VCSG Government Medical College, Srinagar Uttarakhand

VCSG Government Medical College, Srinagar Uttarakhand

first Government Medical college in uttarakhand

18/08/2026

*19/ 08/2026 बुधवार* बेस अस्पताल में ओपीडी--

*मेडिसिन* 106 डॉ. जैनेश कुमार, डॉ. रंजीत यादव

*सर्जरी* 108 डॉ. लक्ष्मण, डॉ. कमल, डॉ. निखिल

*अस्थि रोग** 124/125 डॉ. डीके टम्टा डॉ. सार्थक तोमर

*दंत रोग* 150 डॉ अरुण के. गोयल, डॉ शिवानी, डॉ दिव्यांशु

*नेत्र रोग* 134 डॉ..एन.पाण्डेय, डॉ सिद्धार्थ

*मनोचिकित्सा* 136 डॉ. श्वेता कृष्णा, डॉ. ख्याति

*ई.एन. टी.* 221 डॉ. शुभम, डॉ. शिखा

*त्वचा रोग* 233 डॉ. आत्रेय डॉ नमित डॉ स्वाति डॉ दीक्षा डॉ तुलिका

*स्त्री रोग एवं प्रसूति* 220 डॉ. नेहा दोशाद

*बाल रोग* 213 डॉ सीएम शर्मा, डॉ. अंकिता गिरी

*कैंसर रोग* 206 डॉ. इंदिरा यादव

*टी0 बी0-चेस्ट* 134 डॉ. विशेष किशोर सिंह

समाचार पत्रों के माध्यम से.. शिशु स्वास्थ्य..
18/08/2026

समाचार पत्रों के माध्यम से.. शिशु स्वास्थ्य..

17/08/2026

18 अगस्त 2026 मंगलवार — ओपीडी में उपलब्ध चिकित्सक
जनता की सुविधा हेतु आवश्यक सूचना
18 अगस्त 2026 (मंगलवार) को विभिन्न विभागों की ओपीडी में निम्न चिकित्सक मरीजों को चिकित्सा परामर्श देंगे।
🏥 विभागवार ओपीडी
मेडिसिन — कक्ष 106
डॉ. लीना, डॉ. फ्लोरेंस एवं डॉ. नम्रता
सर्जरी — कक्ष 108
डॉ. राकेश रावत, डॉ. स्वाती एवं डॉ. हेमंत
न्यूरो सर्जरी — कक्ष 110
डॉ. प्रभात पुरोहित एवं डॉ. गौरव
अस्थि रोग — कक्ष 124/125
डॉ. सुभाष चन्द्र एवं डॉ. शुभ्रांशु सोनी
दंत रोग — कक्ष 150
डॉ. अरुण के. गोयल, डॉ. शिवानी एवं डॉ. दिव्यांशु
नेत्र रोग — कक्ष 134
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए.एन. पाण्डेय, डॉ. सिद्धार्थ एवं डॉ. जिज्ञासा
टी.बी.-चेस्ट — कक्ष 134
डॉ. अनुराग अग्रवाल एवं डॉ. विशेष किशोर सिंह
मनोचिकित्सा — कक्ष 136
डॉ. पार्थ दत्ता
स्त्री रोग एवं प्रसूति — कक्ष 220
डॉ. दीपाली शर्मा
ई.एन.टी. — कक्ष 221
डॉ. निधि भारद्वाज एवं डॉ. आशीष असवाल
त्वचा रोग — कक्ष 233
डॉ. नमित, डॉ. स्वाती, डॉ. दीक्षा एवं डॉ. इशना
बाल रोग — कक्ष 213
डॉ. अंकिता गिरी
कैंसर रोग — कक्ष 206
डॉ. इंदिरा यादव

📌 मरीजों एवं तीमारदारों से अनुरोध है कि संबंधित विभाग के ओपीडी कक्ष में समय से पहुंचकर चिकित्सा परामर्श प्राप्त करें।
यह सूचना जनहित एवं मरीजों की सुविधा के लिए जारी की गई है।

🏥 जनता की जानकारी हेतु महत्वपूर्ण सूचना📅 17 अगस्त 2026, सोमवार विभिन्न विभागों की ओपीडी में उपलब्ध रहेंगे चिकित्सकजनसामा...
16/08/2026

🏥 जनता की जानकारी हेतु महत्वपूर्ण सूचना

📅 17 अगस्त 2026, सोमवार विभिन्न विभागों की ओपीडी में उपलब्ध रहेंगे चिकित्सक
जनसामान्य को सूचित किया जाता है कि सोमवार, 17 अगस्त 2026 को अस्पताल के विभिन्न विभागों की ओपीडी में निम्न चिकित्सक मरीजों को परामर्श एवं उपचार की सुविधा प्रदान करेंगे। मरीज अपनी बीमारी से संबंधित विभाग में निर्धारित कक्ष में पहुंचकर चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त कर सकते हैं।
🔹 मेडिसिन विभाग — कक्ष संख्या 106
डॉ. रंजीत यादव एवं डॉ. जननेश
🔹 सर्जरी विभाग — कक्ष संख्या 108
डॉ. धनंजय डोभाल एवं डॉ. विवेक यादव
🔹 न्यूरो सर्जरी विभाग — कक्ष संख्या 110
डॉ. प्रभात एवं डॉ. गौरव भट्ट
🔹 अस्थि रोग विभाग — कक्ष संख्या 124/125
डॉ. डी.के. टम्टा एवं डॉ. सार्थक तोमर
🔹 दंत रोग विभाग — कक्ष संख्या 150
डॉ. अरुण के. गोयल, डॉ. शिवानी दार्जी एवं डॉ. दिव्यांशु
🔹 नेत्र रोग विभाग — कक्ष संख्या 134
डॉ. ए.एन. पाण्डेय एवं डॉ. जिज्ञासा
🔹 मनोचिकित्सा विभाग — कक्ष संख्या 136
डॉ. मोहित सैनी एवं डॉ. मृणाल
🔹 ई.एन.टी. विभाग — कक्ष संख्या 221
डॉ. शुभम एवं डॉ. फिरोज खान
🔹 त्वचा रोग विभाग — कक्ष संख्या 233
डॉ. आत्रेय, डॉ. स्वाति, डॉ. अनुभव, डॉ. दीक्षा, डॉ. ईशना एवं डॉ. नाज़िया
🔹 स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग — कक्ष संख्या 220
डॉ. निधि बहुगुणा
🔹 बाल रोग विभाग — कक्ष संख्या 213
डॉ. सी.एम. शर्मा
🔹 कैंसर रोग विभाग — कक्ष संख्या 206
डॉ. इंदिरा यादव
🔹 टी.बी.-चेस्ट विभाग — कक्ष संख्या 134
डॉ. विशेष
📢 जनहित में अपील:
मरीज एवं उनके परिजन अपनी बीमारी से संबंधित विभाग की ओपीडी में निर्धारित कक्ष में पहुंचकर चिकित्सक से परामर्श लें। अस्पताल में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मरीजों को बेहतर चिकित्सा परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वस्थ रहें • जागरूक रहें • समय पर चिकित्सकीय परामर्श लें 🏥

बेहतर इलाज पर डाक्टरों एंव स्टाफ के आभार पत्र..
16/08/2026

बेहतर इलाज पर डाक्टरों एंव स्टाफ के आभार पत्र..

25 सप्ताह में जन्मा 700 ग्राम का नन्हा योद्धा, बेस अस्पताल ने दी जिंदगी की नई सांसवक्त से पहले जन्मे नन्हों के लिए जीवन ...
16/08/2026

25 सप्ताह में जन्मा 700 ग्राम का नन्हा योद्धा, बेस अस्पताल ने दी जिंदगी की नई सांस

वक्त से पहले जन्मे नन्हों के लिए जीवन की उम्मीद बना बेस अस्पताल का नीक्कू वार्ड

25-30 सप्ताह में जन्मे कई नवजातों का नीक्कू वार्ड में हो रहा सफल उपचार



अपरिपक्व फेफड़ों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के बीच डॉक्टरों ने चुनौती को बनाया कामयाबी



श्रीनगर। सामान्य गर्भावस्था में जहां शिशु करीब 39 से 40 सप्ताह में जन्म लेता है, वहीं समय से काफी पहले दुनिया में आने वाले नवजातों के लिए जिंदगी की पहली सांस से ही संघर्ष शुरू हो जाता है। फेफड़े पूरी तरह विकसित न होने, संक्रमण से लड़ने की क्षमता बेहद कम होने और कई अंगों के अपरिपक्व रहने के कारण ऐसे बच्चों को बचाना चिकित्सकों के लिए भी बड़ी चुनौती होता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस चिकित्सालय श्रीनगर का बाल रोग विभाग और नीक्कू वार्ड ऐसे ही नाजुक नवजातों के लिए जीवन की उम्मीद बनकर सामने आया है।

बेस चिकित्सालय के नीक्कू वार्ड में पिछले एक वर्ष के दौरान 25 से 30 सप्ताह के बीच जन्मे कई बेहद कम वजन वाले नवजातों का उपचार किया गया है। इनमें से कुछ नवजात रुद्रप्रयाग जनपद से गंभीर हालत में रेफर होकर यहां पहुंचे। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी, वेंटिलेटर सपोर्ट, आवश्यक दवाओं, पोषण प्रबंधन और संक्रमण से बचाव के प्रयासों से कई नवजातों को नया जीवन मिला है। रुद्रप्रयाग के पुनाड़ क्षेत्र निवासी अल्पना नौटियाल के लिए 16 जून का दिन चिंता और भय से भरा था। अल्पना की डिलीवरी महज 25 सप्ताह में हो गई। समय से करीब 14-15 सप्ताह पहले जन्मे इस नवजात का वजन केवल 700 ग्राम था। जन्म के बाद बच्चे की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। उसे बेहतर उपचार के लिए बेस चिकित्सालय के नीक्कू वार्ड में भर्ती कराया गया। करीब दो माह तक चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। धीरे-धीरे उसका वजन बढ़कर 1300 ग्राम हो गया और वह मां का दूध भी पीने लगा। बच्चे की हालत स्थिर होने पर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अपने नवजात को स्वस्थ अवस्था में घर ले जाने का समय आया तो मां अल्पना की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने बाल रोग विभाग के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि अस्पताल में सभी ने उनके बच्चे को अपने बच्चे की तरह संभाला और उपचार किया।
दूसरे मामले में रुद्रप्रयाग जनपद के पीएचसी बसुकेदार में तैनात चिकित्सक डॉ. कृतिका की डिलीवरी 27 सप्ताह में सीएचसी अगस्त्यमुनि में हुई। समय से पहले जन्म लेने के कारण नवजात की हालत गंभीर थी। बेहतर उपचार के लिए बच्चे को बेस चिकित्सालय श्रीनगर रेफर किया गया। 24 जुलाई से नीक्कू वार्ड में भर्ती नवजात का चिकित्सकों ने उपचार किया और उसकी हालत में सुधार आया। बच्चे के स्वस्थ होने पर परिजनों ने बेस चिकित्सालय के बाल रोग विभाग और नर्सिंग स्टाफ का आभार जताया। डॉ. कृतिका के पति एवं डिप्टी कमांडेंट ऋषभ बिष्ट ने कहा कि नीक्कू वार्ड में नवजात को लगातार बेहतर चिकित्सकीय सेवाएं मिलीं। उन्होंने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि गंभीर स्थिति में बच्चे को यहां जिस तरह की देखभाल मिली, उससे परिवार को बड़ी राहत मिली।
इसी तरह रुद्रप्रयाग जिले से आई विनीता की भी प्री-मैच्योर डिलीवरी हुई। उनका नवजात 20 जुलाई से नीक्कू वार्ड में भर्ती हुआ जो ठीक होकर घर चला गया।
वहीं 30 जुलाई को रुद्रप्रयाग से रेफर होकर आई ललिता ने 28 सप्ताह में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। दोनों नवजात बेहद नाजुक अवस्था में थे। दुर्भाग्यवश एक नवजात ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे नवजात का नीक्कू वार्ड में उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया।
बेस चिकित्सालय के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सीएम शर्मा के नेतृत्व में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी, सीनियर रेजीडेंट डॉ. अजय गोस्वामी सहित पीजी डॉक्टरों और नीक्कू वार्ड के नर्सिंग स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण रही। पीजी डॉक्टरों में डॉ. महेश, डॉ. धीरज, डॉ. दानिश, डॉ. जाहिद, डॉ. अंजलि एवं डॉ. आशीष के साथ ही नीक्कू वार्ड की इंचार्ज विजय फोनिया के साथ साहिबा, नेहा, सुमन, श्वेता, पंकज, सोमती, मनीष और सानवी सहित नर्सिंग स्टाफ ने नवजातों की देखभाल में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बेस अस्पताल का नीक्कू वार्ड अब केवल गंभीर नवजातों के उपचार का केंद्र नहीं, बल्कि समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों और उनके परिजनों के लिए उम्मीद, भरोसे और नई जिंदगी की एक मजबूत किरण बनता जा रहा है।
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अल्पना के बच्चे को मिला ‘नीक्कू ग्रेजुएट’ का खिताब-

करीब दो महीने तक नीक्कू वार्ड में उपचार के बाद जब अल्पना का नवजात स्वस्थ होकर घर जाने के लिए तैयार हुआ तो बाल रोग विभाग के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने इस पल को यादगार बना दिया। बच्चे को ‘नीक्कू ग्रेजुएट’ का खिताब दिया गया। नवजात को कैप और हुड पहनाकर बधाई दी गई तथा नीक्कू वार्ड में केक काटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया गया। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के इस आत्मीय व्यवहार से बच्चे के पिता और दादी भी भावुक हो गए। परिजनों ने कहा कि डॉक्टरों ने उनके लिए केवल इलाज ही नहीं किया, बल्कि मुश्किल समय में परिवार का हौसला भी बढ़ाया। उन्होंने चिकित्सकों को बधाई देते हुए कहा कि बेस अस्पताल की टीम ने उनके घर की खुशियां वापस लौटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


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निजी अस्पताल में लाखों का खर्च, बेस अस्पताल में नि:शुल्क उपचार

प्रो. सीएम शर्मा ने कहा कि अत्यंत प्री-मैच्योर नवजातों को लंबे समय तक वेंटिलेटर, विशेष दवाओं, मॉनिटरिंग और विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। निजी अस्पतालों में ऐसे उपचार पर परिवार को 15 से 20 लाख रुपये तक का खर्च उठाना पड़ सकता है। इसके विपरीत बेस चिकित्सालय में पात्र मरीजों को सरकारी व्यवस्था के तहत उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। उन्होंने कहा कि नीक्कू वार्ड की पूरी टीम का प्रयास है कि गंभीर अवस्था में आने वाले प्रत्येक नवजात को समय पर विशेषज्ञ उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने बाल रोग विभाग के चिकित्सकों एवं नीक्कू वार्ड के पूरे स्टाफ को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। वहीं नीक्कू वार्ड में अपने बच्चों को स्वस्थ होकर घर ले जाने वाले लोगों ने डॉक्टरों के आभार में पत्र लिखकर दिये है। जो बोर्ड पर लगाये गये है।

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""समय से पहले प्रसव के जोखिम को कम करने के लिए गर्भवती महिला को नियमित प्रसवपूर्व जांच करानी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर अल्ट्रासाउंड व आवश्यक जांच कराएं, पौष्टिक आहार लें, पर्याप्त आराम करें और किसी भी तरह के संक्रमण या असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें। पेट में लगातार दर्द, कमर में खिंचाव, पानी आना, रक्तस्राव या नियमित अंतराल पर संकुचन महसूस हों तो तुरंत अस्पताल पहुंचें। गर्भावस्था के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें। समय पर जांच और सही चिकित्सा सलाह से प्री-मैच्योर डिलीवरी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।। --- डॉ दीप्ति शर्मा, अस्सिटेंट प्रोफेसर, गायनी विभाग बेस अस्पताल।

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25 से 30 सप्ताह में जन्मे नवजातों को बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे बच्चों के फेफड़े और अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते तथा संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। नीक्कू वार्ड की पूरी टीम ने बेहतर चिकित्सकीय प्रबंधन, लगातार निगरानी और परिजनों के सहयोग से इन नन्ही जिंदगियों को बचाने का प्रयास किया। 25 सप्ताह में जन्मे 700 ग्राम के शिशु को स्वस्थ कर घर भेजना पूरी टीम के लिए बेहद संतोष का क्षण है।----- डॉ सीएम शर्मा, एचओडी बाल रोग विभाग।

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“प्री-मैच्योर नवजातों को नया जीवन देना बेस अस्पताल की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं और चिकित्सकीय टीम की समर्पित मेहनत का परिणाम है। इस उपलब्धि के लिए टीम बाल रोग विभाग, टीम नीक्कू वार्ड के चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ को बधाई। संस्थान व हर विभाग की प्राथमिकता मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है।”
------डॉ. सीएमएस रावत, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर।

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16/08/2026

नन्हे की सेहत लौटी… तो माता की आंखों में खुशी छलक पड़ी। ❤️

16/08/2026

25 सप्ताह में जन्मा 700 ग्राम का नन्हा योद्धा, बेस अस्पताल ने दी जिंदगी की नई सांस

वक्त से पहले जन्मे नन्हों के लिए जीवन की उम्मीद बना बेस अस्पताल का नीक्कू वार्ड

25-30 सप्ताह में जन्मे कई नवजातों का नीक्कू वार्ड में हो रहा सफल उपचार



अपरिपक्व फेफड़ों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के बीच डॉक्टरों ने चुनौती को बनाया कामयाबी



श्रीनगर। सामान्य गर्भावस्था में जहां शिशु करीब 39 से 40 सप्ताह में जन्म लेता है, वहीं समय से काफी पहले दुनिया में आने वाले नवजातों के लिए जिंदगी की पहली सांस से ही संघर्ष शुरू हो जाता है। फेफड़े पूरी तरह विकसित न होने, संक्रमण से लड़ने की क्षमता बेहद कम होने और कई अंगों के अपरिपक्व रहने के कारण ऐसे बच्चों को बचाना चिकित्सकों के लिए भी बड़ी चुनौती होता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस चिकित्सालय श्रीनगर का बाल रोग विभाग और नीक्कू वार्ड ऐसे ही नाजुक नवजातों के लिए जीवन की उम्मीद बनकर सामने आया है।

बेस चिकित्सालय के नीक्कू वार्ड में पिछले एक वर्ष के दौरान 25 से 30 सप्ताह के बीच जन्मे कई बेहद कम वजन वाले नवजातों का उपचार किया गया है। इनमें से कुछ नवजात रुद्रप्रयाग जनपद से गंभीर हालत में रेफर होकर यहां पहुंचे। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी, वेंटिलेटर सपोर्ट, आवश्यक दवाओं, पोषण प्रबंधन और संक्रमण से बचाव के प्रयासों से कई नवजातों को नया जीवन मिला है। रुद्रप्रयाग के पुनाड़ क्षेत्र निवासी अल्पना नौटियाल के लिए 16 जून का दिन चिंता और भय से भरा था। अल्पना की डिलीवरी महज 25 सप्ताह में हो गई। समय से करीब 14-15 सप्ताह पहले जन्मे इस नवजात का वजन केवल 700 ग्राम था। जन्म के बाद बच्चे की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। उसे बेहतर उपचार के लिए बेस चिकित्सालय के नीक्कू वार्ड में भर्ती कराया गया। करीब दो माह तक चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। धीरे-धीरे उसका वजन बढ़कर 1300 ग्राम हो गया और वह मां का दूध भी पीने लगा। बच्चे की हालत स्थिर होने पर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अपने नवजात को स्वस्थ अवस्था में घर ले जाने का समय आया तो मां अल्पना की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने बाल रोग विभाग के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि अस्पताल में सभी ने उनके बच्चे को अपने बच्चे की तरह संभाला और उपचार किया।
दूसरे मामले में रुद्रप्रयाग जनपद के पीएचसी बसुकेदार में तैनात चिकित्सक डॉ. कृतिका की डिलीवरी 27 सप्ताह में सीएचसी अगस्त्यमुनि में हुई। समय से पहले जन्म लेने के कारण नवजात की हालत गंभीर थी। बेहतर उपचार के लिए बच्चे को बेस चिकित्सालय श्रीनगर रेफर किया गया। 24 जुलाई से नीक्कू वार्ड में भर्ती नवजात का चिकित्सकों ने उपचार किया और उसकी हालत में सुधार आया। बच्चे के स्वस्थ होने पर परिजनों ने बेस चिकित्सालय के बाल रोग विभाग और नर्सिंग स्टाफ का आभार जताया। डॉ. कृतिका के पति एवं डिप्टी कमांडेंट ऋषभ बिष्ट ने कहा कि नीक्कू वार्ड में नवजात को लगातार बेहतर चिकित्सकीय सेवाएं मिलीं। उन्होंने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि गंभीर स्थिति में बच्चे को यहां जिस तरह की देखभाल मिली, उससे परिवार को बड़ी राहत मिली।
इसी तरह रुद्रप्रयाग जिले से आई विनीता की भी प्री-मैच्योर डिलीवरी हुई। उनका नवजात 20 जुलाई से नीक्कू वार्ड में भर्ती हुआ जो ठीक होकर घर चला गया।
वहीं 30 जुलाई को रुद्रप्रयाग से रेफर होकर आई ललिता ने 28 सप्ताह में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। दोनों नवजात बेहद नाजुक अवस्था में थे। दुर्भाग्यवश एक नवजात ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे नवजात का नीक्कू वार्ड में उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया।
बेस चिकित्सालय के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सीएम शर्मा के नेतृत्व में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी, सीनियर रेजीडेंट डॉ. अजय गोस्वामी सहित पीजी डॉक्टरों और नीक्कू वार्ड के नर्सिंग स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण रही। पीजी डॉक्टरों में डॉ. महेश, डॉ. धीरज, डॉ. दानिश, डॉ. जाहिद, डॉ. अंजलि एवं डॉ. आशीष के साथ ही नीक्कू वार्ड की इंचार्ज विजय फोनिया के साथ साहिबा, नेहा, सुमन, श्वेता, पंकज, सोमती, मनीष और सानवी सहित नर्सिंग स्टाफ ने नवजातों की देखभाल में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बेस अस्पताल का नीक्कू वार्ड अब केवल गंभीर नवजातों के उपचार का केंद्र नहीं, बल्कि समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों और उनके परिजनों के लिए उम्मीद, भरोसे और नई जिंदगी की एक मजबूत किरण बनता जा रहा है।
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अल्पना के बच्चे को मिला ‘नीक्कू ग्रेजुएट’ का खिताब-

करीब दो महीने तक नीक्कू वार्ड में उपचार के बाद जब अल्पना का नवजात स्वस्थ होकर घर जाने के लिए तैयार हुआ तो बाल रोग विभाग के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने इस पल को यादगार बना दिया। बच्चे को ‘नीक्कू ग्रेजुएट’ का खिताब दिया गया। नवजात को कैप और हुड पहनाकर बधाई दी गई तथा नीक्कू वार्ड में केक काटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया गया। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के इस आत्मीय व्यवहार से बच्चे के पिता और दादी भी भावुक हो गए। परिजनों ने कहा कि डॉक्टरों ने उनके लिए केवल इलाज ही नहीं किया, बल्कि मुश्किल समय में परिवार का हौसला भी बढ़ाया। उन्होंने चिकित्सकों को बधाई देते हुए कहा कि बेस अस्पताल की टीम ने उनके घर की खुशियां वापस लौटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


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निजी अस्पताल में लाखों का खर्च, बेस अस्पताल में नि:शुल्क उपचार

प्रो. सीएम शर्मा ने कहा कि अत्यंत प्री-मैच्योर नवजातों को लंबे समय तक वेंटिलेटर, विशेष दवाओं, मॉनिटरिंग और विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। निजी अस्पतालों में ऐसे उपचार पर परिवार को 15 से 20 लाख रुपये तक का खर्च उठाना पड़ सकता है। इसके विपरीत बेस चिकित्सालय में पात्र मरीजों को सरकारी व्यवस्था के तहत उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। उन्होंने कहा कि नीक्कू वार्ड की पूरी टीम का प्रयास है कि गंभीर अवस्था में आने वाले प्रत्येक नवजात को समय पर विशेषज्ञ उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने बाल रोग विभाग के चिकित्सकों एवं नीक्कू वार्ड के पूरे स्टाफ को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। वहीं नीक्कू वार्ड में अपने बच्चों को स्वस्थ होकर घर ले जाने वाले लोगों ने डॉक्टरों के आभार में पत्र लिखकर दिये है। जो बोर्ड पर लगाये गये है।

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""समय से पहले प्रसव के जोखिम को कम करने के लिए गर्भवती महिला को नियमित प्रसवपूर्व जांच करानी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर अल्ट्रासाउंड व आवश्यक जांच कराएं, पौष्टिक आहार लें, पर्याप्त आराम करें और किसी भी तरह के संक्रमण या असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें। पेट में लगातार दर्द, कमर में खिंचाव, पानी आना, रक्तस्राव या नियमित अंतराल पर संकुचन महसूस हों तो तुरंत अस्पताल पहुंचें। गर्भावस्था के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें। समय पर जांच और सही चिकित्सा सलाह से प्री-मैच्योर डिलीवरी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।। --- डॉ दीप्ति शर्मा, अस्सिटेंट प्रोफेसर, गायनी विभाग बेस अस्पताल।

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25 से 30 सप्ताह में जन्मे नवजातों को बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे बच्चों के फेफड़े और अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते तथा संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। नीक्कू वार्ड की पूरी टीम ने बेहतर चिकित्सकीय प्रबंधन, लगातार निगरानी और परिजनों के सहयोग से इन नन्ही जिंदगियों को बचाने का प्रयास किया। 25 सप्ताह में जन्मे 700 ग्राम के शिशु को स्वस्थ कर घर भेजना पूरी टीम के लिए बेहद संतोष का क्षण है।----- डॉ सीएम शर्मा, एचओडी बाल रोग विभाग।

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“प्री-मैच्योर नवजातों को नया जीवन देना बेस अस्पताल की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं और चिकित्सकीय टीम की समर्पित मेहनत का परिणाम है। इस उपलब्धि के लिए टीम बाल रोग विभाग, टीम नीक्कू वार्ड के चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ को बधाई। संस्थान व हर विभाग की प्राथमिकता मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है।”
------डॉ. सीएमएस रावत, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर।

--✍️✍️मनमोहन ...

Subodh Uniyal VCSG Government Medical College, Srinagar Uttarakhand

मेडिकल कॉलेज में धूमधाम से मनाया गया स्वतंत्रता दिवसश्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस...
15/08/2026

मेडिकल कॉलेज में धूमधाम से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह हर्षोल्लास और देशभक्ति के जज्बे के साथ मनाया गया। समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ सर्जन डॉ. एम.एन. गैरोला रहे। प्राचार्य डॉ. सी.एम.एस. रावत एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए.एन. पांडेय की मौजूदगी में ध्वजारोहण किया गया। इस दौरान राष्ट्रगान के साथ पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया।

इस मौके पर चिकित्सकों, मेडिकल स्टाफ, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों को नमन किया। कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं प्रेरक संबोधनों ने समारोह में उत्साह और उमंग भर दी।

मुख्य अतिथि डॉ. एम.एन. गैरोला ने अपने अनुभव साझा करते हुए युवा चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों को चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ कार्य करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है।

प्राचार्य डॉ. सी.एम.एस. रावत ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश की प्रगति में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी से अपने दायित्वों का ईमानदारी और समर्पण के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया।

समारोह के दौरान कॉलेज परिवार ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सेवा के संकल्प के साथ स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाया।
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✍️मनमोहन

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