Sahi target

Sahi target मेरा उद्देश्य लोगों को प्रेरित करना है और उन्हें उनके सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना है

लो जल गया रावण, अब देश की महिलाये सुरक्षित है..??
14/10/2024

लो जल गया रावण, अब देश की महिलाये सुरक्षित है..??

07/02/2024
श्रद्धा होना तब भी आसान है...पर मुश्किल है "दादी"की तरह सपने संजोना कि एक दिन "मनोज"वर्दी "पहन के ही आवेगा"।     "प्रीतम...
09/01/2024

श्रद्धा होना तब भी आसान है...
पर मुश्किल है "दादी"की तरह सपने संजोना कि एक दिन "मनोज"वर्दी "पहन के ही आवेगा"।
"प्रीतम पांडेय"सा दोस्त जो बिन जाने ही एक अनजान को
अपने साथ रख लेगा।
कहा मिलेगा "गौरी भईया"जैसा जो हर विफलता पर आपको हौसला दे कर"री स्टार्ट"बोलेगा।मनोज की सफलता में ही वह खुद को सफल मान लेगा।
नहीं मिलते अब "दुष्यंत"जैसे प्रेरणा स्रोत की सोया आत्मबल जगा दे।
"कमलेश" सा भाई और कर्तव्यनिष्ठ,ईमानदार पिता हर "गरीब" के नसीब में कहाँ होता है?

श्रद्धा होना तब भी आसान है.... पर "मनोज"की सफलता में इन सब के भी सपने थे... ❤️🌻
अब तक की सबसे बेहतरीन मोटिवेशनल फिल्म "12th फेल" बनाने के लिए विधु विनोद चोपड़ा जी को साधुवाद।।

दान देने से पहले अपने आसपास पड़ोस मोहल्ले में ध्यान दें किसी किसी गरीब की सहायता जरूर करें
04/07/2023

दान देने से पहले अपने आसपास पड़ोस मोहल्ले में ध्यान दें किसी किसी गरीब की सहायता जरूर करें

 #हालात  -ए-संदेश 😴अगर आप कोई मैकेनिक electrician हैं या किसी कारखाने के मालिक हैं या किसी भी काम के आप माहिर हैं।कोई गर...
21/05/2023

#हालात -ए-संदेश 😴अगर आप कोई मैकेनिक electrician हैं या किसी कारखाने के मालिक हैं या किसी भी काम के आप माहिर हैं।कोई गरीब अनाथ बेसहरा लाचार का बच्चा आप के यहाँ कोई हुनर सीखने आता है,तो उसे हुनर सिखाने मे कंजूसी ना करें।हम देखते है कि दर्जी 6-6 महीने तक बटन ही लगवाता रहता है lबाईक मिस्त्री 6-6 महीने पहिए ही खुलवाता पंचर ही बनवाता है कुछ लोग तो इस नियत से भी काम नहीं सिखाते हैं कि काम सीख लेगा तो फिर नया मुर्गा कहाँ से आएगा lये गरीब के बच्चे है साहब माँ बाप बडी उम्मीद से रोटी देकर भेजते है कि मेरा बच्चा जल्द काम सीखकर कुछ कमाकर घर के खर्चे में मदद करेगा lमेहरबानी करके ऐसे बच्चो को जल्द हुनर सिखाकर कामयाब बनाए यकीन माने आपको उसका बेहतरीन इनाम देगा !Ashwani kumar by Sahi target

मैं भी ईश्वर को मानता हूं जो सुप्रीम परमात्मा जिसने इस सृष्टि की रचना की जिसका हर जीव जंतु व कड़ कड़ से बिना भेद के नाता...
19/05/2023

मैं भी ईश्वर को मानता हूं जो सुप्रीम परमात्मा जिसने इस सृष्टि की रचना की जिसका हर जीव जंतु व कड़ कड़ से बिना भेद के नाता है जिसका कोई बिचौलिया (पंडित पादरी मौलाना) नहीं ,, मेरे तर्क के अनुसार इस धरती पर कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ जो उस सुप्रीम परमात्मा को खुश करने या पूजा करने का एक निश्चित विधान जानता अतः ऐसा कोई यंत्र तंत्र मंत्र है ही नहीं जो परमात्मा से मिला सकता है हम सब व्यर्थ में अपना समय और धन बर्बाद करते हैं हां अच्छे कर्म और अच्छी सोच रखना ही ईश्वर की पूजा है जय भीम 🙏🏻🙏🏻 Ashwani Kumar by Sahi target

*गुरुजी ने कहा कि मां के पल्लू पर निबन्ध लिखो..* *तो लिखने वाले छात्र ने क्या खूब लिखा.....*     *"पूरा पढ़ियेगा आपके दिल...
15/05/2023

*गुरुजी ने कहा कि मां के पल्लू पर निबन्ध लिखो..*

*तो लिखने वाले छात्र ने क्या खूब लिखा.....*

*"पूरा पढ़ियेगा आपके दिल को छू जाएगा"* 🥰

आदरणीय गुरुजी जी...
माँ के पल्लू का सिद्धाँत माँ को गरिमामयी
छवि प्रदान करने के लिए था.

इसके साथ ही ... यह गरम बर्तन को
चूल्हा से हटाते समय गरम बर्तन को
पकड़ने के काम भी आता था.

पल्लू की बात ही निराली थी.
पल्लू पर तो बहुत कुछ
लिखा जा सकता है.

पल्लू ... बच्चों का पसीना, आँसू पोंछने,
गंदे कान, मुँह की सफाई के लिए भी
इस्तेमाल किया जाता था.

माँ इसको अपना हाथ पोंछने के लिए
तौलिया के रूप में भी
इस्तेमाल कर लेती थी.

खाना खाने के बाद
पल्लू से मुँह साफ करने का
अपना ही आनंद होता था.

कभी आँख में दर्द होने पर ...
माँ अपने पल्लू को गोल बनाकर,
फूँक मारकर, गरम करके
आँख में लगा देतीं थी,
दर्द उसी समय गायब हो जाता था.

माँ की गोद में सोने वाले बच्चों के लिए
उसकी गोद गद्दा और उसका पल्लू
चादर का काम करता था.

जब भी कोई अंजान घर पर आता,
तो बच्चा उसको
माँ के पल्लू की ओट ले कर देखता था.

जब भी बच्चे को किसी बात पर
शर्म आती, वो पल्लू से अपना
मुँह ढक कर छुप जाता था.

जब बच्चों को बाहर जाना होता,
तब 'माँ का पल्लू'
एक मार्गदर्शक का काम करता था.

जब तक बच्चे ने हाथ में पल्लू
थाम रखा होता, तो सारी कायनात
उसकी मुट्ठी में होती थी.

जब मौसम ठंडा होता था ...
माँ उसको अपने चारों ओर लपेट कर
ठंड से बचाने की कोशिश करती.
और, जब बारिश होती तो,
माँ अपने पल्लू में ढाँक लेती.

पल्लू --> एप्रन का काम भी करता था.
माँ इसको हाथ तौलिया के रूप में भी
इस्तेमाल कर लेती थी.

पल्लू का उपयोग पेड़ों से गिरने वाले
मीठे जामुन और सुगंधित फूलों को
लाने के लिए किया जाता था.

पल्लू में धान, दान, प्रसाद भी
संकलित किया जाता था.

पल्लू घर में रखे समान से
धूल हटाने में भी बहुत सहायक होता था.

कभी कोई वस्तु खो जाए, तो
एकदम से पल्लू में गांठ लगाकर
निश्चिंत हो जाना , कि
जल्द मिल जाएगी.

पल्लू में गाँठ लगा कर माँ
एक चलता फिरता बैंक या
तिजोरी रखती थी, और अगर
सब कुछ ठीक रहा, तो कभी-कभी
उस बैंक से कुछ पैसे भी मिल जाते थे.

*मुझे नहीं लगता, कि विज्ञान पल्लू का विकल्प ढूँढ पाया है !*

*मां का पल्लू कुछ और नहीं, बल्कि एक जादुई एहसास है !*

स्नेह और संबंध रखने वाले अपनी माँ के इस प्यार और स्नेह को हमेशा महसूस करते हैं, जो कि आज की पीढ़ियों की समझ में आता है कि नहीं........

*अब जीन्स पहनने वाली माएं, पल्लू कहाँ से लाएंगी*
*पता नहीं......!!

Dedicated to all mothers🙏
सादर साभार 🙏
Ashwani Kumar by Sahi target

भगवान बुद्ध का सत्य, अहिंसा व शांति का संदेश सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए एक अमूल्य धरोहर है।उनकी शिक्षाएं व जीवन...
05/05/2023

भगवान बुद्ध का सत्य, अहिंसा व शांति का संदेश सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए एक अमूल्य धरोहर है।
उनकी शिक्षाएं व जीवन दर्शन चिरकाल तक हमें प्रेरित करता रहेगा।

अप्प दीपो भव!

कल 5 मई को बुद्धिस्ट जगत का महापर्व बुद्ध पूर्णिमा के नाम से मनाया जाएगा ।
वैशाख पूर्णिमा के दिन सिद्धार्थ गौतम का जन्म कपिलवस्तु में हुआ है तथा इसी के दिन बोधगया में उन्हें बुद्धत्व प्राप्त हुआ और इसी तिथि पर कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ।

तीनों तिथियों के अद्भुत समागम के कारण इस पर्व को त्रिविध पावनी पर्व भी कहा जाता है ।

बुद्ध के शांति, समानता, स्वतंत्रता, न्याय, मैत्री व भाईचारे के उपदेश को दुनिया के तमाम लोगों ने अपनाया और वे विकसित देश बन गए और भारत को विश्व गुरु का दर्जा प्राप्त हुआ।

भारत में आज जात-पात, ऊंच-नीच व अन्य धार्मिक भेदभाव का बोलबाला है। परिणाम स्वरूप देश में महंगाई, बेरोजगारी और अशिक्षा है।

इसलिए भारत को विकास के रास्ते पर चलने के लिए बुद्ध के समतावादी सिद्धांतों को पुनः अपनाना होगा तभी भारत एक विकसित देश बन पाएगा।

बुद्ध पूर्णिमा के पर्व देश के समस्त नागरिक के मंगल की कामना करती हूं।

Sahi target by Ashwani Kumar

👌 #जरूर पढें ✍️बेटी जब शादी के मंडप से ससुराल जाती है तब पराई नहीं लगती मगर जब वह मायके आकर हाथ मुंह धोने के बाद सामने ट...
05/05/2023

👌 #जरूर पढें ✍️

बेटी जब शादी के मंडप से ससुराल जाती है तब पराई नहीं लगती मगर जब वह मायके आकर हाथ मुंह धोने के बाद सामने टंगे टाविल के बजाय अपने बैग से छोटे से रुमाल से मुंह पौंछती है , तब वह पराई लगती है.
जब वह रसोई के दरवाजे पर अपरिचित सी खड़ी हो जाती है , तब वह पराई लगती है.
जब वह पानी के गिलास के लिए इधर उधर आँखें घुमाती है , तब वह पराई लगती है.
जब वह पूछती है वाशिंग मशीन चलाऊँ क्या तब वह पराई लगती है.
जब टेबल पर खाना लगने के बाद भी बर्तन खोल कर नहीं देखती तब वह पराई लगती है.
जब पैसे गिनते समय अपनी नजरें चुराती है तब वह पराई लगती है.
जब बात बात पर अनावश्यक ठहाके लगाकर खुश होने का नाटक करती है तब वह पराई लगती है.....
और लौटते समय 'अब कब आएगी' के जवाब में 'देखो कब आना होता है' यह जवाब देती है, तब हमेशा के लिए पराई हो गई ऐसे लगती है.
लेकिन गाड़ी में बैठने के बाद जब वह चुपके से
अपनी आखें छुपा के सुखाने की कोशिश करती । तो वह परायापन एक झटके में बह जाता तब वो पराई सी लगती
😪
नहीं चाहिए हिस्सा भइया मेरा मायका सजाए रखना ,
कुछ ना देना मुझको
बस प्यार बनाए रखना ,
पापा के इस घर में
मेरी याद बसाए रखना ,
बच्चों के मन में मेरामान बनाए रखना ,
बेटी हूँ सदा इस घर की
ये सम्मान सजाये रखना।।....
बेटी से माँ का सफ़र (बहुत खूबसूरत पंक्तिया ,
सभी महिलाओ को समर्पित)
बेटी से माँ का सफ़र .
बेफिक्री से फिकर का सफ़र .
रोने से चुप कराने का सफ़र उत्सुकत्ता से संयम का सफ़र .
पहले जो आँचल में छुप जाया करती थी.
आज किसी को आँचल में छुपा लेती हैं|
पहले जो ऊँगली पे गरम लगने से घर को सर पे उठाया करती थी ।
आज हाथ जल जाने पर भी खाना बनाया करती हैं|
पहले जो छोटी छोटी बातों पे रो जाया करती थी.
आज बो बड़ी बड़ी बातों को मन में छुपाया करती हैं|
पहले भाई,,दोस्तों से लड़ लिया करती थी.
आज उनसे बात करने को भी तरस जाती हैं|
माँ,माँ कह कर पूरे घर में उछला करती थी.
आज माँ सुन के धीरे से मुस्कुराया करती हैं|
10 बजे उठने पर भी जल्दी उठ जाना होता था.
आज 7 बजे उठने पर भी लेट हो जाया करती हैं|
खुद के शौक पूरे करते करते ही साल गुजर जाता था.
आज खुद के लिए एक कपडा लेने को तरस जाया करती है|
पूरे दिन फ्री होके भी बिजी बताया करती थी.
अब पूरे दिन काम करके भी काम चोर कहलाया करती हैं|
एक एग्जाम के लिए पूरे साल पढ़ा करती थी.
अब हर दिन बिना तैयारी के एग्जाम दिया करती हैं|
ना जाने कब किसी की बेटी किसी की माँ बन गई.
कब बेटी से माँ के सफ़र में तब्दील हो गई .?
बेटी है तो कल है|

बहुत प्यारी होती है बेटियाँ ,
न जाने लोग बोझ क्यों समझते हैं बेटियाँ ll

Sahi target by Ashwani Kumar

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