17/09/2016
सपना.. कभी अच्छा कभी बुरा..
आज मैं इस पेज का एडमिन आप सबों को जिन्होंने इस पेज को पसंद किया है सबसे पहले धन्यवाद देना चाहता हूँ।
मैं काफी दिनों से सपनों पर अनुसंधान कर रहा हूँ और इसमे मुझे आप सबों के निजी अनुभवों और बहुमूल्य विचारों की आवश्यकता है।
मित्रों सबसे पहले आज मैं उस प्रकार के सपनों की बात करूँगा जो की आप में से शायद 1 या 2 लोगों ने जरूर देखा होगा ।
अगर नहीं देख है तो कल्पना कीजिए की आप सोने ज रहे हैं और आपको नींद भी आ गई है जैसा की सब के साथ होता है, "आप कुछ न कुछ बात सोचते सोचते हीं सोते होंगे" और अगले हीं पल(तय नही है की सोने के तुरंत बाद हीं) आपकी आँखे अचानक से खुल जाती हैं और आप अब अपने आप को अपने बेड पे सोता हुआ देख सकते हैं और तो और अपने कमरे में हो रही सारी हलचल को देख सकते हैं ।
आप अपनी आँखे पूरी तरह खोलना चाहते हैं लेकिन वो खुल नहीं पाति हैं, तभी आपको लगता है की शायद आपकी मौत हो गई है (क्योंकि आप खुद से अपना शरीर देख सकते हैं और आपकेकमरे में उपस्थित पापा और माँ के बीच हो रही बात को सुन भी सकते हैं) तब आप चिल्लाना चाहते हैं और अप्रत्याशित रूप से आप ऐसा नही कर पाते हैं, तभी आपके फोन की घंटी बजती है और आपको ऐसा लगता है की अगर यह सपना है तो अब तो मैं जाग ही जाऊंगा लेकिन आप अब भी नही जागते हैं और तब आपको लगता है की आपकी मौत हो चुकी है। फिर अचानक से एक बार फिर आपकी आँख खुलती है और आप खुद को पसीने से लथपथ अपने बेड पर पाते हैं और एक बहुत हीं बुरी अनुभूति से बाहर आते हैं।
और फिर जब आप ये बात किसी को बताते हैं जिन्हें ऐसा सपना नही आया है वो आपकी बात को कोई महत्व नहीं देते हैं।
अगर आप में से किसी को ऐसी कोई अनुभूति हुई हो तो कृपया बतायें ।
आप सबों के महत्वपूर्ण अनुभवों के इंतजार में आपका ...