23/09/2026
न निदान ही निकला और ना ही कोई समाधान लेकिन चमका जोड़ का धंधा चंदाखोर कहते कहते अब्दुल्ला की शादी में जैसे कोई हुआ दीवाना भाई कोई हुआ दीवाना***गाजे बाजे बैंड बजाते मधुरम मधुरम गीत गाते और सुनाते बेसुध घोड़े पर बैठे दूल्हे राजा मंद मंद मुस्काते कुछ साथी झूम झूमकर ऐसे खाते और बांटते रहे मिठाई मानो मामा की शादी में कोई हुआ दीवाना जी ! कोई हुआ दीवाना।।
सरकार भी क्या खूब बोल गए , खूब गा गए अपनी उपलब्धि के गीत गाते खूब दहाड़े गोल गोल सतरंगी शब्दों और श्लोगनो की पाइप लाइन वाली कथा सुनाई इस राजा से तो इसका वज़ीर सच्चा निकला भाई ! न ज्यादा न कम बिल्कुल परफेक्ट।
फकटनेब वाले नेता भी यहां खा गए गच्चा बने रहे मुंह तक्का अपनी टोपी छोड़ घर पर बच्चा का टोपी पहन लिया।।बच्चा झूम झूम सहबाला बने वे अपने संगी साथी को माला ऐसे पहनाया मानो मामा की शादी में नई नवेले राजा को देख सबने गया गीत और छककर खाया मिठाई।।
मंच की अगली पंक्ति में बैठे मौन साधे रहे हमारे संघर्ष मुक्ति मोर्चा के भाई जो दबी ज़बान भी रख न सके सरकार के सामने वित्तरहित की व्यथा बच्चा तो असली "राजा" है अपनी निदान छोड़ अब निकला अश्वमेध का पकड़ने घोड़ा
इस लोकतंत्र के जंग में बजी दुंदुभी तारीख भी हो गया तय इस जनतंत्र में यह चुनाव भी क्या अश्वमेध यज्ञ से कम है ?
अब पहिले चुनाव तब वेतनमान
ले लो! ले लो भाई ! अनुदान बिना DBT पुराने जमाने जैसे अनुदान
सरकार हमारे हैं! सरकार हमारा है! निकलेगा निदान इसी धरा से !! समाधान भी होगा और अनुदान के बदले वेतनमान भी मिलेगा ।।
श्री कृष्ण मेमोरियल तो झांकी है आगे पुरा गांधी मैदान खाली है ।
गांधी मैदान खाली है ।।
जय हिन्द साथियों जय बिहार आवाज़ दो हम एक हैं ।