16/05/2018
मसौढ़ी झुग्गी-झोपड़ी से राष्ट्रपति भवन तक
एक लड़का जिसमें सनक है कुछ करने की, हमारे देश के लिए, समाज के लिए गरीब बेसहारा बच्चों के लिए जिसने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर ऐसे बच्चों को पढ़ाना शुरू किया जो सड़क पर कचरा चुनते हैं, भीख मांगते हैं, होटलों में काम करते हैं, कुड़ा में फेंके हुए खाने को चुनकर खाते हैं और न जाने क्या-क्या......ऐसे बच्चों को सुफियान आजाद(रहमतगंज) और कुछ दोस्त साथ मिलकर पढ़ाने का जिम्मा उठाया। जो खुद अभी पढ़ ही रहे हैं। आप सोच भी नहीं सकते कि ऐसे बच्चों को पढ़ने के लिए खासकर उनके माता-पिता को मनाना और पढ़ने के लिए जगह तलाश करना कितना मुश्किल रहा होगा। सुफियान बताते हैं भईया ये बच्चे पढ़ने आते ही नहीं थे, एक - दो बच्चे आते भी थे तो किसी के पास कलम नहीं तो किसी के पास कॉपी नहीं। तब हमलोगों ने मुहल्ले - मुहल्ले जाकर रद्दी पेपर मांगा और कवाड़़ी में बेचकर उन बच्चों के लिए कॉपी-कलम की व्यवस्था की, ये सिलसिला अब तक चल रहा है। सुफियान बताते हैं भईया मुहल्ले वालों ने भी पूरा साथ दिया वे लोग खुशी-खुशी पेपर देते हैं कभी-कभी तो बुलावा भी भेज देते हैं पेपर लेने के लिए। इस जज्बे के लिए मुहल्ले वालों को दिल से सलाम। बच्चे ज्यादा हुए तो पढ़ाई के लिए अस्थायी जगह की व्यवस्था जी.आर.पी, थाना(तारेगना स्टेशन) के बाहर लगभग प्लेटफार्म पर जी.आर.पी., तारेगना स्टेशन अधिकारियों ने खासकर तत्कालीन रेल एसपी, पटना, श्री जीतेन्द्र मिश्र जो अब डी.आई.जी., मुंगेर हैं, ने ईजाजत दे दी आप इन्हें झुग्गी-झोपड़ी शिक्षण व्यवस्था के संस्थापक सदस्य भी कह सकते हैं। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या दो से डेढ़ सौ तक पहुँच गयी। जब बच्चे पढ़ने लगे तो उनके माँ-बाप भी बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देने लगे हैं। धीरे-धीरे और लोग भी मदद के लिए आये, किसी ने कलम दे दिया तो किसी ने कॉपी तो किसी ने ब्लैक बोर्ड की व्यवस्था कर दी तो किसी ने बैठने के लिए दड़ी दे दी कोई आया तो इन बच्चों के लिए चॉकलेट/बिस्किट ही दे गया। अब तो श्री विश्वजीत कुमार विष्णु, रिटायर्ड शिक्षक, घर बरनी(मसौढ़ी) नियमित रूप से साथ ही श्री चाँद आजाद, शिक्षक, रहमतगंज(मसौढ़ी) निवासी बच्चों को शिक्षा में योगदान दे रहे हैं। सुफियान आजाद जब कॉलेज(रांची) जाएँगे तो शायद श्री विश्वजीत कुमार विष्णु, रिटायर्ड शिक्षक, मुख्य रूप से इस सिलिसले को आगे बढ़ायेंगे। सुफियान ने भी वादा किया है जब भी मौका मिलेगा अपनी सेवाएं देते रहेंगे चाहे वे देश के किसी कोने में रहें। शिक्षा के इस सफर में अब तक किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं ली गयी, न ली जायेगी। हाँ इन सब के बीच जी.आर.पी., थाना, तारेगना ने बड़ी भूमिका निभाई, अगर इनलोगों ने बैठने के लिए जगह न दी होती और समय-समय पर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित न किया होता तो शायद यह सब संभव भी न होता। अब तो इन बच्चों को पढ़ाने के लिए व्यवस्था जी.आर.पी., थाना, तारेगना स्टेशन, मसौढ़ी के अंदर एक बड़े से हॉल में कर दी गयी है जो काफी प्रसंशनीय है। आगे चलकर सुफियान और दोस्तों ने RTE(शिक्षा का अधिकार, अधिनयम 2009) ईस्तमाल कर अब तक 22 बच्चों की दाखिला राज्य के बड़े प्राईवेट स्कूलों में करा चुके हैं। एक बार तो ये लोग एक लड़की को कुछ मनचले लड़के से भी बचा चुके हैं। इसी साल 26 जनवरी, 2018 को इन्ही कचरा चुनने वाले, होटलों में काम करने वाले, एक टाईम खाना खाने वाले बच्चों ने गाँधी मैदान, मसौढ़ी में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया तो पुरा समां ही बांध दिया, लोग इन बच्चों का प्रतिभा देखकर कुछ समय के लिए तो चकरा ही गये। यही नहीं मसौढ़ी के सारे नामी-गिरामी स्कूल के बच्चों को सांस्कृति कार्यक्रम को पीछा कर प्रथम पुरस्कार भी जीता। जब इन बच्चों की तरफ से राष्ट्रपति जी से मिलने के लिए पत्र के द्वारा आग्रह किया गया तो इजाजत भी तुरंत मिल गया। जब राष्ट्रपति जी से मिलने के वक्त टीकट खरीदने के लिए पैसे की समस्या आयी तो उस समय भी श्री जीतेंद्र मिश्र, DIG, Munger ने पैसे की मदद की साथ ही आने-जाने का पूरा प्रबंध किया। राष्ट्रपति महोदय श्री रामनाथ गोविंद भी इन बच्चों के प्रतिभा से बहुत प्रभावित हुए जहाँ राष्ट्रपति महोदय ने 15 मीनट का समय दिया था वहाँ उन्होंने इन बच्चों को 24 घंटे का समय दिया साथ ही पूरा राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी करवाया जिससे बच्चे काफी खुश हुए। आप तो जानते ही है बच्चें खुश तो सारा जग खुश।
SOURCE NEWS- https://www.facebook.com/sugubeta/posts/1682664755188506