हिंदी विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय

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आज दिनांक 18 जून 2026 को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा अप्रैल से जून तिमा...
18/06/2026

आज दिनांक 18 जून 2026 को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा अप्रैल से जून तिमाही कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में उत्तराखंड भाषा संस्थान के पूर्व सदस्य एवं प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. सुशील कोटनाला जी उपस्थित रहे।
कार्यशाला का शुभारंभ राजभाषा प्रकोष्ठ की समन्वयक प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार द्वारा किया गया। उन्होंने मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत करते हुए उन्हें शॉल, पुस्तक एवं राजभाषा स्मारिका भेंट कर सम्मानित किया तथा उनका स्वागत किया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. सुशील कोटनाला ने हिंदी भाषा के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न देशों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिस प्रकार अन्य राष्ट्र अपनी मातृभाषा को प्राथमिकता देते हैं, उसी प्रकार भारत में भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

अपने वक्तव्य में उन्होंने त्रिभाषा सूत्र की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए दैनिक एवं कार्यालयी कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से यथासंभव हिंदी में हस्ताक्षर करने का आग्रह किया। साथ ही भारत सरकार द्वारा राजभाषा कार्यान्वयन के लिए राज्यों को 'क', 'ख' एवं 'ग' श्रेणियों में विभाजित किए जाने की व्यवस्था की भी जानकारी दी।

डॉ. कोटनाला ने भाषा ज्ञान के बौद्धिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि शोधों से यह सिद्ध हुआ है कि यदि व्यक्ति कम से कम पाँच भाषाओं का ज्ञान रखता है, तो उसका मस्तिष्क लंबे समय तक सक्रिय एवं स्फूर्त बना रहता है। उन्होंने बहुभाषिकता को व्यक्तित्व विकास और बौद्धिक क्षमता के विस्तार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने कार्यालयी कार्यों में हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन तथा राजभाषा के रूप में हिंदी को और अधिक सशक्त बनाने के लिए आवश्यक उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की। उनके प्रेरणादायी विचारों ने उपस्थित समस्त कर्मचारियों को हिंदी के प्रयोग एवं संवर्धन के प्रति जागरूक और प्रेरित किया।

राजभाषा तिमाही कार्यशाला का समापन विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव डॉ. संजय ध्यानी द्वारा किया गया। उन्होंने डॉ. कोटनाला के वक्तव्य को अत्यंत प्रभावी बताते हुए कहा कि आज उनके द्वारा प्रस्तुत विचारों को पूर्णतः आत्मसात करते हुए दैनिक जीवन एवं कार्यालयी कार्यों में उनका प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा।

डॉ. ध्यानी ने समस्त विश्वविद्यालय परिवार की ओर से डॉ. कोटनाला का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए राजभाषा तिमाही कार्यशाला के समापन की घोषणा की। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न अनुभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय का राजभाषाई निरीक्षण सम्पन्न।श्रीनगर गढ़वाल, 16 अप्रैल 2026: विश्वविद्...
21/04/2026

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय का राजभाषाई निरीक्षण सम्पन्न।
श्रीनगर गढ़वाल, 16 अप्रैल 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की दो सदस्यीय निरीक्षण समिति ने आज हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल का औपचारिक राजभाषाई निरीक्षण किया।
समिति में यूजीसी के उपसचिव डॉ. जितेंद्र और अवर सचिव श्री लोकेश जांगड़ा निरीक्षक के रूप में शामिल रहे।चौरास परिसर के बैठक कक्ष में आयोजित इस निरीक्षण बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने की। बैठक की शुरुआत राजभाषा प्रकोष्ठ की समन्वयक प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार द्वारा सभी अतिथियों का परिचय एवं स्वागत के साथ हुई एवं समन्वयक द्वारा राजभाषा की संवैधानिक स्थिति पर प्रकाश डाला गया। माननीय कुलपति महोदय ने स्मृति चिह्न, पुष्पगुच्छ एवं शॉल भेंट कर समिति सदस्यों का हार्दिक स्वागत किया।
डॉ. जितेंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी भाषा और राजभाषा प्रकोष्ठ को सफल बनाने की जिम्मेदारी केवल किसी एक व्यक्ति या अध्यक्ष की नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्वविद्यालय की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि यूजीसी की सभी फाइलें अब डिजिटल माध्यम से हिंदी में भी तैयार की जाती हैं और दक्षिण भारत के कर्मचारी भी इनका अनुवाद कर हिंदी में फाइलें बनाते हैं। डॉ. जितेंद्र ने विश्वविद्यालय की बौद्धिक चेतना को नमन करते हुए सरस्वती का आह्वान किया और छात्रों को मेधावी बनने का आशीर्वाद दिया।
राजभाषा प्रकोष्ठ के अनुवादक श्री सूरज प्रसाद ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से राजभाषा प्रकोष्ठ के विजन, उद्देश्यों तथा अब तक आयोजित सभी तिमाही कार्यशालाओं, निरीक्षण और कार्यान्वयन बैठक समितियों की विस्तृत जानकारी साझा की। उपकुलसचिव डॉ संजय ध्यानी ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में राजभाषा के प्रयोग की स्थिति संबंधी जानकारी समिति के समक्ष रखी।
कुलपति जी ने कहा कि जब भी कोई हिंदी में थीसिस या पत्र आता है, तो उनका जवाब और हस्ताक्षर वे हमेशा हिंदी वर्तनी में ही करते हैं। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों का अभिनंदन किया। साथ ही, कुलपति जी ने आगे प्रस्ताव रखा कि राजभाषा प्रकोष्ठ की ओर से साल में दो बार ई-मैगजीन निकाली जाए, जिसमें शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी अपने लेख दें। प्रभावी लेखों को पुरस्कृत किया जाए तथा धीरे-धीरे इस ई-मैगजीन को जर्नल के रूप में विकसित किया जाए ताकि राजभाषा हिंदी का प्रचार-प्रसार बढ़े। उन्होंने पुस्तकालय अध्यक्ष को निर्देश दिए कि प्रशासनिक भवन में एक कॉर्नर पर हिंदी सेल्फ बनाने की आवश्यकता है जिसमें विविध विषयों संबंधी पुस्तकें रखी जाएँ। बैठक के अंत में कुलसचिव प्रो. वाई.पी. रैवानी जी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया और कहा कि निरीक्षण समिति के सदस्यों डॉ. जितेंद्र एवं श्री लोकेश जांगड़ा द्वारा दिए गए सुझावों पर विश्वविद्यालय अमल करेगा बैठक के बाद समिति ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सभी अनुभागों का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और उसके प्रभावी कार्यान्वयन की दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों को और मजबूत करने वाला साबित होगा।

उत्तराखंड भाषा संस्थान, देहरादून द्वारा आयोजित युवा कलमकार प्रतियोगिता 2025 में हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश...
01/04/2026

उत्तराखंड भाषा संस्थान, देहरादून द्वारा आयोजित युवा कलमकार प्रतियोगिता 2025 में हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है।
प्रतियोगिता के अंतर्गत यात्रा-वृत्तांत विधा में एम.ए. हिंदी चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र करन सिंह एवं कहानी विधा में छात्रा किरण पुरोहित को सम्मानित किया गया। दोनों ही विद्यार्थियों की इस उपलब्धि से विभाग में हर्ष का वातावरण है।
उत्तराखंड भाषा संस्थान, देहरादून द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार को उनके शैक्षिक योगदान और साहित्यिक सक्रियता के लिए सम्मानित किया गया।
विभाग के समस्त शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पुरस्कृत विद्यार्थियों को बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पुरस्कृत विद्यार्थियों का कहना है कि यह सफलता न केवल उनकी प्रतिभा का प्रमाण है, बल्कि समस्त गुरुजनों, विभागीय सुदृढ़ शैक्षिक वातावरण का भी प्रतिफल है।

आज दिनांक 30 मार्च 2026 को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग द्वार...
30/03/2026

आज दिनांक 30 मार्च 2026 को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग द्वारा “मास्टर सेशन (Master Session)” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था— “अपनी ऊर्जा को संतुलित करने और अपने व्यवसाय की संभावनाओं को निखारने के तरीके”।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि स्वागत के साथ हुआ। डॉ. अनूप सेमवाल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्य वक्ता सिमरन कौर (रेकी ग्रैंडमास्टर एवं लाइफ कोच) का स्वागत किया, जबकि डॉ. सविता मैठाणी ने शॉल ओढ़ाकर उन्हें सम्मानित किया।
इसके पश्चात विभागाध्यक्ष प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार, जो ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में जुड़ी थीं, ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को सकारात्मक ऊर्जा, आत्मअनुशासन एवं लक्ष्य के प्रति समर्पण का महत्व बताया।
मुख्य वक्ता सिमरन कौर ने अपने व्याख्यान के माध्यम से ऊर्जा संतुलन, मानसिक स्पष्टता एवं करियर विकास के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए एक हीलिंग सेशन (Healing Session) भी कराया, जिससे विद्यार्थियों को मानसिक शांति एवं आत्मविश्वास प्राप्त हुआ।
व्याख्यान के उपरांत आयोजित प्रश्न–उत्तर सत्र में शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक अपने प्रश्न पूछे तथा अपनी व्यक्तिगत एवं शैक्षणिक समस्याओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य वक्ता द्वारा टैरो रीडिंग (Taro Reading) की गई, जिसने विद्यार्थियों में विशेष उत्साह एवं जिज्ञासा उत्पन्न की। इस पूरे सत्र के दौरान छात्र-छात्राएं अत्यंत उत्साहित एवं प्रेरित नजर आए।
कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी तृप्ति ढाका एवं मुरारी कुमार गुप्ता द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. आकाशदीप, डॉ. सविता मैठाणी, डॉ गौरीश नंदनी काला सहित हिंदी विभाग के शोधार्थी शुभम थपलियाल, शिवानी मैखुरी, अरुणेश सिंह, प्रमोद उनियाल, सोनिया बहुगुणा, दिवाकर साहू, प्रियंका, पंकज सिंह, शालू जोशी, शालिनी गुसाईं, नितिन चौहान तथा एम.ए. एवं बी.ए. के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
अंत में डॉ. अनूप सेमवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता, विभागाध्यक्ष, विद्यार्थियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के  हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के द्वारा मास्टर स...
29/03/2026

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के द्वारा मास्टर सेशन का आयोजन दिनांक 30/03/2026 को प्रातः 10:00 बजे ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों माध्यमों से सुनिश्चित किया गया है।
आप सभी की गरिमामयी उपस्थिति अपेक्षित है🌸🌸
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बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित, हिंदी के प्रसार पर दिया जोर                                   ...
19/03/2026

बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित, हिंदी के प्रसार पर दिया जोर
दिनांक 17 मार्च 2026 को संपर्क भाषा हिंदी के प्रसार तथा बैंक की ब्रांड दृश्यता बढ़ाने के उद्देश्य से बैंक ऑफ़ बड़ौदा, क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून द्वारा “बड़ौदा मेधावी विद्यार्थी सम्मान योजना” के अंतर्गत सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। सम्मान समारोह में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल के सत्र 2024–25 में एम.ए. (हिंदी) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर डी.ए.वी. पीजी कॉलेज, देहरादून के छात्र श्री भारत भूषण पुरोहित को प्रथम स्थान प्राप्त करने पर ₹11000 की पुरस्कार राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। वहीं, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर परिसर की हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की छात्रा सुश्री साक्षी पाण्डेय को द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर ₹7500 की पुरस्कार राशि एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
समारोह में बैंक ऑफ़ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून के उपमहाप्रबंधक श्री अरविन्द जोशी एवं सहायक महाप्रबंधक श्री पुनित चुघ ने विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र एवं चेक प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी भाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना बैंक की प्राथमिकताओं में शामिल है।
इस अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर गुड्डी बिष्ट पंवार ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल, उत्तराखंड के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की श...
19/03/2026

हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल, उत्तराखंड के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की शोध छात्रा कुमारी रेशमा की पीएच.डी. खुली मौखिकी परीक्षा दिनांक 29 दिसंबर 2025 को सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह शोध "कवि चन्द्रकुंवर बर्त्वाल के काव्य में प्रकृति, समाज एवं राष्ट्रीय चेतना" विषय पर पूर्ण किया गया। यह शोध कार्य हिंदी विभाग की संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार के निर्देशन में सम्पन्न हुआ।

आयोजित मौखिकी परीक्षा में प्रो.संतराम वैश्य, गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय, हरिद्वार के वरिष्ठ विद्वान बाह्य विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहें। उन्होंने शोधार्थी से शोध विषय से संबंधित विविध प्रश्न, शोध पद्धति, संदर्भ ग्रंथों, निष्कर्षों एवं शोध की प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की। उनके प्रश्नों के उत्तर शोधार्थी ने संतुलित, तर्कपूर्ण एवं आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किए।

अपने प्रस्तुतीकरण में शोध छात्रा कुमारी रेशमा ने कवि चन्द्रकुंवर बर्त्वाल के काव्य में प्रकृति, समाज एवं राष्ट्रीय चेतना विषय पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। प्रस्तुत शोध में कवि चन्द्रकुंवर बर्त्वाल के काव्य में प्रकृति, समाज एवं राष्ट्रीय चेतना विषय के समग्र पक्ष को प्रकृति, समाज के भीतर प्रगतिवादी मूल्य व राष्ट्रीय चेत‌ना के सशक्त पक्ष के रूप में सामने लाया गया है।
छायावाद, प्रगतिवाद‌ में तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक सभी प्रवृत्तियों व शैलीगत विशेषताओं का संपूर्ण विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है।

बाह्य विशेषज्ञ प्रो.संतराम वैश्य ने शोध की प्रासंगिकता, विषय की महत्ता एवं शोधार्थी की विश्लेषणात्मक दृष्टि की सराहना करते हुए इसे काव्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया। यह शोध हिंदी साहित्य में क्षेत्रीय योगदानों को मुख्यधारा में लाने का महत्व रखता है, जो साहित्यिक विविधता को बढ़ावा देगा।

इस अवसर पर शोध निर्देशक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार ने शोध छात्रा कुमारी रेशमा के शोध कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि छात्रा का अपने विषय के प्रति समर्पण, गंभीर अध्ययन एवं अनुसंधान के प्रति निष्ठा अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह शोध भविष्य में साहित्य के अध्येताओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगा तथा कवि चन्द्रकुंवर बर्त्वाल के काव्य को राष्ट्रीय फलक पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। अंत में शोधर्थिनी ने अपने शोध निर्देशक, बाह्य विशेषज्ञ, विभाग के समस्त प्राध्यापकों, शोधार्थियों तथा विश्वविद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।

हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की शोध छात्रा व...
05/03/2026

हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की शोध छात्रा वर्षा पाल की पीएच.डी. खुली मौखिकी दिनांक 13 नवंबर 2024 को सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
उनका शोध विषय “समकालीन परिप्रेक्ष्य में कुंवर नारायण के आख्यान काव्य का विवेचनात्मक अध्ययन” था। यह शोध डी. ए. वी., पी. जी. कॉलेज, हिंदी विभाग में शोध निर्देशिका डॉ निशा वालिया के निर्देशन में पूर्ण हुआ। शोध मौखिकी परीक्षा की अध्यक्षता हिंदी संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार ने किया।
शोध मौखिकी में पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय, कोलकाता के विभागाध्यक्ष प्रो अरुण होता बाह्य विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने शोधार्थी से शोध विषय, शोध पद्धति, संदर्भ ग्रंथों, निष्कर्षों तथा शोध की प्रासंगिकता से संबंधित विविध प्रश्न पूछे। शोधार्थी वर्षा पाल ने सभी प्रश्नों के उत्तर संतुलित, तर्कपूर्ण एवं आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किए।
अपने शोध प्रस्तुतीकरण में शोधार्थी ने कुंवर नारायण के आख्यान काव्य की समकालीन प्रासंगिकता के महत्वपूर्ण बिंदुओं को विस्तार से विवेचित किया। साथ ही वर्तमान समय में कुंवर नारायण के आख्यान काव्य की प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला।
शोधार्थी ने अपने अध्ययन में कुंवर नारायण की प्रमुख कृतियों— चक्रव्यूह (1956), परिवेश हम तुम (1961), अपने सामने(1979), कोई दूसरा नहीं (1993), इन दिनों (2002), खंडकाव्य- आत्मजयी (1965), वाजश्रवा के बहाने (2008), आदि का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया।
बाह्य विशेषज्ञ प्रो अरुण होता ने शोध की प्रासंगिकता, विषय की महत्ता तथा शोधार्थी की विश्लेषणात्मक दृष्टि की सराहना करते हुए इसे कुंवर नारायण के आख्यान काव्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया।
इस अवसर पर शोध निर्देशक डॉ निशा वालिया एवं विभागाध्यक्ष प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार ने शोध छात्रा वर्षा पाल के परिश्रम, समर्पण और अनुसंधान के प्रति उनकी निष्ठा की प्रशंसा की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह शोध भविष्य में कुंवर नारायण के काव्य के अध्येताओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
अंत में संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो० गुड्डी बिष्ट पंवार ने बाह्य विशेषज्ञ प्रो. अरुण होता, डॉ निशा वालिया, विभाग के समस्त प्राध्यापकों, शोधार्थीयों तथा विश्वविद्यालय परिवार का धन्यवाद व्यक्त किया।

हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के शोध छात्र नव...
02/03/2026

हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के शोध छात्र नवनीत की पीएच.डी. खुली मौखिकी परीक्षा दिनांक 24 सितंबर 2024 को सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
यह शोध “नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों में लोकजीवन के विविध आयाम” विषय पर पूर्ण किया गया। यह शोध विभाग की संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार के निर्देशन में सम्पन्न हुआ।
आयोजित मौखिकी परीक्षा में वरिष्ठ विदुषी प्रो. मृदुल जोशी, विभागाध्यक्ष हिंदी, गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय, हरिद्वार बाह्य विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने शोधार्थी से शोध विषय से संबंधित विविध प्रश्न, शोध पद्धति, संदर्भ ग्रंथों, निष्कर्षों एवं शोध की प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की। उनके प्रश्नों के उत्तर शोधार्थी ने संतुलित, तर्कपूर्ण एवं आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किए।
अपने प्रस्तुतीकरण में शोध छात्र नवनीत ने नरेंद्र सिंह नेगी के लोकगीतों के रचनात्मक, राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक वैचारिक पक्षों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। शोध में लोकगीतों की मौखिक एवं लिखित परंपराओं के अंतर्गत आध्यात्मिकता, प्रकृति चित्रण, नारी जीवन, विभिन्न पीढ़ियों का जीवन, पलायन की समस्या तथा पहाड़ की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का विस्तृत विवेचन किया गया है।
शोध में यह दर्शाया गया है कि नरेंद्र सिंह नेगी के गीत गढ़वाल की सामूहिक चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और ऐतिहासिक स्मृति के वाहक हैं।
शोधार्थी द्वारा गीतकार नरेंद्र सिंह नेगी की खुचकण्डि (खुली हुई कण्डि) 1991, गांण्यों की गंगा स्यांण्यों का समोदर (कल्पनाओं की गंगा लालसा का समुद्र) 1999, मुट्ट बोटी की रख (मुट्ठी बंद करके रखना अर्थात तैयार रहना) 2002, तेरी खुद तेरो ख्याल (तेरी याद और तेरे विचार) 2010, तुम दगड़ि ये गीत राला (तुम्हारे साथ ये गीत रहेंगे) 2023, आदि किताबें ली गई हैं।
बाह्य विशेषज्ञ प्रो. मृदुल जोशी ने शोध की प्रासंगिकता, विषय की महत्ता एवं शोधार्थी की विश्लेषणात्मक दृष्टि की सराहना करते हुए इसे लोकसाहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि इस शोध को शीघ्र ही पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर शोध निर्देशक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार ने शोध छात्र नवनीत के शोध कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि छात्र का अपने विषय के प्रति समर्पण, गंभीर अध्ययन एवं अनुसंधान के प्रति निष्ठा अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह शोध भविष्य में लोक साहित्य के अध्येताओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगा तथा क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में सहायक बनेगा।

हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय में शोधार्थी रोशन प्रसाद की शोध मौखिकी 21 जुलाई 2025 को संपन्न हुई ।...
02/03/2026

हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय में शोधार्थी रोशन प्रसाद की शोध मौखिकी 21 जुलाई 2025 को संपन्न हुई ।
हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में शोधार्थी रोशन प्रसाद की शोध मौखिकी दिनांक 21 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक संपन्न हुई। शोधार्थी द्वारा प्रस्तुत शोध-विषय “ममता कालिया के कथा साहित्य का वस्तु एवं शिल्पनिष्ठ अनुशीलन” पर आयोजित मौखिकी परीक्षा शैक्षणिक गरिमा के साथ संपन्न हुई। शोध-कार्य का निर्देशन प्रो. मंजुला राणा ने किया।
उक्त शोध मौखिकी में बाह्य परीक्षक के रूप में प्रो. अशोक कुमार सब्रवाल, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ की गरिमामयी उपस्थिति रही। शोध मौखिकी परीक्षा की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार ने की।
प्रस्तुत शोध-प्रबंध में प्रख्यात कथाकार ममता कालिया के कथा-साहित्य का वस्तु और शिल्प की दृष्टि से विश्लेषणात्मक एवं मूल्यांकनपरक अध्ययन किया गया है। शोधार्थी ने कथाओं में मध्यवर्गीय जीवन-संघर्ष, नारी-चेतना, सामाजिक यथार्थ तथा भाषा-शैली की विशेषताओं का गहन अनुशीलन प्रस्तुत किया। साथ ही कथ्य और शिल्प के अंतर्संबंधों को आलोचनात्मक दृष्टि से स्पष्ट किया।
मौखिक परीक्षा के दौरान शोधार्थी ने बाह्य परीक्षक के प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर दिया। बाह्य परीक्षक ने शोध-कार्य की सराहना करते हुए उपाधि प्रदान करने की संस्तुति की। हिंदी विभाग परिवार ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए शोधार्थी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार ने बाह्य परीक्षक प्रो. अशोक कुमार सब्रवाल, विभाग के समस्त प्राध्यापकों, शोधार्थियों तथा विश्वविद्यालय परिवार का धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में शोधार्थी रोशन प्रसाद ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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