Dr Shakuntala Misra National Rehabilitation University, Lucknow

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Dr Shakuntala Misra National Rehabilitation University, Lucknow DSMNRU, established by Government of Uttar Pradesh in the year 2008, is a highly innovative that pro
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20-5-2026 विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित ख़बरें
20/05/2026

20-5-2026 विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित ख़बरें

20/05/2026

Shakuntala University: स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शुरू हुई प्रवेश प्रक्रिया… 1077 सीटों पर 20 मई से आवेदन

Shakuntala University: लेखक के बजाय लैपटॉप से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने दी परीक्षा…आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
20/05/2026

Shakuntala University: लेखक के बजाय लैपटॉप से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने दी परीक्षा…आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

डॉ० शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय(Dr Shakuntala Mishra National Rehabilitation University) की ओर से दिव्यांगजनोन्मुख समावेशी ए....

शकुन्तला विवि में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू, 1077 सीटों पर 20 मई से आवेदनलखनऊ।डॉ. शकुन्तला मिश्र...
19/05/2026

शकुन्तला विवि में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू, 1077 सीटों पर 20 मई से आवेदन

लखनऊ।
डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। कुलसचिव रोहित सिंह ने बताया कि अभ्यर्थी 20 मई से 20 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। प्रवेश सीयूईटी और नॉन-सीयूईटी दोनों माध्यमों से निर्धारित पाठ्यक्रमों में होगा।

प्रवेश निदेशक प्रो. अनामिका चौधरी की ओर से जारी सूचना के अनुसार विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों में संचालित एमए, एमएससी, एमकॉम, एमबीए, एमसीए, एलएलएम, एमएसडब्ल्यू, एमएड, बीएड विशेष शिक्षा, एमटेक सहित अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। वहीं एमपीओ और पीजीडीवीटी जैसे कुछ पाठ्यक्रमों में प्रवेश नॉन-सीयूईटी माध्यम से होगा।

प्रवेश निदेशक प्रो. अनामिका चौधरी ने बताया कि विश्वविद्यालय में कुल 1077 सीटों पर प्रवेश होगा। सबसे अधिक 132 सीटें एमबीए में उपलब्ध हैं। एमए (अर्थशास्त्र, शिक्षा, अंग्रेजी, हिंदी, इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र), एमएससी (रसायन विज्ञान, आईटी, माइक्रोबायोलॉजी, भौतिकी, सांख्यिकी), एमकॉम, एमएसडब्ल्यू, एमसीए समेत कई पाठ्यक्रमों में 44-44 सीटें निर्धारित की गई हैं। एलएलएम और एमटेक (AIDS व AIML) में 22-22 सीटें उपलब्ध हैं। वहीं बीएड विशेष शिक्षा (श्रवण बाधित, बौद्धिक दिव्यांगता और दृष्टिबाधित) में 33-33 सीटें निर्धारित हैं। एमएड विशेष शिक्षा के विभिन्न कार्यक्रमों में 16 से 22 सीटें तथा ललित कला के पाठ्यक्रमों में 8 से 20 सीटें उपलब्ध हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क 100 रुपये, जबकि अन्य अभ्यर्थियों के लिए 200 रुपये निर्धारित किया गया है। इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर प्रवेश विवरणिका देखकर आवेदन कर सकते हैं।

प्रवेश संबंधी सहायता के लिए विश्वविद्यालय के हेल्पलाइन नंबर 8887222060 और ई-मेल [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है।

कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा,
“डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुगम और तकनीक आधारित बनाया गया है ताकि दिव्यांग सहित सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके। विद्यार्थियों से अपेक्षा है कि वे समयबद्ध तरीके से आवेदन कर अपने भविष्य की दिशा तय करें।”
- आचार्य संजय सिंह, कुलपति

द्वारा :
विवि प्रवक्ता प्रो. यशवंत वीरोदय

19-5-2026 विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित ख़बरें
19/05/2026

19-5-2026 विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित ख़बरें

शकुंतला विवि में स्क्राइब के बजाय लैपटॉप से परीक्षा दे रहे दृष्टिबाधित विद्यार्थी, -डीएसएमएनआरयू की पहल बनी आत्मनिर्भरता...
18/05/2026

शकुंतला विवि में स्क्राइब के बजाय लैपटॉप से परीक्षा दे रहे दृष्टिबाधित विद्यार्थी,

-डीएसएमएनआरयू की पहल बनी आत्मनिर्भरता का उदाहरण

लखनऊ, 18 मई 2026
डॉ० शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की ओर से दिव्यांगजनोन्मुख समावेशी एवं तकनीक-सक्षम शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं अभिनव पहल की जा रही है। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को स्क्राइब (लेखक) के स्थान पर लैपटॉप के माध्यम से सेमेस्टर परीक्षाएँ देने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जो कि न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि सम्पूर्ण देश में एक अभिनव प्रयोग है। विश्वविद्यालय की यह पहल दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी कार्यकुशलता विकसित करने तथा उन्हें भविष्य के रोजगारोन्मुख वातावरण के लिए तैयार करने की दिशा में एक प्रभावी कदम के रूप में देखी जा रही है।
विश्वविद्यालय में आयोजित मई 2026 की सेमेस्टर परीक्षाओं में 12 दृष्टिबाधित विद्यार्थियों द्वारा लैपटॉप का उपयोग करते हुए परीक्षा दी जा रही है, जबकि जनवरी 2026 की पिछली सेमेस्टर परीक्षाओं में केवल 2 दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने इस सुविधा का उपयोग किया था। कुछ ही महीनों में विद्यार्थियों की संख्या में हुई 6 गुना उल्लेखनीय वृद्धि यह दर्शाती है कि विद्यार्थी अब पारंपरिक स्क्राइब व्यवस्था के स्थान पर तकनीकी माध्यमों को अधिक सुविधाजनक, आत्मविश्वासपूर्ण एवं स्वतंत्र विकल्प के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
यह अभिनव व्यवस्था विश्वविद्यालय प्रशासन के सतत प्रयासों एवं Help The Blind Foundation के सहयोग से संभव हो सकी है, जिसके साथ विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित किया गया था। इस सहयोग के अंतर्गत विद्यार्थियों को लैपटॉप आधारित परीक्षा प्रणाली, तकनीकी सहायता, आवश्यक सॉफ्टवेयर, स्क्रीन रीडर सुविधा तथा परीक्षा के दौरान तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे दृष्टिबाधित विद्यार्थी बिना किसी बाहरी निर्भरता के अपनी परीक्षाएँ सुगमता एवं आत्मविश्वास के साथ संपन्न कर सकें।

कुलपति आचार्य संजय सिंह ने परीक्षा कक्ष का निरीक्षण करते हुए लैपटॉप के माध्यम से परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों से सीधे संवाद स्थापित किया तथा उनसे परीक्षा के दौरान आने वाली कठिनाइयों, तकनीकी अनुभवों एवं व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी पूछा कि क्या उन्हें उत्तर लिखने, प्रश्नपत्र पढ़ने, स्क्रीन रीडर उपयोग करने अथवा समय प्रबंधन में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों ने कुलपति को बताया कि लैपटॉप आधारित परीक्षा प्रणाली के माध्यम से वे अधिक सहजता, स्वतंत्रता एवं आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे पा रहे हैं।

कुलपति आचार्य संजय सिंह ने इस अवसर पर कहा कि विश्वविद्यालय सदैव समावेशी शिक्षा, दिव्यांगजन सशक्तीकरण एवं तकनीक आधारित अधिगम को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. विजय शंकर शर्मा द्वारा प्रारंभ की गई यह अभिनव पहल केवल परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर एवं आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में एक सामाजिक एवं शैक्षिक परिवर्तन का माध्यम है।
कुलपति ने Help The Blind Foundation के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय एवं सामाजिक संगठनों के समन्वित प्रयासों से दिव्यांगजन शिक्षा को नई दिशा प्रदान की जा सकती है।
डॉ० विजय शंकर शर्मा ने बताया कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को स्क्राइब पर निर्भर रहने के स्थान पर तकनीकी माध्यमों से परीक्षा देने का अवसर प्रदान करना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक चरण में कुछ विद्यार्थियों द्वारा इस व्यवस्था को अपनाया गया था, परंतु अब इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अधिक विद्यार्थी इससे जुड़ने के लिए उत्साहित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लैपटॉप आधारित परीक्षा प्रणाली विद्यार्थियों की कार्यक्षमता, उत्तर लेखन की गति, समय प्रबंधन एवं आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि कर रही है।
लैपटॉप के माध्यम से परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों ने भी इस पहल के प्रति प्रसन्नता एवं संतोष व्यक्त किया। विद्यार्थियों ने बताया कि स्क्राइब व्यवस्था में कई बार उत्तरों को समझाने एवं लिखवाने में समय अधिक लगता था तथा अपनी अभिव्यक्ति को पूर्ण रूप से प्रस्तुत करने में कठिनाई होती थी। वहीं लैपटॉप के माध्यम से परीक्षा देने पर वे अपने विचारों को अधिक स्पष्टता एवं स्वतंत्रता के साथ प्रस्तुत कर पा रहे हैं। विद्यार्थियों ने कहा कि यह व्यवस्था उन्हें भविष्य में रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं एवं व्यावसायिक जीवन के लिए भी मानसिक एवं तकनीकी रूप से तैयार कर रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस अभिनव पहल से प्रेरित होकर अनेक अन्य दृष्टिबाधित विद्यार्थी भी दिसंबर 2026 में आयोजित होने वाली आगामी सेमेस्टर परीक्षाओं में लैपटॉप के माध्यम से परीक्षा देने के इच्छुक हैं। विश्वविद्यालय द्वारा आने वाले समय में इस सुविधा को और अधिक व्यवस्थित एवं व्यापक रूप से लागू करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक दृष्टिबाधित विद्यार्थी इसका लाभ प्राप्त कर सकें।
परीक्षाओं के निरीक्षण के दौरान विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक श्री राजेश कुमार मिश्रा भी उपस्थित रहे। उन्होंने परीक्षा व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई गई यह तकनीक-सक्षम परीक्षा प्रणाली दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक पहल है, जो भविष्य में समावेशी एवं आत्मनिर्भर शिक्षा व्यवस्था के मॉडल के रूप में स्थापित हो सकती है।

कुलपति का कोट
स्क्राइब व्यवस्था में विद्यार्थियों को कई बार दूसरे व्यक्ति पर निर्भर रहना पड़ता है, जबकि लैपटॉप आधारित परीक्षा प्रणाली उन्हें स्वतंत्र रूप से सोचने, उत्तर प्रस्तुत करने तथा अपनी क्षमता का बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करती है।
वर्तमान समय में अधिकांश रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएँ एवं कार्यालयीन कार्य तकनीक आधारित हो चुके हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय स्तर से ही डिजिटल एवं तकनीकी माध्यमों के उपयोग के लिए तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। यह पहल विद्यार्थियों में डिजिटल दक्षता, समय प्रबंधन, आत्मविश्वास तथा स्वतंत्र कार्य संस्कृति को विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।
-कुलपति आचार्य संजय सिंह

द्वारा: विवि प्रवक्ता प्रो यशवंत वीरोदय

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