Agri Clinic Agri Business Centre

Agri Clinic Agri Business Centre Nodal Officer Agri Clinic Agri Business Centre Scheme Govt. of India. Dr. Dhruv Raj Godara

02/12/2025

समस्या कहाँ है आओ चर्चा करें
DhruvRaj Godara

22/04/2025
www.101reporters.comलगभग 15 देशों में आज यह आर्टिकल धूम मचा रहा है।आप भी पड़े देखें सीखे और समझे??2006 मैं मौसम आधारित फ...
19/10/2023

www.101reporters.com
लगभग 15 देशों में आज यह आर्टिकल धूम मचा रहा है।
आप भी पड़े देखें सीखे और समझे??
2006 मैं मौसम आधारित फसल बीमा योजना।
2008 मे सौर ऊर्जा पंप योजना।
2010 में खजूर की खेती ।
उसके बाद में इस दशक का हमारा सबसे लेटेस्ट अच्छा और खेती और किसानों से जुड़ा हुआ अभिनव प्रयोग है।।
ड्रोन विमान अगले कुछ वर्षों में प्रत्येक किसान के खेत में खड़े दिखाई देंगे जिस प्रकार आज आपके पास ट्रैक्टर खड़े हैं।।

https://101reporters.com/article/business/Change_in_the_air_as_drones_aid_smart_farming_selfemployment_in_Rajasthan

एक स्व रोजगार के रूप में कैसे कम कर सकते हो।
इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।।
आपका
डॉ ध्रुव गोदारा
DhruvRaj Godara

Founder CEO Agri Drone Customer Hire Agri Clinic Agri Business Centre

Agri Drone Customer Hire Centre

24/08/2023

https://fb.watch/mCYKYKYMXh/?mibextid=Nif5oz
फॉर्म हाउस योजना क्या है पुरा सुने , सुनाए, दुसरे किसानों को बताए ।
सिर्फ़ वॉट्सएप नम्बर 9041778306 सिर्फ वॉट्सएप करे । फोन नहीं करे ।।

बीजोपचार एक लाभ अनेकबीजोपचार  क्या है ,कैसे करेंगे एवं क्यों महत्वपूर्ण है?डॉ ध्रुव राज गोदारा DhruvRaj Godara कृषि एक्स...
22/08/2023

बीजोपचार एक लाभ अनेक
बीजोपचार क्या है ,कैसे करेंगे एवं क्यों महत्वपूर्ण है?

डॉ ध्रुव राज गोदारा DhruvRaj Godara
कृषि एक्सपर्ट ( खजूर की खेती )

बहुत सारी फसलों के लिए नर्सरी तैयार करने की आवश्यकता होती है वही कुछ की सीधी बुवाई करते है। ऐसे में उन्हे पहले से कुछ जानकारी का होना आवश्यक है । बीज अनेक रोगाणु यथा कवक, जीवाणु, विषाणु व सूत्रकृमि आदि के वाहक होते हैं, जो भंडारित बीज एवं खेत में बोये गए बीज को नुकसान पहुंचाते हैं। इससेे बीज की गुणवत्ता एवं अंकुरण के साथ-साथ फसल की बढ़वार, रोग से लड़ने की क्षमता, उत्पादकता एवं उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस​लिए बीज भंडारण के पूर्व अथवा बोवाई के पूर्व जैविक या रासायनिक अथवा दोनों के द्वारा बीज का उपचार किया जाना जाना आवश्यक है। बीज उपचार से तात्पर्य बीजों पर फफूंदनाशी, कीटनाशक या दोनों के संयोजन से है, ताकि बीज-जनित या मिट्टी-जनित रोगजनक जीवों और भंडारण कीड़ों से उन्हें मुक्त किया जा सके। बीजोपचार को परिभाषित करना हो तो एक लाइन में कहा जा सकता है की बीजोपचार एक लाभ अनेक।बीज उपचार करने से निम्नलिखित लाभों को प्राप्त किया जाता है यथा
1) पौधों की बीमारियों के प्रसार को रोकता है
२) बीज को सड़न और अंकुरों के झुलसने से बचाता है
3) अंकुरण में सुधार होता है एवं पौध एक समान होते है
4) भंडारण कीड़ों से सुरक्षा प्रदान करता है
5) मिट्टी के कीड़ों को नियंत्रित करता है।
6) कम दवा का प्रयोग करके बहुत अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है

बीज उपचार के प्रकार
1) बीज विसंक्रमण
बीज विसंक्रमण से तात्पर्य फफूंद बीजाणुओं के उन्मूलन से है जो बीज आवरण के भीतर या अधिक गहरे बैठे ऊतकों में स्थापित हो गए हैं। प्रभावी नियंत्रण के लिए, कवकनाशी उपचार वास्तव में मौजूद कवक को मारने के लिए बीज में प्रवेश करना चाहिए या उन सतही जीवों के विनाश से है जिन्होंने बीज की सतह को दूषित कर दिया है लेकिन बीज की सतह को संक्रमित नहीं किया है। धूल, घोल या तरल के रूप में लगाए गए रासायनिक डुबकी, सोख, कवकनाशी सफल पाए गए हैं।

2) बीज संरक्षण
बीज संरक्षण का उद्देश्य बीज और युवा पौध को मिट्टी में ऐसे जीवों से बचाना है जो अन्यथा अंकुरण से पहले बीज के क्षय का कारण बन सकते हैं।

निम्नलिखित परिस्थितियों में अवश्य बीज का उपचार किया जाना चाहिए

1) घावग्रस्त बीज: बीज के बीज के आवरण में किसी भी प्रकार की टूटफूट कवक के लिए बीज में प्रवेश करने और या तो इसे मारने या इससे उत्पन्न होने वाले अंकुर को जगाने का एक उत्कृष्ट अवसर देता है। संयोजन और थ्रेसिंग के संचालन के दौरान, या अत्यधिक ऊंचाई से गिराए जाने से बीजों को यांत्रिक चोट लगती है। वे मौसम या अनुचित भंडारण से भी घायल हो सकते हैं।

2) रोगग्रस्त बीज: बीज फसल के समय भी रोग जीवों से संक्रमित हो सकता है, या प्रसंस्करण के दौरान संक्रमित हो सकता है, यदि दूषित मशीनरी पर संसाधित किया जाता है या दूषित कंटेनर या गोदामों में संग्रहीत किया जाता है।

3) अवांछनीय मिट्टी की स्थिति: बीज कभी-कभी प्रतिकूल मिट्टी की स्थिति जैसे ठंडी और नम मिट्टी, या अत्यंत शुष्क मिट्टी में लगाए जाते हैं। ऐसी प्रतिकूल मिट्टी की स्थिति कुछ कवक बीजाणुओं के विकास और विकास के लिए अनुकूल हो सकती है जिससे वे बीजों पर हमला कर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं।

4) रोगमुक्त बीज: बिना किसी आर्थिक परिणाम से लेकर गंभीर आर्थिक परिणामों तक के रोग जीवों द्वारा बीज हमेशा संक्रमित होते हैं। बीज उपचार से बीमारियों, मिट्टी से पैदा होने वाले जीवों के खिलाफ एक अच्छा बीमा मिलता है और इस प्रकार कमजोर बीजों को सुरक्षा प्रदान करता है जिससे वे अंकुरित हो सकते हैं और पौधे पैदा कर सकते हैं।
बीजों के उपचार में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश उत्पाद मनुष्यों के लिए हानिकारक होते हैं, लेकिन वे बीजों के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए अत्यधिक देखभाल की आवश्यकता है कि उपचारित बीज को कभी भी मानव या पशु भोजन के रूप में उपयोग नहीं किया जाता है। इस संभावना को कम करने के लिए, उपचारित बीज को स्पष्ट रूप से खतरनाक होने के रूप में लेबल किया जाना चाहिए।किसी भी हाल में उपचारित बीज का उपयोग खाने में नही करना चाहिए।बीज को सही मात्रा में उपचारित करने के लिए भी सावधानी बरतनी चाहिए; बहुत अधिक या बहुत कम सामग्री लागू करना उतना ही हानिकारक हो सकता है जितना कि कभी इलाज न करना। कुछ सांद्र तरल उत्पादों के साथ इलाज करने पर बहुत अधिक नमी वाले बीज चोट के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं।यदि बीजों को जीवाणु कल्चर से भी उपचारित करना है तो बीजोपचार करने का क्रम इस प्रकार होगा सर्वप्रथम कवकनाशी, कीटनाशी इसके बाद कल्चर से उपचारित करना चाहिए।
बीजों को पोषक तत्वों, विटामिनों और सूक्ष्म पोषक तत्वों से उपचार
बीजों को पोषक तत्वों, विटामिनों और सूक्ष्म पोषक तत्वों आदि से भिगोना/उपचार करना यथा धान में अंकुरण और शक्ति क्षमता में सुधार के लिए बीजों को 1% KCL घोल में 12 घंटे तक भिगोया जा सकता है। चारा फसलों के बीजों में बेहतर अंकुरण और शक्ति क्षमता में सुधार के लिए बीजों को NaCl2 (1%) या KH2PO4 (1%) में 12 घंटे तक भिगोया जा सकता है। दलहनो के बीजों में अच्छा अंकुरण और शक्ति क्षमता में सुधार के लिए बीजों को ZnSO4, MgSO4 और MnSO4 100 ppm घोल में 4 घंटे तक भिगोया जा सकता है।

बीजोपचार कैसे करें?

’’बीजोपचार ड्रम’’में बीज और दवा डालकर ढक्कन बंद करके हैंडल द्वारा ड्रम को 5 से 10 मिनट तक घुमाया जाता है। इस विधि से एक बार में 25-35 किलो ग्राम बीज उपचार किया जा सकता है।बीज उपचार की पारम्परिक विधि ’’घड़ा विधि’’ है। इस विधि से बीज और दवा को घड़ा में निश्चित मात्रा में डालकर घड़े के मुंह को पालीथीन से बांधकर 10 मिनट तक अच्छी तरह से हिलाया जाता है। थोड़ी देर बाद घड़े का मुंह खोलकर उपचारित बीज को अलग बोरे में रखा जाता है। बीज उपचार की अन्य विधि ’’प्लास्टिक बोरा’’ विधि है। इस विधि में बीज और दवा को डालकर बोरे के मुंह को रस्सी से बांध दिया जाता है और 10 मिनट तक अच्छी तरह हिलाने के बाद जब दवा की परत बीज के ऊपर अच्छी तरह लग जाये तब बीज को भंडारित अथवा बुआई की जाती है। बीज का उपचार रासायनिक विधि से भी किया जाता है। इस विधि में 10 लीटर पानी में फफुंदनाशक /कीटनाशक की निर्धारित मात्रा 2 से 2.5 ग्राम प्रति लीटर की दर से घोल बनाकर गन्ना, आलू, अन्य कंद वाले फसल को 10 मिनिट तक घोल में डुबाकर बुआई की जाती है। धान बीजोपचार 15 प्रतिशत नमक घोल से किया जाता है।इस विधि में साधारण नमक के 15 प्रतिशत घोल में बीज को डुबोया जाता है, जिससे कीट से प्रभावित बीज, खरपतवार के बीज ऊपर तैरने लगते है और स्वस्थ्य एवं हष्ट पुष्ट बीज नीचे बैठ जाता है, जिसे अलग कर साफ पानी से धोकर भंडारित करें अथवा सीधे खेत में बुआई करें। बीज जनित बीमारी जैसे उकटा, जड़गलन, आदि के उपचार के लिए जैविक फफूंदनाशी जैसे-ट्राइकोडर्मा या स्यूडोमोनास से 5 से 10 ग्राम प्रति किलो ग्राम बीज की दर से उपचारित करें, इससे उकटा अथवा जड़ गलन से फसल प्रभावित नहीं होती है।बीजोपचार के लाभ -बीज एवं मृदा जनित रोग जैसे- ब्लास्ट, उकटा, जड़ गलन आदि बीमारी से फसल प्रभावित नहीं होती है। बीजोपचार करने से बीज के उपर एक दवाई की परत चढ़ जाती है जो बीज को बीज अथवा मृदा जनित सूक्ष्म जीवों के नुकसान से बचाती है। बीज की अकुंरण क्षमता को बनाये रखने के लिये बीजोपचार जरूरी होता है, क्योंकि बीज उपचार करने से कीड़ों अथवा बीमारियों का प्रकोप भंडारित बीज में कम होता है। बुआई पूर्व कीटनाशी से बीज का उपचार करने पर मृदा में उपस्थित हानिकारक कीटों से बीज की सुरक्षा होती है। उपचारित बीज की बुआई करने से बीज की मात्रा कम लगती है एवं बीज स्वस्थ्य होने के कारण उत्पादकता एवं उत्पादन में वृद्धि होती है।
कृषि विभाग, भारत सरकार एवं राज्यों की सरकार और हमारा तीनों का प्रयास है की अधिक से अधिक किसान बुआई पूर्व अवश्य बीजों का उपचार करें,इसके लिए सरकार के स्तर से भी जागरूकता अभियान चला कर उन्हे बीजोपचार से होने वाले लाभ से अवगत कराया जा रहा है।
आप भी आगे बढ़कर शेयर करे।
दूसरो को बताए ।।

DhruvRaj Godara Agroscope Laxmi Dates Farm
27/07/2023

DhruvRaj Godara
Agroscope
Laxmi Dates Farm

अगर आपके पास गांव में 2-4 बीघा जमीन भी है तो कभी उसे भूलकर भी मत बेचना आपकी नौकरी या सर्विस सेक्टर कितना भी अच्छा क्यों ना हो कब ध्वस्त हो जाएगा पता नही चलेगा जिस स्पीड से टेक्नोलॉजी चेंज हो रही है Food Sector को छोड़कर किसी का भी कोई भरोसा नही
हर 15 दिन में कोई नही इनोवेशन होती है और वो हमेशा पुरानी को रिप्लेस करने ही आती है और साथ-साथ पुरानी टेक्नोलॉजी से जुड़े हुए जो लोग होते है वो या तो बेरोजगार होते है या फिर नही लाइन पकड़ने के लिए भटकते रहते है
आप सिर्फ 10-15 साल का इंतजार करो
क्योंकि जिस हिसाब से जनसंख्या बढ़ रही है उससे खाद्यान्न की डिमांड ओर बढ़ेगी और उसकी सप्लाई कम होगी एक दिन ऐसा समय आएगा जब खूब पैसा देने के बाद भी अनाज नहीं मिलेगा तब सबको किसान नजर आएगा क्योंकि जीना सबसे पहली जरूरत है इंसान की

एग्री क्लिनिक एग्री बिजनेस योजना का लगभग 1000 कृषकों को किस प्रकार से लाभ मिला है इसको आप राजस्थान राज्य के आदरणीय मुख्य...
27/07/2023

एग्री क्लिनिक एग्री बिजनेस योजना का लगभग 1000 कृषकों को किस प्रकार से लाभ मिला है इसको आप राजस्थान राज्य के आदरणीय मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत द्वारा जारी किए गए इस कार्यक्रम के द्वारा देख सकते हैं जय योजना कृषि क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए कल्याणकारी है तथा इस योजना से किसानों को किस प्रकार लाभान्वित किया जा सकता है भारत सरकार द्वारा संचालित योजना की वेबसाइट जानकारी प्राप्त कर सकते हैं इसके अलावा भी अगर आप किसी अन्य प्रकार की जानकारी को प्राप्त करना चाहते हैं तो एग्री क्लीनिक एग्री बिजनेस योजना के पूर्व नोडल अधिकारी डॉ DhruvRaj Godara से व्यक्तिगत रूप से आप संपर्क कर सकते हैं।
इस योजना से लाभान्वित होने वाले छात्रों की संख्या हजारों में है अगर आप एक विशेष प्रकार की योग्यता कृषि क्षेत्र में रख सकते हो तो आज भी इस विषय में अपार संभावनाएं हैं।
सरकार द्वारा उठाए गए अभियान के हम प्रशंसा करते और क्षेत्र के विद्यार्थियों से भी अनुरोध और निवेदन करते हैं कि इस योजना का भरपूर लाभ उठाएं अगर किसी भी प्रकार की समस्या आए तो तुरंत हमारे पास आए।
आपका
डॉ ध्रुव गोदारा

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Palliwala
Suratgarh
335804

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