22/02/2020
नागपुर विश्वविद्यालय में चयन --------------------------------------समिति के कार्यवाही के पहले ही -----------------------------------अध्यापकों के पद ग्रहण को ------------------------------मान्यता ?
सूचना अधिकार कानून द्वारा प्राप्त, नागपुर विश्वविद्यालय से संलग्न एचबीटी कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, न्यू सुभेदार लेआउट, नागपुर में कार्यरत तीन अध्यापकों की अनियमित नियुक्ति के संदर्भ में वर्ष २०१८ में महाराष्ट्र के तत्कालीन महामहिम राज्यपाल श्री विद्यासागर राव, नागपुर विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ काणे, महाराष्ट्र राज्य के उच्च शिक्षा संचालक श्री माने तथा नागपुर विभाग के तत्कालीन उच्च शिक्षा सह-संचालक (वेतन) श्रीमती अर्चना नेरकर इन सबको नागपुर में सरकार के बरसाती सत्र के दौरान भिन्न-भिन्न समय पर शिकायत की गई थी। (शिकायत विस्तार से नीचे दी गई है ) सह संचालक श्रीमती नेरकर ने प्रस्तुत शिकायत नागपुर विश्वविद्यालय के अनुशासन समिति के पास भेज दी। महामहिम राज्यपाल कार्यालय ने भी प्रस्तुत शिकायत पर नागपुर विश्वविद्यालय को जांच करने एवं रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। जिस पर नागपुर विश्वविद्यालय में डॉ कोमावर की अध्यक्षता में जांच समिति नियुक्ति की गई। समिति ने जांच के दौरान शिकायतकर्ता श्री प्रकाश वाघमारे को भी साक्ष्य के लिए बुलाया गया। श्री प्रकाश वाघमारे ने सूचना अधिकार कानून के तहत प्राप्त सभी दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जिनमें सभी तीनों अध्यापकों की नियुक्ति सारे नियमों को ताक पर रखकर की गई थी। अतः जांच समिति के डॉ कोमावार ने शीघ्रता से जांच करके रिपोर्ट तैयार कर उसकी एक प्रतिलिपि शिकायतकर्ता को भेजने का आश्वासन दिया। लेकिन जांच समिति ने जांच कार्य आरंभ करने के 1 वर्ष के उपरांत अभी तक रिपोर्ट तैयार नहीं की ऐसी जानकारी है। यहां विशेष कर बताना होगा कि उपरोक्त तीन अध्यापकों में से एक शिक्षक जिनका नाम डॉ अब्दुल शकील अब्दुल सत्तार है जिन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए इस जांच को और भविष्य में होने वाली कार्रवाई को दबाने का भरसक प्रयास किया है। यह जांच निष्पक्ष रुप से हो और यह जांच कार्रवाई के अंजाम तक पहुंचनी चाहिए एवं नियुक्ति में जानबूझकर अनियमितता करने वाले, कागजों में हेराफेरी करने वाले नागपुर विश्वविद्यालय के कर्मचारी एवं मुख्य रूप से इन तीनों अध्यापकों को जिन्होंने भ्रष्ट मार्ग से नौकरी प्राप्त कर शासन को ठगकर आजतक वेतन के रूप में करोडों रुपये ऐंठे है पर कठोर कार्यवाही करते हुए उन्हें सेवा कार्य से तत्काल बर्खास्त करें और अबतक का वेतन वसूल किया जाए। उन्हें भी जवाब तलब करे जो इस मामले को दबाने में सहायक बने है!.. इस मामले की रोचक एवं विस्तृत जानकारी कल की पोस्ट में पढ़िए..!