02/01/2026
भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय: सहिया पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
देहरादून, 2 जनवरी 2026।
सरदार महिपाल राजेन्द्र जनजातीय (पी.जी.) कॉलेज, सहिया, देहरादून में “भारतीय ज्ञान परंपरा: शिक्षा, विज्ञान एवं समाज में समकालीन प्रासंगिकता” विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी हाइब्रिड माध्यम (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) से संपन्न हुई, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। संगोष्ठी का उद्घाटन श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. एन.के. जोशी ने वर्चुअल माध्यम से किया। उन्होंने अपने उद्घाटन उद्बोधन में वेदों एवं उपनिषदों की दार्शनिक, वैज्ञानिक और नैतिक परंपरा को आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विवेक, तर्क और आत्मबोध पर आधारित है, जो आज की शिक्षा व्यवस्था तथा नवाचार के क्षेत्रों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
द्वितीय एवं तृतीय सत्रों में ऑफलाइन माध्यम से डॉ. राजकुमारी भंडारी, डॉ. हरिओम शंकर, डॉ. सुमेर चंद्र, डॉ. मंजू भंडारी, डॉ. पूजा पालीवाल, डॉ. निरंजन कुमार, डॉ. माधुरी रावत, डॉ. अनिल शाह, डॉ. प्रवेश त्रिपाठी एवं डॉ. चंद्रिका सहित अनेक विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
वहीं ऑनलाइन सत्र में प्रो. कल्पना पंत के संयोजन में डॉ. रमेश प्रसाद अहिरवाल (मध्य प्रदेश), डॉ. सानू सिन्हा (असम), डॉ. सौरभ कपूर (उड़ीसा), डॉ. गजेंद्र प्रताप (दिल्ली) एवं डॉ. दीक्षिता अजवानी (राजस्थान) ने अकादमिक विमर्श को समृद्ध किया।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने भारतीय ज्ञान परंपरा को लोकजीवन, प्रकृति एवं मूल्य आधारित शिक्षा से जुड़ा बताते हुए इसकी समकालीन उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्लोबल शिक्षा समिति के अध्यक्ष सरदार सिंह तोमर ने की। महाविधालय के चेयरमैन अनिल सिंह तोमर ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति, सभी वक्ताओं, अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।