13/11/2018
भारत में लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था है. भारत का लोकतंत्र बहुत हद तक सफल भी है लेकिन इसे अंतिमजन के अपेक्षाओं पर भी खरा उतरना होगा. देश के शोषित-वंचित जातियों विशेषकर आदिवासी समाज को सरकारी तंत्र से कुछ मिला है तो वह है विस्थापन या इसके विरोध करने पर गोली. शोषित-वंचित जातियों के सरकारी तंत्र में हिस्सेदारी-भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए संविधान में आरक्षण का प्रावधान है, जिससे देश चलता है, लेकिन आज सरे आम उसी संविधान को जलाया जा रहा है. सरकार निरंकुश होती जा रही हैं. इन परिस्थितियों में लोकतंत्र के इतिहास और मतदाता के जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाल रहें हैं – सुरेश प्रसाद, पीएचडी स्कॉलर, जेएनयू। उनके मूल लेख में “अवर्ण मतदाता” शब्द का प्रयोग किया गया था, लेकिन द नेशनल प्रेस ने इसके जगह “भारतीय मूल के जातियों/ जाति का मतदाता” शब्द का प्रयोग किया है. . सुरेश प्रसाद के लेख पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें. – संपादक
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भारत में लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था है. भारत का लोकतंत्र बहुत हद तक सफल भी है लेकिन इसे अंतिमजन के अपेक्षाओं पर भी ....