SGPGI RDA

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Even after 11 days, justice is not on the sceneFight continues
19/08/2024

Even after 11 days, justice is not on the scene
Fight continues

संजय राय ने नहीं सिस्टम ने किया है बलात्कार और नृशंस हत्या !***************************************************माता-पिता...
16/08/2024

संजय राय ने नहीं सिस्टम ने किया है बलात्कार और नृशंस हत्या !
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माता-पिता के लिए उनका बच्चा महज पुत्र या पुत्री ही नहीं होता, वह एक सपना होता है, जिसके लिए उन्होंने न जाने कितनी रातें जागकर बिताई होती हैं और न जाने कितना पसीना बहाया होता है। इस एक सपने में माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सैंकड़ों सपने देखते हैं और जब ऐसे जवान सपनों का नरसंहार होता है तो उनकी मनोस्थिति की कल्पना भी डराती है।

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में अपनी 31 वर्षीय ट्रेनी डॉक्टर पुत्री को लेकर भी उनके अभिभावक उस रात चैन की नींद सोते हुए संभवत: अनेक सुनहरे सपने देख रहे होंगे। अचानक उन्हें हॉस्पिटल से सूचना आती है कि उनकी पुत्री ने आत्महत्या कर ली है। वे नंगे पैर हॉस्पिटल दौड़ते हैं लेकिन अस्पताल प्रशासन रोने गिड़गिड़ाने के बावजूद तीन घंटे तक उन्हें पुत्री का शव नहीं दिखाता है और तीन घंटे बाद केवल पिता को शव देखने की अनुमति दी जाती है।
परिजनों के अनुसार शव पूर्ण नग्न अवस्था में था। निजी अंगों सहित शरीर के कई हिस्सों से खून बह रहा था तथा दोनों टांगे अलग-अलग दिशा में थी यानी कि शरीर को चीर दिया गया था।
दिल्ली में निर्भया बलात्कार कांड में जो कुछ हुआ था लगभग वैसी ही भयावह स्थिति इस शव की भी थी।

कहा जाता है कि इस अस्पताल के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉक्टर संदीप घोष बड़े राजनीतिक रसूख वाले व्यक्ति हैं (करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य और खरीद में मिलने वाले कमिशन को मिल बांटकर खाने से ऊपर तक मधुर संबंध बन ही जाते होंगे) और उन्होंने इस मामले को शुरू में कवरअप कर आत्महत्या का रंग देने का प्रयास किया। मामला इतना गंभीर था कि वे समझ गए होंगे कि अब कवरअप नहीं चलेगा। शुरू में अस्पताल प्रशासन ने इसे आत्महत्या बताया। प्रिंसिपल ने यहां तक कहा कि रात एक बजे सेमिनार रूम में जाने की जोखिम लेना लेडी डॉक्टर की मूर्खता थी। मृतका को मनोरोगी बताने का भी प्रयास किया गया।

इस मामले में छात्रों के भारी विरोध और हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ संदीप घोष ने इस्तीफा दिया लेकिन सरकार ने उन्हें कुछ ही घंटे में एक अन्य मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया। इस पर हाईकोर्ट ने दोबारा अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ घोष को लंबी छुट्टी पर जाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा-आप बहुत ताकतवर हैं, "आपके पद पर रहते निष्‍पक्ष जांच हो पाना मुश्क‍िल है।"
हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद इस निर्लज्ज डॉ घोष ने लंबी छुट्टी के नाम पर 15 दिन की छुट्टी का आवेदन करके इसकी प्रतिलिपि हाई कोर्ट में भेज दी।

इस घटना ने पूरे देश के हर संवेदनशील इंसान को अंदर तक हिला दिया है।यह बात अलग है कि इससे बेशर्म प्रिंसिपल डॉ संदीप घोष ,पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री तथा बहुत सारे नेता और छोटी-छोटी बातों पर सरकार से बड़े-बड़े सवाल पूछने वाले पत्रकारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। इस मामले में चुप्पी साधने वाले लोग अपनी विरोधी पार्टी विशेष के राज्य में बलात्कार की घटना पर गिद्ध की तरह कैमरे लेकर संवेदना प्रकट करने पहुंच जाते हैं।

अपनी तल्ख जुबान से सवाल पूछने वाली पत्रकार पार्टी ने इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल सरकार से कोई सवाल नहीं पूछे लेकिन आज एक आम जन के मन में सवाल उठते हैं :
बड़े शहरों की आवासीय सोसाइटी में औसत दर्जे की सिक्योरिटी एजेंसी भी सुरक्षा का इतना इंतजाम कर लेती हैं कि सामान्यतः सोसाइटी के अंदर घुसकर किसी की अपराध करने की हिम्मत नहीं होती। फिर आरजी कर मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा के नाम पर क्या मजाक हो रही थी ? (सिक्योरिटी के नाम पर अस्पताल किसी एजेंसी को करोड़ों रुपए का भुगतान जरूर कर रहा होगा।)

संजय राय का नाम का जो कथित अपराधी पकड़ा गया है वह सिविक कार्यकर्ता था लेकिन वह अस्पताल में रोगियों को भर्ती करवाने के लिए दलाली करता था और उसे पूरे अस्पताल में कहीं भी घुसकर कुछ भी करने की आजादी थी। एक बाहर के व्यक्ति को सिस्टम के भीतर तक घुसने और स्वच्छंद विचरण की अनुमति कैसे थी ?
जब शव को देखकर कोई अनपढ़ व्यक्ति भी यह कह सकता था कि यह हिंसक अपराध , बलात्कार और हत्या का मामला है, तब फिर अस्पताल के प्रशासन ने पीड़िता के परिवार को आत्महत्या की सूचना क्यों दी ?
अस्पताल में आने के बाद भी माता-पिता को तीन घंटे तक शव देखने की अनुमति क्यों नहीं दी गई ?
कुल मिलाकर यह मामला बताता है कि सिस्टम के लिए डॉक्टर की जान की कोई कीमत नहीं थी तथा सिस्टम ने इस जघन्य हत्या और बलात्कार को आत्महत्या का रूप देकर कवर अप करने की कोशिश की लेकिन मामला इतना गंभीर था कि इसे छुपाना उनके लिए संभव नहीं था।
कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी लेडी डॉक्टर का बलात्कार और हत्या किसी सिरफिरे संजय राय ने नहीं सिस्टम ने की है।
अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने से पीड़िता को मृत्युपरांत न्याय मिलने की संभावना पैदा हुई है लेकिन जांच का दायरा सिर्फ हत्यारे को पकड़ने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए वरन इस बात की भी तहकीकात होनी चाहिए कि इस मामले को कौन और क्यों करने की कोशिश कर रहा था ?
क्या अपनी आवाज उठाकर सरकार को कार्रवाई के लिए मजबूर करने के लिए आपका किसी ऐसी जाति से संबंधित होना जरूरी है जो संख्या और वोटों की दृष्टि से सरकार या राजनीतिक पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण हो?
कब तक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर घोष जैसे दलाली और घूसखोरी करने वाले लोग राजनीतिज्ञों की गोद में बैठकर न केवल जूनियर डॉक्टरों का वरन संपूर्ण समाज का शोषण करते रहेंगे ?
कब तक प्रतिदिन लाखों लोगों की जान बचाने वाले डॉक्टरों की खुद की जान खतरे में रहेगी ?

डॉ आकाश माथुर
गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट

In response, it has been collectively agreed that residents and fellows at SGPGIMS will continue the protest by suspendi...
14/08/2024

In response, it has been collectively agreed that residents and fellows at SGPGIMS will continue the protest by suspending elective outpatient clinics, academic activities and elective procedures/surgeries. However, patients in the non-essential service areas will be attended by the faculty members. All emergency services/surgeries, intensive care units and ward services will continue to operate.

Peaceful protest in front of PMSSY building13 AUG 2024 morning
13/08/2024

Peaceful protest in front of PMSSY building
13 AUG 2024 morning

The resident doctors of SGPGIMS staged a peaceful candlelight march in solidarity with Tilottama on 12th August, 2024 fr...
13/08/2024

The resident doctors of SGPGIMS staged a peaceful candlelight march in solidarity with Tilottama on 12th August, 2024 from 7-8 pm. The March took the route starting from the PMSSY building to Gate number 1, SGPGIMS and then to the academic building. Faculties from various departments also showed their solidarity and joined the march.

In line with the national call for support by FORDA and other Resident Doctors Forums across the country, the entire SGP...
13/08/2024

In line with the national call for support by FORDA and other Resident Doctors Forums across the country, the entire SGPGIMS family expresses solidarity with the doctors at RG Kar Medical College and Hospital. In response, it has been collectively agreed that residents and fellows at SGPGIMS will begin a protest by suspending elective outpatient clinics, academic activities and elective procedure/surgeries. However, patients in the non-essential service areas will be attended by the faculty members. All emergency services/surgeries, intensive care units and ward services will continue to operate. The demands are as follows: 1. A transparent inquiry and CBI probe into the entire incidence.
2. Swift action against all perpetrators.
3. Immediate implementation of Central Protection Act.
4. Ensuring workplace safety of doctors across the country.
Our plan of action for 13/08/2024 is a peaceful gathering at the PMSSY BLOCK at 09:30 AM.

बड़ा भया तो क्या भया, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर। 😪The sad state of affairs at JJ Hospital Mumbai...
05/06/2023

बड़ा भया तो क्या भया, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर। 😪

The sad state of affairs at JJ Hospital Mumbai is disheartening. Mistreatment of resident doctors is unacceptable. Juniors deserve a supportive environment to grow and excel in their profession.

Meaning: Kabir Das ji says that the date palm tree is undoubtedly very big, but neither does it give shade to anyone and the fruit also grows at a very high height. Similarly, if you are not able to do good to anyone, then there is no use in being so big personality.

यह बेपरवाह रवैया किसी और का नहीं बल्कि एमडी/एमएस कर चुके डॉक्टरों की समस्याओं के प्रति एक साथी चिकित्सक का है । वैसे तो ...
26/08/2022

यह बेपरवाह रवैया किसी और का नहीं बल्कि एमडी/एमएस कर चुके डॉक्टरों की समस्याओं के प्रति एक साथी चिकित्सक का है । वैसे तो चिकित्सा शिक्षा विभाग किसी भी कॉउंसलिंग को सही तरीके से ना करा पाने की अपनी परंपरा के चलते विरोध सहने का आदी हो चुका है किंतु फिर भी बड़े बाबूओं को प्रसन्न करने के अपने प्रयास में प्रायः साथी डॉक्टरों को अपमानित करने से भी ना चूकने वाले डॉक्टरों को भी आत्मावलोकन जरूर करना चाहिए की मुसीबत की घड़ी में उनके साथ बड़े बाबू खड़े नज़र आएँगे या चिकित्सा समुदाय के उनसे जूनियर व सीनियर साथी ?

पूरा मामला यहाँ देखा जा सकता है 👇
https://www.youtube.com/watch?v=rayVJ_wRnR8

The National Institutional Ranking Framework (NIRF) is a methodology adopted by the Ministry of Human Resource Developme...
18/07/2022

The National Institutional Ranking Framework (NIRF) is a methodology adopted by the Ministry of Human Resource Development (MHRD), GoI to rank all institutions of higher education in India. Medical institutions need to have a healthy competition with each other and should simultaneously work on multiple aspects to improve their ranking. This article offers a few constructive suggestions. 😎

30/03/2022

कौन डॉक्टर यह सब देखने के बाद निश्चल भाव से मरीजों की सेवा कर सकता है या मुश्किल केस हाथ में लेने का साहस दिखा सकता है । डॉ. अर्चना को न्याय ना मिला तो डॉक्टर्स में अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा बनाए रख पाना मुश्किल होगा । 🥺

सिर्फ सुपरस्पेशलिस्ट नियुक्त कर खानापूर्ति करने से जनता को फायदा पहुंचना मुश्किल है, उम्मीद है कि जहाँ जहाँ सुपरस्पेशलिस...
12/11/2021

सिर्फ सुपरस्पेशलिस्ट नियुक्त कर खानापूर्ति करने से जनता को फायदा पहुंचना मुश्किल है, उम्मीद है कि जहाँ जहाँ सुपरस्पेशलिस्ट चिकित्सक भेजे जा रहे हैं वहाँ उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप आधारभूत संरचना भी उपलब्ध होगी । ताकि उनकी सेवाओं का अधिकाधिक लाभ आमजन को मिल सके । ✌️😊

यह अचंभित करने वाला तथ्य है कि क्यों लोहिया एवं केजीएयू जैसे संस्थानों में अभी तक विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं थे । पीजीआई द्व...
12/11/2021

यह अचंभित करने वाला तथ्य है कि क्यों लोहिया एवं केजीएयू जैसे संस्थानों में अभी तक विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं थे । पीजीआई द्वारा नीति निर्धारण में की गई चूक का खामियाजा यहाँ तो मरीज़ों को भुगतना पड़ेगा लेकिन अन्य संस्थानों को और वहाँ आने वाले मरीजों को इसका लाभ ज़रूर मिलेगा । जहाँ एक ओर पीजीआई में दिखाने के लिए मरीज़ों को कई दिन/महीने इंतज़ार करना पड़ता है वहीं दूसरी ओर पीजीआई में कई सालों से लगभग हर विभाग में आधे पद खाली पड़े हैं तथा संस्थान इनपर भर्ती निकालने में अभी तक सफल नहीं हुआ है, बॉण्ड के अंतर्गत डीएम/एमसीएच छात्रों के जाने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्ती और मुश्किल हो जाएगी । बहरहाल, अच्छी बात यह है कि युवा जोश से लबरेज़ पीजीआई से जाने वाले युवा चिकित्सक इन् संस्थानों को भी नई बुलंदियों पर ले जाएँगे जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़े अस्पतालों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा पैदा होगी । स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आने वाले वक्त में स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी की दृष्टि से निश्चित ही अत्यंत महत्वपूर्ण है । 👍😊

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