09/10/2026
Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University, Pusa में “एग्रोफोरेस्ट्री और कार्बन अर्थव्यवस्था में अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों” पर एक दिवसीय ब्रेनस्टॉर्मिंग बैठक का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के RPCAU-Post Graduate College of Agriculture, Pusa एवं RPCAU Pduchf Piprakothi द्वारा आयोजित इस बैठक में वानिकी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माताओं एवं अन्य संसाधन विशेषज्ञ ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान अपने अध्यक्षीय संबोधन में माननीय कुलपति डॉ. P.S. Pandey ने कहा कि एग्रोफोरेस्ट्री अब केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है, यह कार्बन अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। हमारा लक्ष्य है कि बिहार के छोटे किसान भी कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय अर्जित करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय गंगा के मैदानी क्षेत्रों के लिए ऐसे एलोमेट्रिक मॉडल और एमआरवी प्रोटोकॉल विकसित करेगा, जिससे किसान की हर पेड़ की कीमत कार्बन बाजार में तय हो सके।
बैठक में सेवानिवृत्त अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, ओडिशा सरकार, श्री कुमार राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि कार्बन ट्रेडिंग से किसानों को जोड़ना जलवायु न्याय है। अब समय आ गया है कि खेत में खड़े शीशम, पॉपलर और आम के पेड़ों को भी किसान की एफडी की तरह देखा जाए। इसके लिए वैज्ञानिकों को सरल सत्यापन प्रणाली बनानी होगी ताकि अशिक्षित किसान भी आसानी से इस योजना से जुड़ सके।
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. एम.एस. मलिक ने कहा कि पारंपरिक कृषि-वानिकी मॉडल को जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में पुनर्परिभाषित करने की जरूरत है।