S D P.G. College Panipat

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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में ‘उत्तर दक्षिण- शास्त्रीय संगीत और नृत्य श्रृंखला’ का शानदार आयोजनविदुषी आरथी इयंगर ने भरतनाट्...
11/09/2025

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में ‘उत्तर दक्षिण- शास्त्रीय संगीत और नृत्य श्रृंखला’ का शानदार आयोजन
विदुषी आरथी इयंगर ने भरतनाट्यम और विदुषी असावरी पवार ने कत्थक नृत्य पेश कर सभी का मन मोहा
संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार और पायनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसाइटी दिल्ली के सहयोग से हुआ कार्यक्रम का आयोजन
उत्तर-दक्षिण नृत्य संगम ने दिखलाई भारत की सांकृतिक एकता: आरथी इयंगर
हमारे देश के नृत्यों में ही बसी है देश की आत्मा: असावरी पवार
एक मंच पर दो परम्पराएं देखना बेहद सुखद अनुभव रहा: रजनी गुप्ता
पानीपत, 09 सितम्बर
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में ‘उत्तर दक्षिण- शास्त्रीय संगीत और नृत्य श्रृंखला’ का शानदार आयोजन किया गया जिसमें विदुषी आरथी इयंगर ने भरतनाट्यम और विदुषी असावरी पवार ने कत्थक नृत्य पेश कर सभी के मन को मोह लिया । कार्यक्रम संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार और पायनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसाइटी दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया । इस अवसर पर विशिष्ट उपस्थिति में बॉलीवुड और टेलीविजन की मशहूर अदाकारा रजनी गुप्ता, पायनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसाइटी दिल्ली के सेक्रेटरी ललित नारंग, सदस्य प्रशांत और सीमा कार्यक्रम में उपस्थित रहे । मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, उप-प्रधान राजीव गर्ग, जनरल सेक्रेटरी महेंद्र अग्रवाल और प्राचार्य ने पौधे रोपित गमलें और अंग-वस्त्र भेंट करके किया । कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई । मंच संचालन डॉ मोनिका खुराना ने किया । विदुषी असावरी पवार ने गणेश स्तुति, ‘बाजत मृदंग नाचत शिवा शम्भू और कृष्ण भक्ति पर कत्थक के माध्यम से सभी को दांतों तले ऊँगली दबाने को मजबूर कर दिया । इसी प्रकार विदुषी आरथी इयंगर ने भरतनाट्यम में अद्भुत भाव-भंगिमाएं पेश करके दर्शकों को मन्त्र-मुग्ध कर दिया ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि 2009 में दिल्ली में स्थापित पायनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसाइटी एक राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत गैर सरकारी संगठन है जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए समर्पित है । संस्थान वैश्विक कलात्मक आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करता है । अपने पायनियर संगीत और कला विद्यालय के माध्यम से यह सोसाइटी शास्त्रीय और सुगम संगीत, नृत्य, नाटक, ललित कलाओं और शिल्पकला में प्रशिक्षण प्रदान करती है और युवा शिक्षार्थियों और उभरती प्रतिभाओं का पोषण करती है । सोसाइटी ‘उत्तर दक्षिण - एक शास्त्रीय संगीत और नृत्य श्रृंखला’ जैसी पहलों का भी नेतृत्व करती है जो उत्तर और दक्षिण भारत की परंपराओं को एक मंच पर लाती है और आज के युवाओं को हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रेरित करती है । पानीपत शहर के लिए यह दिन ऐतिहासिक है क्यूंकि इतने उच्च कोटि के दो कलाकारों ने अपनी कला को यहाँ प्रस्तुत किया है ।
विदित रहे कि विदुषी आरथी इयंगर जो आचार्य कलैवनी राजमोहन की शिष्या रही है भारत पर्व लाल किला दिल्ली में, कात्यायनी मंदिर, छतरपुर वसंत नवरात्रि में, जामिया मिलिया इस्लामिया में राष्ट्रीय भाषण प्रतियोगिता भाषा संगम के उद्घाटन समारोह में, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में ‘भारत और दक्षिण पूर्व एशिया: एक भारतीय पट्टी’ के सांस्कृतिक कार्यक्रम में, ताज महल होटल में मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने पर सम्मेलन के आयोजन में, अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला प्रगति मैदान में, श्री नरेंद्र मोदी और श्री एस.पी. बालासुब्रमण्यम की उपस्थिति में, कलाकेंद्र और प्रमायस द्वारा आयोजित कार्यक्रम में, कर्नाटक संगीत सभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम, में, श्री रामानुज कैंकर्य सभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में और ऐसे ही सैकड़ों अन्य कार्यक्रमों में अपने नृत्य का प्रदर्शन कर चुकी है । विदुषी आरथी इयंगर को उनके उत्कृष्ट नृत्य के लिए ‘संगीत में उत्कृष्टता’ उपाधि, एनएसयूआई सांस्कृतिक उत्सव 2019 में द्वितीय स्थान, 2018 में दिल्ली हाट में आयोजित दिल्ली की सबसे बड़ी राष्ट्रीय स्तर की नृत्य प्रतियोगिता में तृतीय स्थान, भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में प्रथम स्थान, कला उद्भव केंद्र गाजियाबाद द्वारा उनका विशेष उल्लेख किया जाना, रेन डांस एवं निरुतिया नृत्य के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है ।
इसी प्रकार भारत के नृत्य रत्न के रूप में प्रशंसित विदुषी असावरी पवार को इस कला के प्रति प्रेम उन्हें उनके प्रख्यात पिता पद्मश्री गुरु प्रताप पवार, एमबीई (ब्रिटिश साम्राज्य के सर्वोत्तम आदेश के सदस्य) से विरासत में मिला है जिन्हें कत्थक के लखनऊ घराने के प्रमुख प्रतिपादकों में से एक माना जाता है । असावरी ने 8 वर्ष की आयु से ही अपने पिता की लंदन स्थित नृत्य मंडली ‘त्रिवेणी’ के साथ नृत्य करना शुरू कर दिया था । उन्हें बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जॉन मेजर के नाम पर ‘मेजर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया । उसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा । असावरी ने इंग्लैंड में अपनी पढ़ाई जारी रखी और अपने पिता के मार्गदर्शन में नृत्य का अभ्यास जारी रखा और वे एक अपार क्षमता और प्रतिभा वाली नर्तकी के रूप में उभरीं । फिर वह भारत लौट आईं और पंडित विजय शंकर से तीन साल का कठोर प्रशिक्षण लिया और कथक नृत्य कला में निपुणता हासिल की और इसके लयकारी पहलुओं को आत्मसात किया । उन्होंने प्रख्यात श्रीमती गिरिजा देवी से शास्त्रीय गायन का भी प्रशिक्षण लिया । कथक के अलावा उन्होंने अंग्रेजी बैले और अफ्रीकी लोक नृत्य का भी प्रशिक्षण लिया है । वह कोलकाता में स्वर्गीय गुरु केलुचरण महापात्र और श्री सत्यदेव दुबे की कार्यशालाओं की सक्रिय शिष्या रही हैं । इंग्लैंड में रहते हुए उन्होंने लीसेस्टरशायर स्कूल ऑफ म्यूजिक (18 स्कूल और कॉलेज) और ब्रेंट म्यूजिक सर्विस, लंदन में कथक पढ़ाया । उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर विभिन्न नृत्य एवं नाटक की पटकथाएँ भी लिखी हैं । वह वर्तमान में दिल्ली पब्लिक स्कूल वसंत विहार में अध्यापन कर रही हैं । उन्हें हाल ही में भारत में उत्कृष्ट ‘महिला किरण उपलब्धि’ पुरस्कार और 2009 एवं 2010 में इंग्लैंड में कला एवं संस्कृति पुरस्कार भी मिला है ।
इस अवसर पर प्रो प्रवीण खेरडे, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ संतोष कुमारी, डॉ एसके वर्मा, डॉ दीपा वर्मा, डॉ बलजिंदर सिंह, डॉ वीरेंद्र गिल, प्रो संजय चोपड़ा, डॉ रवि कुमार, डॉ राहुल जैन, डॉ रेखा, डॉ कविता आदि मौजूद रहे ।

प्राचार्य
(डॉ अनुपम अरोड़ा)

ADMISSION OPEN FOR PG COURSES
20/07/2025

ADMISSION OPEN FOR PG COURSES

18/07/2025

ADMISSION OPEN

30/06/2025
02/06/2025

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