24/07/2022
जिन बच्चों को 90+ अंक आते हैं, उनके माता- पिता फेसबुक पर उनकी चर्चा करते हैं। उन्हें नंबर उपलब्धि नजर आता है।किसी परीक्षा में संयोगवश कम नंबर आ गये तो ये बच्चे मन ही मन उदास होंगे और डिप्रेशन में जायेंगे।आज 45+ से लेकर 80-85+ तक कोई पूछता नहीं। माता - पिता मन ही मन कुढ़ते रहते हैं कि उनके बच्चे को 90+ क्यों नहीं आया? उन करोड़ों बच्चों को कैसा लगता होगा? क्या उनकी क्षमता प्रतिभा कुंठित नहीं होती होगी? जब मैं मैट्रिक कक्षा में था तो प्रथम श्रेणी आना भी बड़ी बात थी,अब वैसे नंबर वाले को कोई पूछता नहीं। सत्ता के नंबर गेम को समझें।
भारतीय शिक्षण पद्धति में जो कुछ अच्छा था, पश्चिमी उतरन के चक्कर में उसे बर्बाद कर दिया गया। नंबर इस तरह से आने का मतलब क्या है?
1. शिक्षकों पर दबाव बनाया जा रहा है कि नंबर ज्यादा से ज्यादा दें। निजी स्कूलों को नंबर से जनता को लुभाना है और बहुत शिक्षण संस्थानों को नंबर आधारित अनुदान मिलता है, इसलिए नंबरों की बाढ़ आ गई है।
2. आत्मनिष्ठ प्रश्न खत्म किये जा रहे हैं।उसकी जगह वस्तुनिष्ठ प्रश्न ले रहे हैं। मैट्रिक, इंटर, स्नातक की परीक्षाओं में वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का दबदबा है। नेट तक की परीक्षा भी वस्तुनिष्ठ है। छात्र लिखना भूल रहे हैं।वह सामान्य अभिव्यक्ति भी नहीं कर पाते, जबकि नंबर बहुत है।
3. जिस प्रदेश में सरकार को रिकॉर्ड बनाना होता है इसलिए शिक्षकों पर दबाव बनाया जाता कि इतने ही दिन में उत्तरपुस्तिकाएं जांच देनी है। ऊपर से निर्देश कि सीबीएसई की बराबरी करनी है, इसलिए नंबर भी धुन कर देना है।
सचमुच में क्या देश के चिंतक मर गये हैं? क्या वे शिक्षा व्यवस्था को इसी तरह मर जाने देंगे? क्या देश की शिक्षण पद्धति पश्चिमी उतरन मात्र रह जायेगी?
सीबीएसई दसवीं बोर्ड के रिजल्ट आज जारी हो गए
100 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत नम्बर की सुनामी आई हुई है।
सभी प्रतिभागियों व उनके माता पिता को बधाइयां.... लेकिन बेहद ज्यादा उत्साहित न होकर अब अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के प्रति और दृढ़ रहने की जरूरत है।
इतने हाई परसेंटेज रिजल्ट केवल और केवल इसका कारण CBSE की गाइडलाइंस व मूल्यांकन पॉलिसी है
विशेषकर भाषा मे 100 प्रतिशत नम्बर आने का कारण एक तो बहुत ही आसान सिलेबस है
जिसमे ग्रामर का पोर्शन बहुत ही कम फिक्स लेसन है
फिक्स क्वेश्चन और सबसे बड़ी बात एक्जामिनर का कॉपी चेक करते समय