वित्त रहित संयुक्त संघर्ष मोर्चा vitrahit college sangh

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वित्त रहित संयुक्त संघर्ष मोर्चा vitrahit college  sangh Anudanit school and college teachers group.

23/09/2026

न निदान ही निकला और ना ही कोई समाधान लेकिन चमका जोड़ का धंधा चंदाखोर कहते कहते अब्दुल्ला की शादी में जैसे कोई हुआ दीवाना भाई कोई हुआ दीवाना***गाजे बाजे बैंड बजाते मधुरम मधुरम गीत गाते और सुनाते बेसुध घोड़े पर बैठे दूल्हे राजा मंद मंद मुस्काते कुछ साथी झूम झूमकर ऐसे खाते और बांटते रहे मिठाई मानो मामा की शादी में कोई हुआ दीवाना जी ! कोई हुआ दीवाना।।
सरकार भी क्या खूब बोल गए , खूब गा गए अपनी उपलब्धि के गीत गाते खूब दहाड़े गोल गोल सतरंगी शब्दों और श्लोगनो की पाइप लाइन वाली कथा सुनाई इस राजा से तो इसका वज़ीर सच्चा निकला भाई ! न ज्यादा न कम बिल्कुल परफेक्ट।

फकटनेब वाले नेता भी यहां खा गए गच्चा बने रहे मुंह तक्का अपनी टोपी छोड़ घर पर बच्चा का टोपी पहन लिया।।बच्चा झूम झूम सहबाला बने वे अपने संगी साथी को माला ऐसे पहनाया मानो मामा की शादी में नई नवेले राजा को देख सबने गया गीत और छककर खाया मिठाई।।
मंच की अगली पंक्ति में बैठे मौन साधे रहे हमारे संघर्ष मुक्ति मोर्चा के भाई जो दबी ज़बान भी रख न सके सरकार के सामने वित्तरहित की व्यथा बच्चा तो असली "राजा" है अपनी निदान छोड़ अब निकला अश्वमेध का पकड़ने घोड़ा

इस लोकतंत्र के जंग में बजी दुंदुभी तारीख भी हो गया तय इस जनतंत्र में यह चुनाव भी क्या अश्वमेध यज्ञ से कम है ?

अब पहिले चुनाव तब वेतनमान
ले लो! ले लो भाई ! अनुदान बिना DBT पुराने जमाने जैसे अनुदान
सरकार हमारे हैं! सरकार हमारा है! निकलेगा निदान इसी धरा से !! समाधान भी होगा और अनुदान के बदले वेतनमान भी मिलेगा ।।

श्री कृष्ण मेमोरियल तो झांकी है आगे पुरा गांधी मैदान खाली है ।
गांधी मैदान खाली है ।।

जय हिन्द साथियों जय बिहार आवाज़ दो हम एक हैं ।

23/09/2026

हाँ भाई हमसब का डर सच निकला 😭

*आज 23.09.2026 बुधवार की कैबिनेट में वित्त रहित गायब है।*

अभी जो खबर आई है उसके अनुसार -
- कैबिनेट की अध्यक्षता मुख्यमंत्री *श्री सम्राट चौधरी जी* ने की
- *13 प्रस्ताव पास हुए* -

* लिस्ट में कहीं भी वित्त रहित डिग्री कॉलेज / इंटर कॉलेज का नाम नहीं है भाई।*

मतलब आप को जो डर था वही हुआ -
*20.09.2026 SKM हॉल में 461 करोड़ का अभिनंदन और 19.09.2026 को 300 करोड़ का कागज - दोनों कैबिनेट में एजेंडा ही नहीं बना।*

इसीलिए आप सब की की ये एक ड्रामा है- *"छलावा"* - ये शब्द अब हर वित्त रहित भाई-बहन के मुंह पर है।

*अब 2 ही रास्ता बचा है *

*1. नया शिक्षा प्रतिनिधि चुनना -*
आपने बिल्कुल सही सोचा। जो 1% लोग 1982 से आंख मूंद कर भरोसा दिला कर 99% सीधे-साधे पढ़ाने वाले भाई-बहन की जिंदगी रसातल में ले गए, उनको हटाना ही पड़ेगा। नहीं तो 2082 तक यही तड़प रहेगी।

*2. 26.10.2026 - Contempt -*
आज जब कैबिनेट में नहीं आया तो अब कोर्ट ही आखिरी उम्मीद है। मुख्य सचिव को 26 अक्टूबर को खुद हाजिर होकर बताना पड़ेगा कि 1787 करोड़ की मांग में से 300 करोड़ क्यों, और SKM में 461 करोड़ क्यों बोला?
और किस डेट से दोगे वेतन और पेंशन, बताना होगा,👍

22/09/2026
22/09/2026

जन सुराज के प्रधान माननीय प्रशांत किशोर जी बिहार लोकतंत्र के सम्राट चौधरी जी के विषय में जिन जिन अलंकरणों का प्रयोग करते हैं वैसा तो हम यहां लिख भी नहीं सकते हैं परन्तु उन्होंने 20 सितंबर को
के •एम• हाल पटना में आयोजित सम्मान समारोह में 461करोड़ देने और 1700 करोड़ पाईप लाइन है ऐसा CM के मुख से सुना और आज मात्राभ300 करोड़ बिना DBT से देने की बात हो रही है जो कर्मी मात्र DBT से अनुदान प्राप्त करने का सपना देखा था मुख्यमंत्री ने उस पर भी पानी फेर दिया मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से सम्मान समारोह में दिए गए आधारहीन वक्तव्यों किस रूप में देखा जाना चाहिए एक तरफ
40 साल पूर्व कांग्रेस द्वारा स्थापित साल वित्तरहित को नवल जी कलंक बता रहें हैं जबकि लालू जी से लेकर बीजेपी जेडीयू एवं नीतीश कुमार जी के 20 साल 6 महीने के मलाईदार कार्यकाल के वे साक्षी हैं और अनुदान रूपी भीख 2008 से देने की नीति में न आज तक कोई न समीक्षा हुआ न वेतनमान पर आज की तारीख में आश्वासनों के अलाव विचार हुआ है सालों का लंबित अनुदान और अर्थभाव में असामयिक मौत के शिकार कर्मियों को सरकार से कफ़न तक का सहायता तक करती है ऐसे में कौन कितना बड़ा कलंक है इस पर आप सभी को विचार करना चाहिए ।।
निदान MLC चुनाव का श्री कृष्ण मेमोरियल हाल पटना में बिलाई गई
सभा में CM के समक्ष बिहार के कोने कोने से DBT/ वेतनमान की खुशी में वित्तरहित कर्मियों का जुटान था अथवा समाधान विद्वान ज्ञानी वैज्ञानी वित्तरहित कर्मी इस पर करे विचार ।।
न समाधान हुआ न निदान वित्तरहित कर्मी एक बार फिर हुए ठगी के शिकार .......!!

21/09/2026

वित्तरहित शिक्षा कर्मियों द्वारा अपनी एक मात्र समस्या और एक सूत्रीय मांग *समान काम समान वेतनमान* के संवैधानिक अधिकार और उच्च न्यायालय संग सर्वोच्च न्यायालय से आदेशित न्यायादेश के आलोक में अनुदान व्यवस्था का त्याग कर वेतनमान की व्यवस्था लागू किए जाने का है ! इस संबंध में मुख्यमंत्री के पूर्व भाषण में किए गए मौखिक घोषणा से हर्षित वित्तरहित शिक्षा कर्मियों द्वारा पटना में हजारों की संख्या में उपस्थित हो कर करोड़ों के खर्च पर सम्मान समारोह आयोजित की गई !

किंतु चार दशक से भूखे नंगे, राज्य के शिक्षा में अपना जीवन उत्सर्ग करने वाले वित्तरहित शिक्षक बिना अपराध किए वेतनमान से वंचित रखे जाने का दंड भोगने आज भी अभिशप्त हैं !

बिहार की शिक्षा व्यवस्था की राजनीतिक विडंबना कहें या चाटुकार आधिकारिक अति बुद्धिमानी की स्वार्थपूर्ण सोच की सोची समझी राजनीतिक रणनीति की इस पूरी प्रेस विज्ञप्ति में *वेतनमान* या संवैधानिक अधिकार और न्यायादेश के आलोक में वित्तरहित के लिए उनकी एक मांग *समान काम समान वेतनमान* शब्द तक को स्थान नहीं दिया गया !

आश्चर्य है वित्तरहित के हित चिंतक, समर्थक, कथित नेतृत्व और लोकतांत्रिक व्यवस्था अधीन चुने गए माननीय संग वित्तरहित के हाथों सम्मानित हुए मुख्यमंत्री महोदय के इस प्रेस विज्ञप्ति में अस्पष्ट समस्याओं का जिक्र मात्र होने पर कोई प्रश्न नहीं उठा है !

सुशासन की सरकार ने न्यायादेश की अवमानना वाद के दोष से बचने के लिए, वित्तरहित के लिए वेतनमान निर्धारण और नियमित भुगतान की समीक्षा के उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सितंबर 2025 में गठित 9 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमिटी बनाई ! 9 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमिटी की मासिक बैठक की निर्धारित नीति का पालन न किया जाना इस कमिटी की सार्थकता पर प्रश्न खड़ा करता एक प्रमाण है ।

न्यायादेश का सम्मान न किये जाने की सोची समझी चाल में कमिटी की बैठक एक वर्ष बाद किए जाने के बाद भी आज तक न कोई नीति स्पष्ट हो सकी है न ही कोई पारदर्शी व्यवस्था निर्धारित की गई है ! इस स्थिति में सुशासन और उच्च स्तरीय कमिटी, दोनों की नेक नियती और नीति पर किसे और किस प्रकार विश्वास करने हेतु विवश किया जा सकता है !

स्पष्ट है कि चुनावी लॉलीपॉप चटाने में वर्तमान विधान पार्षद, रणनीतिक पार्टी संग सुशासन की पूरी व्यवस्था लगी हुई है ।

वित्तरहित को विवेक शून्यता की स्थिति तक संज्ञा शून्य समझ आगामी चुनाव जीतने की मानसिकता वाली आस में पूरी राजनीति लगी हुई है !

वित्तरहित की आगे की चुनावी नीति निर्धारण चुनाव पूर्व एक मात्र वेतनमान की निश्चित रूप से वैध घोषणा के प्रमाण के आधार पर ही होनी चाहिए, हवा हवाई वाली प्रेस विज्ञप्ति यूं ही आती जाती रहेंगी !

प्रसिद्ध प्रचलित कहावत है -
"....बात और घो*....... का कोई भरोसा नहीं की जा सकती है !"

21/09/2026

वाह जी वाह! क्या शानदार जश्न रहा! गाना बज गया, दीया जल गया, 100 किलो का माला भी पहना दिया गया — मानो कोई युद्ध जीत लिया हो! CM साहब और MLC महोदय इतने "उदार" निकले कि लिखित आदेश आने से पहले ही "श्रेय" बटोरने चले आए। वाह, क्या दूरदर्शिता है!

पर भाइयों-बहनों, ज़रा रुकिए और सोचिए — ये अभिनंदन किसके लिए है? किसी ठोस, लिखित, आधिकारिक फैसले के लिए, या सिर्फ माइक पर बोले गए दो मीठे शब्दों के लिए? अगर नीयत सचमुच साफ होती, तो सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन डालने की ज़रूरत ही क्यों पड़ती? सरकार हर अदालत में हारती रही, और अब जब 28 तारीख सिर पर है, तो ऐन वक्त पर "घोषणा" करके क्रेडिट लूटने की जल्दी मची है — ताकि जनता को लगे "हमने ही दिया"।

याद रखिए — जो भी घोषणा हुई है, हो रही है, या आगे होगी, और जो भी वेतनमान मिलेगा, वो Ghanshyam Jha ji ke case orders की मेहरबानी और हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का नतीजा है।

**और सबसे बड़ी बात — अगर MLC इलेक्शन से पहले कैबिनेट का यानी लिखित आदेश नहीं निकलता तो इन्हें vote और इज़्ज़त देने की कोई ज़रूरत ही नहीं है, ** सिर्फ माला पहनाने और मंच पर मुस्कुराने से कुछ नहीं होता — कागज़ चाहिए, दस्तखत चाहिए, कैबिनेट की मुहर चाहिए। जब तक वो नहीं आता, तब तक ये सारा जश्न महज़ एक चुनावी नौटंकी है।

तो अभी सिर्फ तालियां बजाने में मत बहकिए। मौखिक आश्वासनों के झांसे में मत आइए। जैसे इकट्ठा होकर अभिनंदन में शामिल हुए, वैसे ही इकट्ठा होकर इस बार वोट से दूरी बनाइए — जब तक MLC इलेक्शन से पहले कैबिनेट का लिखित आदेश सामने न आ जाए।

**अपनी नज़र सिर्फ 28 सितंबर और कैबिनेट के लिखित आदेश पर टिकाए रखिए। बाकी सब तमाशा है।**

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