14/02/2019
भारत मर्माहत है।
हम रिक्लाइनेर पर चाय का प्याला थामे टेलीविजन देखकर पाकिस्तान और कश्मीरी अलगाववादियों को गाली देंगे फेसबुक पर कमेंट डालेंगे,अपने दल और नेताओं की मृत जवानों को दी गयी श्रद्धाजंलि पोस्ट करेंगे,और सुबह अपने काम पर निकल लेंगें, और फिर किसी ऐसी घटना का इंतज़ार करेंग ताकि फिर ये दुहरा सकें।
ये घटना शहादत नही है अपितु दो देशों की राजैतिक सत्ता एवं महत्वकांक्षा हेतु सुनियोजित हत्याकांड है।
ये वो युद्ध है जिसे हम लड़ना ही नही चाहते हैं।
ये वो हवन कुंड है जिसमे आहुतियों की संख्या निर्धारित नही है।
निःशब्दता के अतिरिक्त दुख प्रकट करने का अन्य साधन नहीं है।
40 जवान मौते!!!
भाँडो की तरह अलग अलग आंकड़े प्रस्तुत करते मीडिया चैनल्स,बेशर्मो,निर्लज़्ज़ो,और मूर्खो की तरह बहस करते राजनेता।
घिन आती है,स्वयं पर,और मौके को भुनाते,मीडिया,नेता,उनके समर्थकों और ऐसे देश का निवासी होने पर जहां कुछ भी झकझोरता नही,उद्वेलित नही करता,ऐसा प्रेरित नही करता की पूरा देश सड़कों पर उतर आए।
आइये फिर एक बार मोमबत्तियां जलाएँ, शोक एवं श्रद्धांजलि सन्देश पोस्ट करें फिर सो जाएं।