02/11/2024
ना कोई डिग्री न कोई डिप्लोमा, ना रेटिंग ना फीडबैक का ड्रामा,
पैमाने है उंगलिया,कमाल का हुनर पाया है
देखो भेजी के ब्यौ मैं सरियूल बोड़ा आया है!
अब चढ़ेगी दाल भडु मैं,गजब का स्वाद आया है
कड़ी नही भुला झवाली का प्लान बनाया है
रखा है गर्म करने को पानी तोलु मैं,
सायद बोड़ा को सूजी का भी विचार आया है!!
दाल मखनी मैं ढूंढता हु वो स्वाद, उडद राजमा मैं जो आता था
झोवली के साथ मिठू भात ,ओर भुनी हुई लाल मिर्च मेनू पूरा हो जाता था!!
टकटकी लगाकर हम बनता खाना देखा करते थे
सूजी मैं पड़े हुये नारियूल के टुकड़े,ताज पे हीरा चढे से लगते थे!!
खोया कुछ भी नही है अब भी,बस हम देखा देखी मैं भूल रहे है
कह रहे है चाइना का विरोध करो,उसी का प्लास्टिक ठूस रहे है!!
सरियूल बोड़ा भी क्या खूब हुनर वाला था
नंगे पाउँ ही मस्त स्पीड मैं पूरी पांगीत को खाना बाटा करता था!!
पैमाना हाथो को रटा हुआ सा रहता था,
जितना जो खा सके उतना ही उसकी थाली मैं देता था!!
दिखावे का मोहताज नही है, पहाड़ का कोई भी हुनरवान,
तुमने कभी बोला नही, उसने कभी गाया नही,
उसने तो कभी दिखया नही, मैंने कभी लिखा नही
पर अब जरूरत है, भूले बिसरो को याद करो,
आखिरी मौका है भूलो अब ना इसको बेकार करो,
शादी नही कर सकते हो गाऊँ जाकर, तो एक मुहिम मैं शाथ दो,
हो शादी अगर पाहड़ी की, तो ढोल दमो को हर मुमकिन बुलाना है,
प्रण करो शादी के बाद जाकर एक सत्यनाराण की कथा गाऊँ मैं, ओर खाना सरियूल से बनवाना ओ मैं !!!