22/07/2026
भारतीय राजनीति में एक ऐसी धारणा को बढ़ावा दिया गया है कि यदि कोई व्यक्ति सरकार या सत्तारूढ़ दल की नीतियों, निर्णयों, गलतियों या भ्रष्टाचार की आलोचना करता है, तो उसे तुरंत "देशद्रोही", "राष्ट्रविरोधी" या "आतंकवाद समर्थक" जैसे विशेषणों से जोड़ दिया जाता है। लोकतंत्र में सरकार से असहमति व्यक्त करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। किसी भी सरकार या राजनीतिक दल की आलोचना करना देश का विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और मजबूत बनाने का माध्यम है। चिंताजनक बात यह है कि इस सोच को बिना तथ्यों की जांच किए कुछ शिक्षित लोग भी सच मान लेते हैं, जिससे स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद और असहमति की संस्कृति कमजोर होती है।