने बताया है कि उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है और उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे अपना विरोध वापस लें। यह साफ दिखाता है कि संस्थान अपनी विफलताओं का सामना करने के बजाय असहमति को दबाने की कोशिश कर रहा है।

आइसा प्रशासन द्वारा छात्र आंदोलनों को “भ्रामक जानकारी” बताने की कोशिश को पूरी तरह खारिज करता है। इस तरह के बयान न केवल असंवेदनशील हैं, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति है जिसके जरिए छात्रों की आवाज़ को कमजोर किया जाता है और जिम्मेदारी से बचा जाता है। चिकित्सा रिकॉर्ड को सार्वजनिक न करना, स्वतंत्र जांच से इनकार करना और छात्रों की मांगों पर बातचीत से बचना केवल संदेह को और गहरा करता है। सच्चाई बंद कमरों में जारी बयानों से नहीं, बल्कि सार्वजनिक जवाबदेही से सामने आती है।

इस घटना को हमें व्यापक परिप्रेक्ष्य में भी समझना होगा। आज की नीतियों में शिक्षा को अधिकार के बजाय एक वस्तु की तरह देखा जा रहा है। इसके कारण विश्वविद्यालयों के अंदर जरूरी सेवाएं जैसे हॉस्टल, मेस और स्वास्थ्य केंद्र या तो उपेक्षित हैं या न्यूनतम स्तर पर चल रहे हैं। खासकर वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र, जो इन सार्वजनिक संस्थानों पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं, उन्हें असुरक्षित परिस्थितियों में जीने को मजबूर किया जा रहा है। अनामिका की मौत इस व्यवस्था की क्रूर सच्चाई को सामने लाती है।

आइसा निम्नलिखित मांगें उठाता है:

1. अनामिका सिंह की मृत्यु के कारणों की समयबद्ध और स्वतंत्र न्यायिक जांच हो, जिसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

2. इस मामले से जुड़े सभी चिकित्सा रिकॉर्ड, स्वास्थ्य केंद्र के दस्तावेज और हॉस्टल से संबंधित जानकारी तुरंत जारी की जाए।

3. बीबीएयू में हॉस्टल भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक ऑडिट एक स्वतंत्र समिति द्वारा किया जाए, जिसमें छात्र प्रतिनिधित्व भी शामिल हो।

4. लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, जिसमें हॉस्टल प्रशासन और स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारी शामिल हों।

5. छात्र आंदोलन पर हो रहे दमन, डराने-धमकाने और पुलिस हस्तक्षेप को तुरंत बंद किया जाए।

6. सभी छात्रों के लिए सुरक्षित आवास, सुलभ चिकित्सा और सम्मानजनक व्यवहार की संस्थागत गारंटी सुनिश्चित की जाए।

आइसा यह स्पष्ट करता है कि बीबीएयू में चल रहा संघर्ष केवल एक घटना का सवाल नहीं है, बल्कि यह इस बुनियादी सवाल से जुड़ा है कि विश्वविद्यालय किसके लिए हैं। क्या वे छात्रों को सुरक्षा और सम्मान देने वाली जगह हैं, या ऐसी संस्थाएं जो संकट के समय उन्हें असहाय छोड़ देती हैं और जब वे न्याय मांगते हैं तो उनकी आवाज़ दबा देती हैं?

हम देश भर के छात्रों, शिक्षकों और लोकतांत्रिक ताकतों से अपील करते हैं कि वे बीबीएयू के छात्रों के संघर्ष के साथ एकजुटता में खड़े हों। अनामिका सिंह को न्याय दिलाना केवल एक छात्रा के लिए न्याय नहीं, बल्कि हर छात्र के जीवन, सम्मान और शिक्षा के अधिकार की रक्षा का सवाल है।

बाबासाहेब की जयंती पर आइसा ने निकाला समता अधिकार मार्चइलाहाबाद | बाबासाहेब डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के जन्मदिवस पर आइसा द्वा...
14/04/2026

बाबासाहेब की जयंती पर आइसा ने निकाला समता अधिकार मार्च

इलाहाबाद | बाबासाहेब डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के जन्मदिवस पर आइसा द्वारा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन से विधि संकाय में स्थित अंबेडकर प्रतिमा तक समता अधिकार मार्च आयोजित किया गया। यह मार्च अंबेडकर प्रतिमा तक पहुंचकर सभा के रूप में बदलता है।

आइसा कार्यकर्ताओं के द्वारा विधि संकाय में स्थित अंबेडकर प्रतिमा को लोहे की जालियों से आज़ाद करने की मांग की गई। आइसा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे कई बार इस प्रतिमा को लोहे की दोहरी चहारदीवारी से आज़ादी की मांग कर चुके हैं लेकिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन सुरक्षा आदि कारणों का हवाला देते हुए उनकी मांग को स्वीकार नहीं करता है। इस बयान को लेकर आइसा से जुड़े लोगों का कहना है कि इस प्रतिमा को दोहरी लोहे की मजबूत छड़ों से कैद करना उसी मनुवादी मानसिकता का प्रतीक है जो अंबेडकर और उनके प्रगतिशील विचारों को कैद करना चाहती है।

अम्बेडकर प्रतिमा तक मार्च के पहुंच जाने के काफ़ी देर बाद वहां के सुरक्षाकर्मियों द्वारा चहारदीवारी का ताला खोला जाता है। उसके बाद आइसा कार्यकर्ता प्रतिमा पर माला और फूल चढ़ाते हैं।

सभा की शुरुआत करते हुए आइसा इलाहाबाद की अध्यक्ष कॉमरेड सोनाली ने कहा कि आज की सरकार लगातार अंबेडकर और संविधान पर हमला कर रही है। सोनाली ने यूजीसी रेगुलेशन 2026 को रोहित एक्ट की तर्ज़ पर लागू करने की बात कही और ट्रांस एक्ट 2026 का विरोध किया। सोनाली ने अपनी बात ख़त्म करते हुए कहा कि हम लोग संगठित होकर भगत सिंह – अम्बेडकर के सपनों का समतामूलक समाज बनाने के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।

आइसा इलाहाबाद के सहसचिव कॉम. मानवेन्द्र ने कहा कि भारत में भाजपा सरकार हिटलर और मुसोलिनी की तरह फासीवादी माहौल तैयार कर रही है। छात्र, किसान, मजदूर, महिलाओं से लेकर आदिवासियों द्वारा अपनी ज़रूरी मांगो को लेकर किए जा रहे आंदोलनों को इसी फासीवादी सरकार द्वारा कुचला जा रहा है। मानवेन्द्र ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बहुत दूर जा चुकी है, जब शोषित तबके और उनका पक्ष रखने वाले लोग वेब मीडिया से लेकर सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया के माध्यम से सवाल करते हैं तब आई टी अधिनियम का गलत हवाला देते हुए सरकार उन लोगों पर पुलिसिया दमन करती है। आज इस सरकार की पुलिस ने जनबुद्धिजीवी लोगों और अपने हक़ के लिए लड़ रहे आंदोलनकारियों पर दमनात्मक कार्रवाई तेज़ की है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र शुभम ने कहा कि आज लगातार प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक फ़ीस महंगी हो रही है। इस महंगाई का सबसे बड़ा असर देश के वंचित, शोषित तबकों और देश की महिलाओं पर पड़ रहा है। यह असर फासीवादी, ब्राम्हणवादी सरकार द्वारा अंबेडकर की प्राथमिक चिन्ता में आने वाले समाज पर किए जाने वाले हमले को दिखाता है।

इलाहाबाद के छात्र अभिषेक ने बाबासाहेब अंबेडकर के संघर्षों की विरासत को याद करते हुए कहा कि आज जब संविधानविरोधी ताकतें बढ़ी हैं तब समतामूलक समाज को बनाने के लिए बाबासाहेब के विचारों और संविधान को बचाने की बड़ी ज़रूरत है।

बातचीत को ख़त्म करते हुए आइसा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष कॉमरेड मनीष ने कहा कि जिस प्रकार बाबासाहेब अम्बेडकर अपने समय में मजदूरों की लड़ाई न्यूनतम मज़दूरी और 8 घंटे काम के लिए लड़ रहे थे उसी प्रकार आज पानीपत से लेकर नोएडा तक मज़दूर अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। आइसा उन मजदूरों की लड़ाई के साथ एकजुटता पेश करता है और मजदूरों के ख़िलाफ़ किए जा रहे फासीवादी पुलिसिया दमन की निंदा करता है। मनीष ने कहा कि आज देश के तमाम हिस्सों में महिलाओं से लेकर आदिवासी, छात्रों से लेकर मज़दूर– किसान अपनी हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन मोदी सरकार इस पर ध्यान देने के बजाय ट्रम्प की जनविरोधी नीतियों के सामने घुटने टेके हुए बैठी है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए आइसा उत्तर प्रदेश के सचिव कॉम. शशांक ने कहा कि जातिगत शोषण के ख़िलाफ़ हमारी यह लड़ाई लगातार जारी रहेगी। महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता को लेकर उन्होंने सभी संस्थानों में GSCASH को लागू करने की बात कही।

इस आयोजन में निखिल, भानु, सीमा, कुनाल, प्रदीप, साक्षी, अयाज़, किशन, विपुल, बंदना, अबुकैश, रवि, शोभित, आतिफ, हिमांशु सहित तमाम छात्र मौजूद रहे।

_द्वारा:_
_आइसा इलाहाबाद_

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, बी. पी. मंडल, ज्योतिबा फुले को याद करते हुए यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में हुआ समता अधिकार सम्मेलन!...
12/04/2026

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, बी. पी. मंडल, ज्योतिबा फुले को याद करते हुए यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में हुआ समता अधिकार सम्मेलन!

बहुजन समाज के बुद्धिजीवी, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता, युवा-छात्र जुटे!

ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी, संविधान बचाओ संघर्ष समिति द्वारा आयोजित सम्मेलन में यूजीसी रेगुलेशन के पक्ष में जातीय जनगणना कराने सहित सामाजिक न्याय के व्यापक एजेंडे पर संघर्ष को तेज करने की रणनीति बनी!

सम्मेलन में सामाजिक न्याय केंद्रित पत्रिका करेंट एजेंडा और बसावन इंडिया का विमोचन हुआ!

समानता, सामाजिक न्याय और संविधान बचाने के साथ विभिन्न सवालों को जोड़ते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

Address

82/38 Gurugovind Singh Marg, Lalkuan, Lucknow-
Lucknow
226016

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when AISA - All India Students' Association - Uttar Pradesh posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The University

Send a message to AISA - All India Students' Association - Uttar Pradesh:

Share