17/08/2026
2047 के विकसित भारत के निर्माण में युवा बनें टेक्नोलॉजी के क्रिएटर : कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह
स्वतंत्रता दिवस समारोह में देशभक्ति से सराबोर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कुलगुरु ने सवेरा के विद्यार्थियों को किया सम्मानित
सोनीपत,15 अगस्त।
दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल में शनिवार को 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह, गरिमा और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाया गया। कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर देशभक्ति के नारों और तिरंगे की शान से गूंज उठा। समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता पर आधारित गीत, नृत्य एवं अन्य प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम के समापन पर कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले सवेरा स्कूल के विद्यार्थियों को पुरस्कृत एवं सम्मानित किया। सवेरा स्कूल के लगभग 250 बच्चों को स्टेशनरी किट भी दिए। समारोह के अंत में उपस्थित सभी को प्रसाद के रूप में लड्डू वितरित किए गए। विदित रहे कि विश्वविद्यालय मे दो दिन पूर्व तिरंगा यात्रा का भी आयोजन किया गया था जिसमें विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने देशवासियों एवं विश्वविद्यालय परिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन उन अमर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र वातावरण में सांस ले रहे हैं, वह अनगिनत बलिदानों का परिणाम है।
कुलगुरु प्रो.सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब भारत आत्मनिर्भर, शिक्षित, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समृद्ध और विश्व में सम्मान के साथ खड़ा होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का जो संकल्प लिया गया है, उसे पूरा करने में देश के युवाओं और विद्यार्थियों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आज के विद्यार्थी ही कल के वैज्ञानिक, इंजीनियर, शिक्षक, उद्यमी, प्रशासक और राष्ट्र निर्माता बनेंगे।
कुलगुरु प्रो.सिंह ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी तलाशने वाले युवा न बनें, बल्कि रोजगार के अवसर पैदा करने वाले बनें। केवल समस्याओं की शिकायत न करें, बल्कि उनके समाधान खोजें। उन्होंने कहा कि युवा तकनीक के उपभोक्ता नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी के क्रिएटर बनें। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी, स्पेस टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसी उभरती तकनीकें भारत के विकास की नई दिशा तय करेंगी और विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों के लिए तैयार कर रहा है।
कुलगुरु प्रो.सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने जीवन का बड़ा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और जिस भी क्षेत्र में जाएं, उत्कृष्टता हासिल करने का प्रयास करें। इंजीनियर देश की समस्याओं का समाधान खोजें, वैज्ञानिक मानवता के लिए उपयोगी अनुसंधान करें, उद्यमी रोजगार के नए अवसर पैदा करें और शिक्षक ज्ञान के साथ चरित्र निर्माण में भी योगदान दें।
कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की महानता केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र, सामाजिक जिम्मेदारी, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से तय होती है। इसलिए विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ चरित्र, क्षमता के साथ संवेदनशीलता तथा सफलता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
कुलगुरु प्रो.सिंह ने कहा कि डीसीआरयूएसटी को केवल अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र नहीं, बल्कि शोध, नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता का अग्रणी संस्थान बनाया जाएगा। विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के साथ-साथ संवैधानिक कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए। ईमानदारी, अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति समर्पण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
कुलगुरु प्रो.सिंह ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, जहां भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं अलग-अलग हैं, लेकिन हमारी पहचान एक है—हम भारतीय हैं। हमें एकता, भाईचारे और सामूहिक प्रयासों से भारत को विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवाओं की प्रतिभा, शिक्षकों की प्रतिबद्धता, वैज्ञानिकों की सोच और देशवासियों की सामूहिक शक्ति के बल पर भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र के रूप में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।
समारोह के अंत में कुलगुरु ने सभी से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा अपने ज्ञान, प्रतिभा और ऊर्जा को देश के विकास के लिए समर्पित करने का आह्वान किया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हम सब मिलकर ऐसा भारत बनाएं, जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व कर सकें। कार्यक्रम के अंत छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो.सुरेश वर्मा ने धन्यवाद किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा.अमित कुमार व शिक्षक उपस्थित थे।