18/06/2026
आज दिनांक 18 जून 2026 को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा अप्रैल से जून तिमाही कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में उत्तराखंड भाषा संस्थान के पूर्व सदस्य एवं प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. सुशील कोटनाला जी उपस्थित रहे।
कार्यशाला का शुभारंभ राजभाषा प्रकोष्ठ की समन्वयक प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार द्वारा किया गया। उन्होंने मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत करते हुए उन्हें शॉल, पुस्तक एवं राजभाषा स्मारिका भेंट कर सम्मानित किया तथा उनका स्वागत किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. सुशील कोटनाला ने हिंदी भाषा के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न देशों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिस प्रकार अन्य राष्ट्र अपनी मातृभाषा को प्राथमिकता देते हैं, उसी प्रकार भारत में भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
अपने वक्तव्य में उन्होंने त्रिभाषा सूत्र की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए दैनिक एवं कार्यालयी कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से यथासंभव हिंदी में हस्ताक्षर करने का आग्रह किया। साथ ही भारत सरकार द्वारा राजभाषा कार्यान्वयन के लिए राज्यों को 'क', 'ख' एवं 'ग' श्रेणियों में विभाजित किए जाने की व्यवस्था की भी जानकारी दी।
डॉ. कोटनाला ने भाषा ज्ञान के बौद्धिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि शोधों से यह सिद्ध हुआ है कि यदि व्यक्ति कम से कम पाँच भाषाओं का ज्ञान रखता है, तो उसका मस्तिष्क लंबे समय तक सक्रिय एवं स्फूर्त बना रहता है। उन्होंने बहुभाषिकता को व्यक्तित्व विकास और बौद्धिक क्षमता के विस्तार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने कार्यालयी कार्यों में हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन तथा राजभाषा के रूप में हिंदी को और अधिक सशक्त बनाने के लिए आवश्यक उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की। उनके प्रेरणादायी विचारों ने उपस्थित समस्त कर्मचारियों को हिंदी के प्रयोग एवं संवर्धन के प्रति जागरूक और प्रेरित किया।
राजभाषा तिमाही कार्यशाला का समापन विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव डॉ. संजय ध्यानी द्वारा किया गया। उन्होंने डॉ. कोटनाला के वक्तव्य को अत्यंत प्रभावी बताते हुए कहा कि आज उनके द्वारा प्रस्तुत विचारों को पूर्णतः आत्मसात करते हुए दैनिक जीवन एवं कार्यालयी कार्यों में उनका प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा।
डॉ. ध्यानी ने समस्त विश्वविद्यालय परिवार की ओर से डॉ. कोटनाला का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए राजभाषा तिमाही कार्यशाला के समापन की घोषणा की। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न अनुभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।