Professor H D Bhartiya

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सामाजिक कार्यकर्ता एवं RTI ऐक्टिविस्ट
Myself Professor H D Bhartiya giving my services to Bundelkhand university Jhansi as HOD of Botany.
प्रवक्ता समाजवादी पार्टी

डिबेट
19/05/2026

डिबेट

यह पाद कर रसीद मेमो पूरी तरह से फ़र्ज़ी,व्यंग्यात्मक और ऐतिहासिक रूप से ग़लत है । ी_भारतीय
19/05/2026

यह पाद कर रसीद मेमो पूरी तरह से फ़र्ज़ी,व्यंग्यात्मक और ऐतिहासिक रूप से ग़लत है ।

ी_भारतीय

सुंदर गुर्जर  ी_भारतीय
19/05/2026

सुंदर गुर्जर

ी_भारतीय

कहीं तू वही तो नहीं !
19/05/2026

कहीं तू वही तो नहीं !

उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक गर्म राज्य ।
18/05/2026

उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक गर्म राज्य ।

18/05/2026

“यथा राजा तथा प्रजा”पुरानी कहावत है

आज राजतंत्र भले ही खतम हो गया हो और लोकतंत्र आ गया हो पर राजशाही बकरार है। लोकतंत्र में जन प्रतिनिधियों की सरकार होती है पर आज साफ नजर आता है जनप्रतिनिधि दल प्रतिनिधि की भूमिका अधिक निभाते है ^जन^ की दशा या दुर्दशा पर ध्यान कम ही देते हैं।स्तंत्रतासंग्राम के सबसे अधिक प्रभावी नेता महात्मा गांधी ने कम से कम वस्त्र पहने का निर्णय इसलिए लिया था कि देश की आम गरीब जनता को तन ढकने के लिए पर्याप्त कपड़े उपलब्ध नहीं थे। उनकी सादगी के संदेश को देश की जनता ने आत्मसात किया था।चरखा चलाया -खादी बनाई पहनी- बेची ।अंग्रेजी कपड़ा मिलों जो भारत में कपड़ा बेच बेच धनपति बन रही थी उन्हें घाटा हुआ पर भारत की जनचेतना दुनिया को दिखी ।भारतीय जनता की स्वदेशी भावना अधिक बलवती हुई।गांधीजी ने प्रवचन न देकर अपने संदेश को अपने ईमानदार आरचण से जन जन तक फैलाया।

आज की राजनीति बिडम्बना है कि देश के पी एम महोदय
सबसे म॔हगे पोशाकें पहनते हैं सबसे लगजरी कारों में घूमने का भरपूर आनंद लेते हैं। अपने कफले में तमाम कारें फिजुल की शान का प्रदर्शन करने हेतु चलवाते हैं। चुनावों में तमाम सही-गलत हथकड़े अपना कर अकूत धन खर्च करते हैं। प्रायः अनावश्यक विदेशी यात्राऐं करते रहते हैं।विश्वगुरूकहले की शनक सिर पर लादे रहते हैं। समय पर न खुद सावधान होते हैं न सरकार- दल और जनता को सावधान करते हैं।

अब जब म॔हगाई जनता के गले को दबाए जा रही है और अनिश्चित -अदूरदर्शी विदेश नीति के कारण ईधन - गैस -पैट्रोल -डीजल के भंडार कम होते जा रहे हैं तब उपदेश दे रहे हैं कि पैदल चलो वाहनों का उपयोग कम से कम करो ईधन को बचाओ सोना न खरोदो । जनमन को दुखी करने वाली बात तो यह है जिस दिन उपदेश दिया कि एक वर्ष तक लोग विदेश यात्रा पर न जाऐं उसके अगले ही नरेंद्र मोदी स्वयं छ दिवसीय विवेश यात्रा पर रवाना हो गए। ऐसी अनैतिक प्रवचन वाजी देश ने पहले कभी सुनी ।

सादगी और नैतिकता के आदर्श महापुरूष देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री से ही कुछ शबक ले लेते।उनके नैतिक आचरण का ऐसा प्रभाव था कि उनके हर परामर्श और संदेश को जनता सश्रद्धा स्वीकर करती थी क्यों कि वे जो कहते थे उसे अपने आचरण में अपनाते भी थे।

सच यह है कि जनता पाख॔डी राष्ट्रवाद में कतई विश्वास नहीं करती लेकिन जनता ने हर राष्ट्रीय संकट के समय सिद्ध किया है उसमें देशभक्ति की भावना कूटकूट कर भरी है। 1962 में चीन से युद्ध हुआ हो या 1965 में पाकिस्तान से या 1971 पुनः पाकिस्तान से या कारगिल का युद्ध हुआ हो भारत की जनता देशहित में हर त्याग करने लिए तत्पर रही है। जनता अपने कर्तव्य का पालन अपना नैतिक दायित्व निभाते हुए सदा से करती रही है--सदा करती रहेगी। सरकार की कुटिल राजनीति और मंशा चाहे जैही हो ।
जय भीम 🙏🏻
जय संविधान


ी_भारतीय

17/05/2026
धरती का पहला आदमी जो तेल कम फूंकने का संदेश देकर रैली करने चला जाता हैधरती का पहला आदमी जो विदेश न घूमने की कहकर खुद विद...
16/05/2026

धरती का पहला आदमी जो तेल कम फूंकने का संदेश देकर रैली करने चला जाता है

धरती का पहला आदमी जो विदेश न घूमने की कहकर खुद विदेश घूमने चला जाता है ।

धरती का पहला आदमी जो सोना न खरीदने की बात करता है और खुद सोने के धागे से बने सूट पहनता है ।

धरती का पहला आदमी जो इधर स्वदेशी की बात करता किन्तु इम्पोर्टेड चश्मा,घड़ी और पेन 🖊️ आदि प्रयोग करता है ।

👎बाकी इसका अंदाज देखो जैसे कि इसका स्वागत नहीं हो रहा बल्कि ये अपना स्वागत जबरदस्ती करवा रहा है ।

** इतना बड़ा पाखण्डी आदमी नहीं देखा होगा ।


ी_भारतीय

यह सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि लाशों का वह ढेर है जिसमें हमारे अपने हर दिन, तिल-तिलकर मर रहे हैं! इस आंकड़े की समीक्षा की जा...
16/05/2026

यह सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि लाशों का वह ढेर है जिसमें हमारे अपने हर दिन, तिल-तिलकर मर रहे हैं!

इस आंकड़े की समीक्षा की जाए तो इसमें वंचित समाज के ही बड़ी तादाद में लोग हैं!

युवा भी जिसे दुनिया देखनी थी, जो जवानी में बूढ़े दिखने लगे हैं!

शहरों में नहीं अब कस्बों में भी लेबर बाजार लग रही हैं!

हर दिन पारिवारिक कलह से आत्महत्या की खबरें भी ज्यादातर इसी तबके के लोगों से जुड़ी होती है!

पारिवारिक कलहों की खबरों की तफ्तीश की जाए तो उसका कारण आर्थिक हालात ही है!

इन आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा और भयावह हो जाएगा?

लाखों करोड़ों की अर्थव्यवस्था वाला देश क्या एक अदद सरकारी नौकरी नहीं दे सकता!

यदि नहीं दे सकता तो विश्वगुरु-विकसित भारत कहने वालों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए!



ी_भारतीय

फादर लैंड के बाद मदर लैंड (मायका) पहुँचे महामानव!!||भारत में कपड़े से पहचानने वाले एंटायर पोलिटिकल साइंस के विशेषज्ञ||  ...
16/05/2026

फादर लैंड के बाद मदर लैंड (मायका) पहुँचे महामानव!!

||भारत में कपड़े से पहचानने वाले एंटायर पोलिटिकल साइंस के विशेषज्ञ||



ी_भारतीय

मोदी जी!यदि साहस हो तो ईरान 🇮🇷 पर हमले की भी निंदा कर देते । लेकिन आप करगें नहीं ।                   ी_भारतीय
15/05/2026

मोदी जी!

यदि साहस हो तो ईरान 🇮🇷 पर हमले की भी निंदा कर देते । लेकिन आप करगें नहीं ।




ी_भारतीय

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