02/01/2023
#परिचय_दिलसे
मैं संदीप श्योराण, एक खूबसूरत से विश्व प्रसिद्ध शहर हिसार में रहता हूँ।
पढ़ाई लिखाई की बात कहूं तो थोड़ा थोड़ा अक्षर ज्ञान सभी का है, आर्ट्स में पोस्ट ग्रेजुएट हूँ, वेटरनरी में डिप्लोमा,और करीब आधा दर्जन दूसरे डिप्लोमा अलग अलग सब्जेक्ट्स में।
छोटा सा सरकारी आदमी हूँ । बेजुबान पशुओं की सेवा करता हूं। उनका इलाज करता हूं ।रोज रोज सरकारी फाइल्स पर उलूल जुलूल लिखते हुए आत्मज्ञान होता है कि हम क्या साले धोबी के गधे हैं जो हर रोज सुबह 9 बजे से 5 बजे तक घाट पर खटते रहें और जब साठ साल के हों तो ना घर के रहें ना घाट के।
बस तो फिर मन करता है कि जब भगवान ने इंसान की जून में पैदा किया था तो हम ही क्यों गधे बने रहें, बस भाग चलो तो घूमने फिरने निकल पड़ते हैं। तीन ही शौक है जो मुझे एहसास दिलाते हैं कि मैं कोई रोबोट नहीं हूं ,वह शौक है किताबें पढ़ना, घूमना और स्वादिष्ट भोजन करना।
शायद मैं जितना बाहर घूमता हूँ, उतना ही भीतर उतर जाता हूँ, हर यात्रा के बाद जिंदगी पहले से ज्यादा खुशनुमा लगती है, पुरसुकून लगती है।
घूमना मेरे लिए वैसे ही जरूरी है जैसे मोबाइल को एक समय बाद चार्ज करना, नहीं किया तो बैटरी ऑफ, फोन बंद।
अब तक राजस्थान,पंजाब , उत्तरप्रदेश वगैरह देखे हैं और सबसे ज्यादा बार जिस राज्य को देखा ,वो है हरियाणा, इसीलिये नहीं कि हरियाणा सबसे सुंदर पर्यटन स्थल है, इसीलिये कि वो मेरा घर है।
नार्थ ईस्ट जाने का बड़ा मन है, मुंसियारी भी जाना है,एक बार हिसार से अपनी कार से दक्षिण का चक्कर लगाने का भी मन है, आगे हरि इच्छा।
इतनी खूबसूरत दुनिया है, इतने प्यारे लोग, अगर मैं घूमता नहीं तो कितनी ही चीजें जानने से वंचित रह जाता, कितने ही जिंदादिल लोगों से मिलने से रह जाता।
कहते हैं सिकन्दर ने कहा था कि जब मैं दुनिया से जाऊं तो संसार को मेरे दोनों खाली हाथ दिखाना कि विश्व विजेता सिकन्दर भी जब दुनिया से विदा हुआ तो कुछ लेकर नहीं जा सका। मैं कहता हूं कि गलत था वो, उसे खाली हाथ इसीलिये जाना पड़ा क्योंकि उसने दुनिया को तलवार से जीतने की कोशिश की, अगर वो एक घुमक्कड़ की तरह दुनिया में घुमा होता तो दुनिया भर का प्यार साथ ले जाता , मुझे पता है कि जब मैं दुनिया से जाऊंगा तो मेरी हथेलियां खाली नहीं होंगी उनमें आप सब घुमक्कड़ों की मोहब्बत भरी होगी,
❤️❤️❤️