ओम् प्राच्यविद्या परिषद्

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ओम् प्राच्यविद्या परिषद् विद्ययामृतमश्नुते

10/01/2026
22/12/2025

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यह १९७० के आसपास की बात होगी जब पश्चिमी उप्र के शायद मेरठ में एक विशाल भीड़…कथा के श्रोता भी अलग तरह से दत्तचित्त होकर ए...
07/12/2025

यह १९७० के आसपास की बात होगी जब पश्चिमी उप्र के शायद मेरठ में एक विशाल भीड़…कथा के श्रोता भी अलग तरह से दत्तचित्त होकर एक एक शब्द सुन रहे थे पता चला कि डोंगरे जी की भागवत कथा चल रही है आज की पीढी सिर्फ यह जान सके कि महज चालीस साल पहले तक ऐसे कथावाचकों को देखा सुना जाता था जिनकी कथा सुनने के लिये दूर दूर से लोग आते थे और जो स्वयं एक आदर्श अपरिग्रही और अपने पंथ के शास्त्रों उपनिषदों वेदों का अद्भुत ज्ञान रखते थे । कोई ढोलक मंजीरा प्रायोजित सभा नहीं थी । सिर्फ अपने धार्मिक ग्रंथों की ज्ञानसम्पन्न शास्त्रोक्त चर्चा !

जानिये ——और आज के कथित धर्माचार्यों से तुलना कर माथा ठोकिये ——

“ एक ऐसे कथावाचक जिनके पास पत्नी के अस्थि विसर्जन तक के लिए पैसे नहीं थे ... तब मंगलसूत्र बेचने की बात की थी।

यह जानकर सुखद आश्चर्य होता है कि पूज्यनीय रामचंद्र डोंगरे जी महाराज जैसे भागवताचार्य भी हुए हैं जो कथा के लिए एक रुपया भी नहीं लेते थे मात्र तुलसी पत्र लेते थे।
जहाँ भी वे भागवत कथा कहते थे, उसमें जो भी दान दक्षिणा चढ़ावा आता था, उसे उसी शहर या गाँव में गरीबों के कल्याणार्थ दान कर देते थे। कोई ट्रस्ट बनाया नहीं और किसी को शिष्य भी बनाया नहीं।

अपना भोजन स्वयं बना कर ठाकुरजी को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते थे। डोंगरे जी महाराज कलयुग के दानवीर कर्ण थे ।

उनके अंतिम प्रवचन में चौपाटी में एक करोड़ रुपए जमा हुए थे, जो गोरखपुर के कैंसर अस्पताल के लिए दान किए गए थे। स्वंय कुछ नहीं लिया|

डोंगरे जी महाराज की शादी हुई थी। प्रथम रात के समय उन्होंने अपनी धर्मपत्नी से कहा था, "देवी मैं चाहता हूं कि आप मेरे साथ १०८ भागवत कथा का पारायण करें, उसके बाद यदि आपकी इच्छा होगी तो हम गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करेंगे'।

इसके बाद जहाँ जहाँ डोंगरे जी महाराज भागवत कथा करने जाते, उनकी पत्नी भी साथ जाती।१०८ भागवत कथा पूर्ण होने में करीब सात वर्ष बीत गए। तब डोंगरे जी महाराज पत्नी से बोले, *अब अगर आपकी आज्ञा हो तो हम गृहस्थ आश्रम में प्रवेश कर संतान उत्पन्न करें'।
इस पर उनकी पत्नी ने कहा, 'आपके श्रीमुख से १०८ भागवत कथा श्रवण करने के पश्चात मैंने गोपाल को ही अपना पुत्र मान लिया है, इसलिए अब हमें संतान उत्पन्न करने की कोई आवश्यकता नहीं है"।
धन्य हैं ऐसे पति-पत्नी, धन्य है उनकी भक्ति और उनका कृष्ण प्रेम।

डोंगरे जी महाराज की पत्नी आबू में रहती थीं और डोंगरे जी महाराज देश दुनिया में भागवत कथा रस बरसाते थे।
पत्नी की मृत्यु के पांच दिन पश्चात उन्हें इसका पता चला। वे अस्थि विसर्जन करने गए, उनके साथ मुंबई के बहुत बड़े सेठ थे "रतिभाई पटेल जी" |
उन्होंने बाद में बताया कि डोंगरे जी महाराज ने उनसे कहा था ‘कि रति भाई मेरे पास तो कुछ है नहीं और अस्थि विसर्जन में कुछ तो लगेगा। क्या करें’ ? फिर महाराज आगे बोले थे, ‘ऐसा करो, पत्नी का मंगलसूत्र और कर्णफूल पड़ा होगा उसे बेचकर जो मिलेगा उसे अस्थि विसर्जन क्रिया में लगा देते हैं’।

सेठ रतिभाई पटेल ने रोते हुए बताया था....
जिन महाराजश्री के इशारे पर लोग कुछ भी करने को तैयार रहते थे, वह महापुरुष कह रहा था कि पत्नी के अस्थि विसर्जन के लिए पैसे नहीं हैं।

हम उसी समय मर क्यों न गए l
फूट फूट कर रोने के अलावा मेरे मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा था।

ऐसे विरक्त महात्मा संत ....भी हुये हैं…इसी युग में…
नोट-किसी सज्जन के वाल पर ये पढ़ कर आत्मिक सूख मिला आप सभी से साँझा किया…

07/11/2025

पद पाठ की द्वितीय आवृत्ति आप सभी की सेवा में सदर समर्पित हैं प्रथम आवृत्ति में जो कुछ अशुद्धियां रही थी उनका मार्जन कर दिया गया है

॥ आदित्य हृदय स्तोत्रम् ॥विनियोगॐ अस्य आदित्यहृदय स्तोत्रस्यअगस्त्यऋषिः अनुष्टुप्छन्दः आदित्यहृदयभूतो।भगवान् ब्रह्मा देव...
31/10/2025

॥ आदित्य हृदय स्तोत्रम् ॥

विनियोग
ॐ अस्य आदित्यहृदय स्तोत्रस्य
अगस्त्यऋषिः अनुष्टुप्छन्दः आदित्यहृदयभूतो।
भगवान् ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया
ब्रह्माविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः॥

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्।
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥1॥

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्।
उपागम्याब्रवीद्राममगस्त्यो भगवान् ऋषिः॥2॥

राम राम महाबाहो शृणु गुह्यं सनातनम्।
येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसि॥3॥

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्।
जयावहं जपेन्नित्यम् अक्षय्यं परमं शिवम्॥4॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं सर्वपापप्रणाशनम्।
चिन्ताशोकप्रशमनम् आयुर्वर्धनमुत्तमम्॥5॥

रश्मिमंतं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्।
पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्॥6॥

सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावनः।
एष देवासुरगणाँल्लोकान् पाति गभस्तिभिः॥7॥

एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिवः स्कन्दः प्रजापतिः।
महेन्द्रो धनदः कालो यमः सोमो ह्यपां पतिः॥8॥

पितरो वसवः साध्या ह्यश्विनौ मरुतो मनुः।
वायुर्वह्निः प्रजाप्राण ऋतुकर्ता प्रभाकरः॥9॥

आदित्यः सविता सूर्यः खगः पूषा गभस्तिमान्।
सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकरः॥10॥

हरिदश्वः सहस्रार्चिः सप्तसप्तिर्मरीचिमान्।
तिमिरोन्मथनः शम्भुस्त्वष्टा मार्ताण्ड अंशुमान्॥11॥

हिरण्यगर्भः शिशिरस्तपनो भास्करो रविः।
अग्निगर्भोऽदितेः पुत्रः शङ्खः शिशिरनाशनः॥12॥

व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजुःसामपारगः।
घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवङ्गमः॥13॥

आतपी मण्डली मृत्युः पिङ्गलः सर्वतापनः।
कविर्विश्वो महातेजाः रक्तः सर्वभवोद्भवः॥14॥

नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावनः।
तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन् नमोऽस्तु ते॥15॥

नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः।
ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः॥16॥

जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नमः।
नमो नमः सहस्रांशो आदित्याय नमो नमः॥17॥

नम उग्राय वीराय सारङ्गाय नमो नमः।
नमः पद्मप्रबोधाय मार्ताण्डाय नमो नमः॥18॥

ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सूर्यायादित्यवर्चसे।
भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नमः॥19॥

तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने।
कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नमः॥20॥

तप्तचामीकराभाय वह्नये विश्वकर्मणे।
नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे॥21॥

नाशयत्येष वै भूतं तदेव सृजति प्रभुः।
पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभिः॥22॥

एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठितः।
एष एवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्॥23॥

वेदाश्च क्रतवश्चैव क्रतूनां फलमेव च।
यानि कृत्यानि लोकेषु सर्व एष रविः प्रभुः॥24॥

एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तातेषु भयेषु च।
कीर्तयन् पुरुषः कश्चिन्नावसीदति राघव॥25॥

पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगत्पतिम्।
एतत् त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि॥26॥

अस्मिन् क्षणे महाबाहो रावणं त्वं वधिष्यसि।
एवमुक्त्वा तदागस्त्यो जगाम च यथागतम्॥27॥

एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत्तदा।
धारयामास सुप्रीतो राघवः प्रयतात्मवान्॥28॥

आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वा तु परं हर्षमवाप्तवान्।
त्रिराचम्य शुचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्॥29॥

रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा युद्धाय समुपागमत्।
सर्वयत्नेन महता वधे तस्य धृतोऽभवत्॥30॥

अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमनाः परमं प्रहृष्यमाणः।
निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति॥31॥

॥ इति आदित्यहृदयम् स्तोत्रं ॥

न तातो न माता, न बन्धुर्न दातान पुत्रो न पुत्री, न भृत्यो न भर्ता।न जाया न विद्या, न वृत्तिर्ममैवगतिस्त्वं गतिस्त्वं त्व...
27/10/2025

न तातो न माता, न बन्धुर्न दाता
न पुत्रो न पुत्री, न भृत्यो न भर्ता।
न जाया न विद्या, न वृत्तिर्ममैव
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥१॥

भवाब्धावपारे महादुःखभीरुः
पपात प्रकामी, प्रलोभी प्रमत्तः।
कुसंसार-पाश-प्रबद्धः सदाहं
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥२॥

न जानामि दानं, न च ध्यानयोगं
न जानामि तंत्रं, न च स्तोत्र-मन्त्रम्।
न जानामि पूजां, न च न्यासयोगम्
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥३॥

न जानामि पुण्यं, न जानामि तीर्थं
न जानामि मुक्तिं, लयं वा कदाचित्।
न जानामि भक्तिं, व्रतं वापि मात-
र्गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥४॥

कुकर्मी कुसङ्गी, कुबुद्धिः कुदासः
कुलाचारहीनः कदाचारलीनः।
कुदृष्टिः कुवाक्यप्रबन्धः सदाहम्
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥५॥

प्रजेशं रमेशं महेशं सुरेशं
दिनेशं निशीथेश्वरं वा कदाचित्।
न जानामि चान्यत् सदाहं शरण्ये
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥६॥

विवादे विषादे प्रमादे प्रवासे
जले चानले पर्वते शत्रुमध्ये।
अरण्ये शरण्ये सदा मां प्रपाहि
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥७॥

अनाथो दरिद्रो जरा-रोगयुक्तो
महाक्षीणदीनः सदा जाड्यवक्त्रः।
विपत्तौ प्रविष्टः प्रणष्टः सदाहम्
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥८॥

॥इति श्रीमच्छड़्कराचार्यकृतं भवान्यष्टकं सम्पूर्णम्॥

01...🌷🌷श्रीकमलासहस्रनामावलिः 🌷🌷🌷02..🌷🌷🌷श्रीकमलाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् 🌷🌷🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 01...🌷🌷श्रीकमलासहस्रनामावलिः 🌷🌷🌷...
19/10/2025

01...🌷🌷श्रीकमलासहस्रनामावलिः 🌷🌷🌷
02..🌷🌷🌷श्रीकमलाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् 🌷🌷
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01...🌷🌷श्रीकमलासहस्रनामावलिः 🌷🌷🌷

ध्यानम् ।
कान्त्या काञ्चनसन्निभां हिमगिरिप्रख्यैश्चतुर्भिर्गजैः
हस्तोत्क्षिप्तहिरण्मयामृतघटैरासिच्यमानां श्रियम् ।
बिभ्राणां वरमब्जयुग्ममभयं हस्तैः किरीटोज्ज्वलां
क्षौमाबद्ध नितम्बबिम्बललितां वन्देऽरविन्दस्थिताम् ॥ १॥

माणिक्यप्रतिमप्रभां हिमनिभैस्तुङ्गैश्चतुर्भिर्गजैः
हस्ताग्राहितरत्नकुम्भसलिलैरासिच्यमानां मुदा ।
हस्ताब्जैर्वरदानमम्बुजयुगाभीतीर्दधानां हरेः
कान्तां काङ्क्षितपारिजातलतिकां वन्दे सरोजासनाम् ॥ २॥

आसीना सरसीरुहेस्मितमुखी हस्ताम्बुजैर्बिभ्रती
दानं पद्मयुगाभये च वपुषा सौदामिनीसन्निभा ।
मुक्ताहारविराजमानपृथुलोत्तुङ्गस्तनोद्भासिनी
पायाद्वः कमला कटाक्षविभवैरानन्दयन्ती हरिम् ॥ ३॥

सिन्दूरारुणकान्तिमब्जवसतिं सौन्दर्यवारान्निधिं
कोटीराङ्गदहारकुण्डलकटीसूत्रादिभिर्भूषिताम् ।
हस्ताब्जैर्वसुपत्रमब्जयुगलादर्शौ वहन्तीं परां
आवीतां परिचारिकाभिरनिशं सेवे प्रियां शार्ङ्गिणः ॥ ४॥

बालार्कद्युतिमिन्दुखण्डविलसत्कोटीरहारोज्ज्वलां
रत्नाकल्पविभूषितां कुचनतां शालेः करैर्मञ्जरीम् ।
पद्मं कौस्तुभरत्नमप्यविरतं सम्बिभ्रतीं सस्मितां
फुल्लाम्भोजविलोचनत्रययुतां वन्दे परां देवताम् ॥ ५॥

ॐ श्रियै नमः ।
ॐ पद्मायै नमः ।
ॐ प्रकृत्यै नमः ।
ॐ सत्त्वायै नमः ।
ॐ शान्तायै नमः ।
ॐ चिच्छक्त्यै नमः ।
ॐ अव्ययायै नमः ।
ॐ केवलायै नमः ।
ॐ निष्कलायै नमः ।
ॐ शुद्धायै नमः । १०
ॐ व्यापिन्यै नमः ।
ॐ व्योमविग्रहायै नमः ।
ॐ व्योमपद्मकृताधारायै नमः ।
ॐ परस्मै व्योम्ने नमः ।
ॐ मतोद्भवायै नमः ।
ॐ निर्व्योमायै नमः ।
ॐ व्योममध्यस्थायै नमः ।
ॐ पञ्चव्योमपदाश्रितायै नमः ।
ॐ अच्युतायै नमः ।
ॐ व्योमनिलयायै नमः । २०
ॐ परमानन्दरूपिण्यै नमः ।
ॐ नित्यशुद्धायै नमः ।
ॐ नित्यतृप्तायै नमः ।
ॐ निर्विकारायै नमः ।
ॐ निरीक्षणायै नमः ।
ॐ ज्ञानशक्त्यै नमः ।
ॐ कर्तृशक्त्यै नमः ।
ॐ भोक्तृशक्त्यै नमः ।
ॐ शिखावहायै नमः ।
ॐ स्नेहाभासायै नमः । ३०
ॐ निरानन्दायै नमः ।
ॐ विभूत्यै नमः ।
ॐ विमलायै नमः ।
ॐ चलायै नमः ।
ॐ अनन्तायै नमः ।
ॐ वैष्णव्यै नमः ।
ॐ व्यक्तायै नमः ।
ॐ विश्वानन्दायै नमः ।
ॐ विकाशिन्यै नमः ।
ॐ शक्त्यै नमः । ४०
ॐ विभिन्नसर्वार्त्यै नमः ।
ॐ समुद्रपरितोषिण्यै नमः ।
ॐ मूर्त्यै नमः ।
ॐ सनातन्यै नमः ।
ॐ हार्द्यै नमः ।
ॐ निस्तरङ्गायै नमः ।
ॐ निरामयायै नमः ।
ॐ ज्ञानज्ञेयायै नमः ।
ॐ ज्ञानगम्यायै नमः ।
ॐ ज्ञानज्ञेयविकासिन्यै नमः । ५०
ॐ स्वच्छन्दशक्त्यै नमः ।
ॐ गहनायै नमः ।
ॐ निष्कम्पार्च्यै नमः ।
ॐ सुनिर्मलायै नमः ।
ॐ स्वरूपायै नमः ।
ॐ सर्वगायै नमः ।
ॐ अपारायै नमः ।
ॐ बृंहिण्यै नमः ।
ॐ सुगुणोर्जितायै नमः ।
ॐ अकलङ्कायै नमः । ६०
ॐ निराधारायै नमः ।
ॐ निस्सङ्कल्पायै नमः ।
ॐ निराश्रयायै नमः ।
ॐ असङ्कीर्णायै नमः ।
ॐ सुशान्तायै नमः ।
ॐ शाश्वत्यै नमः ।
ॐ भासुर्यै नमः ।
ॐ स्थिरायै नमः ।
ॐ अनौपम्यायै नमः ।
ॐ निर्विकल्पायै नमः । ७०
ॐ निर्यन्त्रायै नमः ।
ॐ यन्त्रवाहिन्यै नमः ।
ॐ अभेद्यायै नमः ।
ॐ भेदिन्यै नमः ।
ॐ भिन्नायै नमः ।
ॐ भारत्यै नमः ।
ॐ वैखर्यै नमः ।
ॐ खगायै नमः ।
ॐ अग्राह्यायै नमः ।
ॐ ग्राहिकायै नमः । ८०
ॐ गूढायै नमः ।
ॐ गम्भीरायै नमः ।
ॐ विश्वगोपिन्यै नमः ।
ॐ अनिर्देश्यायै नमः ।
ॐ अप्रतिहतायै नमः ।
ॐ निर्बीजायै नमः ।
ॐ पावन्यै नमः ।
ॐ परायै नमः ।
ॐ अप्रतर्क्यायै नमः ।
ॐ अपरिमितायै नमः । ९०
ॐ भवभ्रान्तिविनाशिन्यै नमः ।
ॐ एकायै नमः ।
ॐ द्विरूपायै नमः ।
ॐ त्रिविधायै नमः ।
ॐ असङ्ख्यातायै नमः ।
ॐ सुरेश्वर्यै नमः ।
ॐ सुप्रतिष्ठायै नमः ।
ॐ महाधात्र्यै नमः ।
ॐ स्थित्यै नमः ।
ॐ वृद्ध्यै नमः । १००
ॐ ध्रुवायै गत्यै नमः ।
ॐ ईश्वर्यै नमः ।
ॐ महिमायै नमः ।
ॐ ऋद्ध्यै नमः ।
ॐ प्रमोदायै नमः ।
ॐ उज्ज्वलोद्यमायै नमः ।
ॐ अक्षयायै नमः ।
ॐ वर्धमानायै नमः ।
ॐ सुप्रकाशायै नमः ।
ॐ विहङ्गमायै नमः । ११०
ॐ नीरजायै नमः ।
ॐ जनन्यै नमः ।
ॐ नित्यायै नमः ।
ॐ जयायै नमः ।
ॐ रोचिष्मत्यै नमः ।
ॐ शुभायै नमः ।
ॐ तमोनुदायै नमः ।
ॐ ज्वालायै नमः ।
ॐ सुदीप्त्यै नमः ।
ॐ अंशुमालिन्यै नमः । १२०
ॐ अप्रमेयायै नमः ।
ॐ त्रिधा सूक्ष्मायै नमः ।
ॐ परायै नमः ।
ॐ निर्वाणदायिन्यै नमः ।
ॐ अवदातायै नमः ।
ॐ सुशुद्धायै नमः ।
ॐ अमोघाख्यायै नमः ।
ॐ परम्परायै नमः ।
ॐ सन्धानक्यै नमः ।
ॐ शुद्धविद्यायै नमः । १३०
ॐ सर्वभूतमहेश्वर्यै नमः ।
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ तुष्ट्यै नमः ।
ॐ महाधीरायै नमः ।
ॐ शान्त्यै नमः ।
ॐ आपूरणे नवायै नमः ।
ॐ अनुग्रहाशक्त्यै नमः ।
ॐ आद्यायै नमः ।
ॐ जगज्ज्येष्ठायै नमः ।
ॐ जगद्विध्यै नमः । १४०
ॐ सत्यायै नमः ।
ॐ प्रह्वायै नमः ।
ॐ क्रियायोग्यायै नमः ।
ॐ अपर्णायै नमः ।
ॐ ह्लादिन्यै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ सम्पूर्णाह्लादिन्यै नमः ।
ॐ शुद्धायै नमः ।
ॐ ज्योतिष्मत्यै नमः ।
ॐ अमतावहायै नमः । १५०
ॐ रजोवत्यै अर्कप्रतिभायै नमः ।
ॐ आकर्षिण्यै नमः ।
ॐ कर्षिण्यै नमः ।
ॐ रसायै नमः ।
ॐ परायै नमः ।
ॐ वसुमत्यै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ कान्त्यै नमः ।
ॐ शान्त्यै नमः ।
ॐ मत्यै नमः । १६०
ॐ कलायै नमः ।
ॐ कलङ्करहितायै नमः ।
ॐ विशालोद्दीपन्यै नमः ।
ॐ रत्यै नमः ।
ॐ सम्बोधिन्यै नमः ।
ॐ हारिण्यै नमः ।
ॐ प्रभावायै नमः ।
ॐ भवभूतिदायै नमः ।
ॐ अमृतस्यन्दिन्यै नमः । १७०
ॐ जीवायै नमः ।
ॐ जनन्यै नमः ।
ॐ खण्डिकायै नमः ।
ॐ स्थिरायै नमः ।
ॐ धूमायै नमः ।
ॐ कलावत्यै नमः ।
ॐ पूर्णायै नमः ।
ॐ भासुरायै नमः ।
ॐ सुमत्यै नमः ।
ॐ रसायै नमः । १८०
ॐ शुद्धायै नमः ।
ॐ ध्वन्यै नमः ।
ॐ सृत्यै नमः ।
ॐ सृष्ट्यै नमः ।
ॐ विकृत्यै नमः ।
ॐ कृष्ट्यै नमः ।
ॐ प्रापण्यै नमः ।
ॐ प्राणदायै नमः ।
ॐ प्रह्वायै नमः ।
ॐ विश्वायै नमः । १९०
ॐ पाण्डुरवासिन्यै नमः ।
ॐ अवन्यै नमः ।
ॐ वज्रनलिकायै नमः ।
ॐ चित्रायै नमः ।
ॐ ब्रह्माण्डवासिन्यै नमः ।
ॐ अनन्तरूपायै नमः ।
ॐ अनन्तात्मने नमः ।
ॐ अनन्तस्थायै नमः ।
ॐ अनन्तसम्भवायै नमः ।
ॐ महाशक्त्यै नमः । २००
ॐ प्राणशक्त्यै नमः ।
ॐ प्राणदात्र्यै नमः ।
ॐ रतिम्भरायै नमः ।
ॐ महासमूहायै नमः ।
ॐ निखिलायै नमः ।
ॐ इच्छाधारायै नमः ।
ॐ सुखावहायै नमः ।
ॐ प्रत्यक्षलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ निष्कम्पायै नमः ।
ॐ प्ररोहायै नमः । २१०
ॐ बुद्धिगोचरायै नमः ।
ॐ नानादेहायै नमः ।
ॐ महावर्तायै नमः ।
ॐ बहुदेहविकासिन्यै नमः ।
ॐ सहस्राण्यै नमः ।
ॐ प्रधानायै नमः ।
ॐ न्यायवस्तुप्रकाशिकायै नमः ।
ॐ सर्वाभिलाषपूर्णायै नमः ।
ॐ इच्छायै नमः ।
ॐ सर्वायै नमः । २२०
ॐ सर्वार्थभाषिण्यै नमः ।
ॐ नानास्वरूपचिद्धात्र्यै नमः ।
ॐ शब्दपूर्वायै नमः ।
ॐ पुरातनायै नमः ।
ॐ व्यक्तायै नमः ।
ॐ अव्यक्तायै नमः ।
ॐ जीवकेशायै नमः ।
ॐ सर्वेच्छापरिपूरितायै नमः ।
ॐ सङ्कल्पसिद्धायै नमः ।
ॐ साङ्ख्येयायै नमः । २३०
ॐ तत्त्वगर्भायै नमः ।
ॐ धरावहायै नमः ।
ॐ भूतरूपायै नमः ।
ॐ चित्स्वरूपायै नमः ।
ॐ त्रिगुणायै नमः ।
ॐ गुणगर्वितायै नमः ।
ॐ प्रजापतीश्वर्यै नमः ।
ॐ रौद्र्यै नमः ।
ॐ सर्वाधारायै नमः ।
ॐ सुखावहायै नमः । २४०
ॐ कल्याणवाहिकायै नमः ।
ॐ कल्यायै नमः ।
ॐ कलिकल्मषनाशिन्यै नमः ।
ॐ नीरूपायै नमः ।
ॐ उद्भिन्नसन्तानायै नमः ।
ॐ सुयन्त्रायै नमः ।
ॐ त्रिगुणालयायै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ।
ॐ योगमायायै नमः ।
ॐ महायोगेश्वर्यै नमः । २५०
ॐ प्रियायै नमः ।
ॐ महास्त्र्यै नमः ।
ॐ विमलायै नमः ।
ॐ कीर्त्यै नमः ।
ॐ जयायै नमः ।
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ निरञ्जनायै नमः ।
ॐ प्रकृत्यै नमः ।
ॐ भगवन्मायाशक्त्यै नमः ।
ॐ निद्रायै नमः । २६०
ॐ यशस्कर्यै नमः ।
ॐ चिन्तायै नमः ।
ॐ बुद्ध्यै नमः ।
ॐ यशसे नमः ।
ॐ प्रज्ञायै नमः ।
ॐ शान्त्यै नमः ।
ॐ आप्रीतिवर्धिन्यै नमः ।
ॐ प्रद्युम्नमात्रे नमः ।
ॐ साध्व्यै नमः ।
ॐ सुखसौभाग्यसिद्धिदायै नमः । २७०
ॐ काष्ठायै नमः ।
ॐ निष्ठायै नमः ।
ॐ प्रतिष्ठायै नमः ।
ॐ ज्येष्ठायै नमः ।
ॐ श्रेष्ठायै नमः ।
ॐ जयावहायै नमः ।
ॐ सर्वातिशायिन्यै प्रीत्यै नमः ।
ॐ विश्वशक्त्यै नमः ।
ॐ महाबलायै नमः ।
ॐ वरिष्ठायै नमः । २८०
ॐ विजयायै नमः ।
ॐ वीरायै नमः ।
ॐ जयन्त्यै नमः ।
ॐ विजयप्रदायै नमः ।
ॐ हृद्गृहायै नमः ।
ॐ गोपिन्यै नमः ।
ॐ गुह्यायै नमः ।
ॐ गणगन्धर्वसेवितायै नमः ।
ॐ योगीश्वर्यै नमः ।
ॐ योगमायायै नमः । २९०
ॐ योगिन्यै नमः ।
ॐ योगसिद्धिदायै नमः ।
ॐ महायोगेश्वरवृतायै नमः ।
ॐ योगायै नमः ।
ॐ योगेश्वरप्रियायै नमः ।
ॐ ब्रह्मेन्द्ररुद्रनमितायै नमः ।
ॐ सुरासुरवरप्रदायै नमः ।
ॐ त्रिवर्त्मगायै नमः ।
ॐ त्रिलोकस्थायै नमः ।
ॐ त्रिविक्रमपदोद्भवायै नमः । ३००
ॐ सुतारायै नमः ।
ॐ तारिण्यै नमः ।
ॐ तारायै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ सन्तारिण्यै परायै नमः ।
ॐ सुतारिण्यै नमः ।
ॐ तारयन्त्यै नमः ।
ॐ भूरितारेश्वरप्रभायै नमः ।
ॐ गुह्यविद्यायै नमः ।
ॐ यज्ञविद्यायै नमः । ३१०
ॐ महाविद्यासुशोभितायै नमः ।
ॐ अध्यात्मविद्यायै नमः ।
ॐ विघ्नेश्यै नमः ।
ॐ पद्मस्थायै नमः ।
ॐ परमेष्ठिन्यै नमः ।
ॐ आन्वीक्षिक्यै नमः ।
ॐ त्रय्यै नमः ।
ॐ वार्तायै नमः ।
ॐ दण्डनीत्यै नमः ।
ॐ नयात्मिकायै नमः । ३२०
ॐ गौर्यै नमः ।
ॐ वागीश्वर्यै नमः ।
ॐ गोप्त्र्यै नमः ।
ॐ गायत्र्यै नमः ।
ॐ कमलोद्भवायै नमः ।
ॐ विश्वम्भरायै नमः ।
ॐ विश्वरूपायै नमः ।
ॐ विश्वमात्रे नमः ।
ॐ वसुप्रदायै नमः ।
ॐ सिद्ध्यै नमः । ३३०
ॐ स्वाहायै नमः ।
ॐ स्वधायै नमः ।
ॐ स्वस्त्यै नमः ।
ॐ सुधायै नमः ।
ॐ सर्वार्थसाधिन्यै नमः ।
ॐ इच्छायै नमः ।
ॐ सृष्ट्यै नमः ।
ॐ द्युत्यै नमः ।
ॐ भूत्यै नमः ।
ॐ कीर्त्यै नमः । ३४०
ॐ श्रद्धायै नमः ।
ॐ दयायै नमः ।
ॐ मत्यै नमः ।
ॐ श्रुत्यै नमः ।
ॐ मेधायै नमः ।
ॐ धृत्यै नमः ।
ॐ ह्रियै नमः ।
ॐ श्रियै नमः ।
ॐ विद्यायै नमः ।
ॐ विबुधवन्दितायै नमः । ३५०
ॐ अनसूयायै नमः ।
ॐ घृणायै नमः ।
ॐ नीत्यै नमः ।
ॐ निर्वृत्यै नमः ।
ॐ कामधुक्करायै नमः ।
ॐ प्रतिज्ञायै नमः ।
ॐ सन्तत्यै नमः ।
ॐ भूत्यै नमः ।
ॐ दिवे नमः ।
ॐ प्रज्ञायै नमः । ३६०
ॐ विश्वमानिन्यै नमः ।
ॐ स्मृत्यै नमः ।
ॐ वाचे नमः ।
ॐ विश्वजनन्यै नमः ।
ॐ पश्यन्त्यै नमः ।
ॐ मध्यमायै नमः ।
ॐ समायै नमः ।
ॐ सन्ध्यायै नमः ।
ॐ मेधायै नमः ।
ॐ प्रभायै नमः । ३७०
ॐ भीमायै नमः ।
ॐ सर्वाकारायै नमः ।
ॐ सरस्वत्यै नमः ।
ॐ काङ्क्षायै नमः ।
ॐ मायायै नमः ।
ॐ महामायामोहिन्यै नमः ।
ॐ माधवप्रियायै नमः ।
ॐ सौम्याभोगायै नमः ।
ॐ महाभोगायै नमः ।
ॐ भोगिन्यै नमः । ३८०
ॐ भोगदायिन्यै नमः ।
ॐ सुधौतकनकप्रख्यायै नमः ।
ॐ सुवर्णकमलासनायै नमः ।
ॐ हिरण्यगर्भायै नमः ।
ॐ सुश्रोण्यै नमः ।
ॐ हारिण्यै नमः ।
ॐ रमण्यै नमः ।
ॐ रमायै नमः ।
ॐ चन्द्रायै नमः ।
ॐ हिरण्मय्यै नमः । ३९०
ॐ ज्योत्स्नायै नमः ।
ॐ रम्यायै नमः ।
ॐ शोभायै नमः ।
ॐ शुभावहायै नमः ।
ॐ त्रैलोक्यमण्डनायै नमः ।
ॐ नारीनरेश्वरवरार्चितायै नमः ।
ॐ त्रैलोक्यसुन्दर्यै नमः ।
ॐ रामायै नमः ।
ॐ महाविभववाहिन्यै नमः ।
ॐ पद्मस्थायै नमः । ४००
ॐ पद्मनिलयायै नमः ।
ॐ पद्ममालाविभूषितायै नमः ।
ॐ पद्मयुग्मधरायै नमः ।
ॐ कान्तायै नमः ।
ॐ दिव्याभरणभूषितायै नमः ।
ॐ विचित्ररत्नमुकुटायै नमः ।
ॐ विचित्राम्बरभूषितायै नमः ।
ॐ विचित्रमाल्यगन्धाढ्यायै नमः ।
ॐ विचित्रायुधवाहनायै नमः ।
ॐ महानारायणीदेव्यै नमः । ४१०
ॐ वैष्णव्यै नमः ।
ॐ वीरवन्दितायै नमः ।
ॐ कालसङ्कर्षिण्यै नमः ।
ॐ घोरायै नमः ।
ॐ तत्त्वसङ्कर्षिण्यै कलायै नमः ।
ॐ जगत्सम्पूरण्यै नमः ।
ॐ विश्वायै नमः ।
ॐ महाविभवभूषणायै नमः ।
ॐ वारुण्यै नमः ।
ॐ वरदायै नमः । ४२०
ॐ व्याख्यायै नमः ।
ॐ घण्टाकर्णविराजितायै नमः ।
ॐ नृसिंह्यै नमः ।
ॐ भैरव्यै नमः ।
ॐ ब्राह्म्यै नमः ।
ॐ भास्कर्यै नमः ।
ॐ व्योमचारिण्यै नमः ।
ॐ ऐन्द्र्यै नमः ।
ॐ कामधनुस्सृष्ट्यै नमः ।
ॐ कामयोन्यै नमः । ४३०
ॐ महाप्रभायै नमः ।
ॐ दृष्टायै नमः ।
ॐ काम्यायै नमः ।
ॐ विश्वशक्त्यै नमः ।
ॐ बीजगत्यात्मदर्शनायै नमः ।
ॐ गरुडारूढहृदयायै नमः ।
ॐ चान्द्र्यै श्रिये नमः ।
ॐ मधुराननायै नमः ।
ॐ महोग्ररूपायै नमः ।
ॐ वाराहीनारसिंहीहतासुरायै नमः । ४४०
ॐ युगान्तहुतभुग्ज्वालायै नमः ।
ॐ करालायै नमः ।
ॐ पिङ्गलायै कलायै नमः ।
ॐ त्रैलोक्यभूषणायै नमः ।
ॐ भीमायै नमः ।
ॐ श्यामायै नमः ।
ॐ त्रैलोक्यमोहिन्यै नमः ।
ॐ महोत्कटायै नमः ।
ॐ महारक्तायै नमः ।
ॐ महाचण्डायै नमः । ४५०
ॐ महासनायै नमः ।
ॐ शङ्खिन्यै नमः ।
ॐ लेखिन्यै नमः ।
ॐ स्वस्थालिखितायै नमः ।
ॐ खेचरेश्वर्यै नमः ।
ॐ भद्रकाल्यै नमः ।
ॐ एकवीरायै नमः ।
ॐ कौमार्यै नमः ।
ॐ भगमालिन्यै नमः ।
ॐ कल्याण्यै नमः । ४६०
ॐ कामधुग्ज्वालामुख्यै नमः ।
ॐ उत्पलमालिकायै नमः ।
ॐ बालिकायै नमः ।
ॐ धनदायै नमः ।
ॐ सूर्यायै नमः ।
ॐ हृदयोत्पलमालिकायै नमः ।
ॐ अजितायै नमः ।
ॐ वर्षिण्यै नमः ।
ॐ रीत्यै नमः ।
ॐ भेरुण्डायै नमः । ४७०
ॐ गरुडासनायै नमः ।
ॐ वैश्वानरीमहामायायै नमः ।
ॐ महाकाल्यै नमः ।
ॐ विभीषणायै नमः ।
ॐ महामन्दारविभवायै नमः ।
ॐ शिवानन्दायै नमः ।
ॐ रतिप्रियायै नमः ।
ॐ उद्रीत्यै नमः ।
ॐ पद्ममालायै नमः ।
ॐ धर्मवेगायै नमः । ४८०
ॐ विभावन्यै नमः ।
ॐ सत्क्रियायै नमः ।
ॐ देवसेनायै नमः ।
ॐ हिरण्यरजताश्रयायै नमः ।
ॐ सहसावर्तमानायै नमः ।
ॐ हस्तिनादप्रबोधिन्यै नमः ।
ॐ हिरण्यपद्मवर्णायै नमः ।
ॐ हरिभद्रायै नमः ।
ॐ सुदुर्धरायै नमः ।
ॐ सूर्यायै नमः । ४९०
ॐ हिरण्यप्रकटसदृश्यै नमः ।
ॐ हेममालिन्यै नमः ।
ॐ पद्माननायै नमः ।
ॐ नित्यपुष्टायै नमः ।
ॐ देवमात्रे नमः ।
ॐ अमृतोद्भवायै नमः ।
ॐ महाधनायै नमः ।
ॐ श‍ृङ्ग्यै नमः ।
ॐ कार्दम्यै नमः ।
ॐ कम्बुकन्धरायै नमः । ५००
ॐ आदित्यवर्णायै नमः ।
ॐ चन्द्राभायै नमः ।
ॐ गन्धद्वारायै नमः ।
ॐ दुरासदायै नमः ।
ॐ वरार्चितायै नमः ।
ॐ वरारोहायै नमः ।
ॐ वरेण्यायै नमः ।
ॐ विष्णुवल्लभायै नमः ।
ॐ कल्याण्यै नमः ।
ॐ वरदायै नमः । ५१०
ॐ वामायै नमः ।
ॐ वामेश्यै नमः ।
ॐ विन्ध्यवासिन्यै नमः ।
ॐ योगनिद्रायै नमः ।
ॐ योगरतायै नमः ।
ॐ देवकीकामरूपिण्यै नमः ।
ॐ कंसविद्राविण्यै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ कौमार्यै नमः ।
ॐ कौशिक्यै नमः । ५२०
ॐ क्षमायै नमः ।
ॐ कात्यायन्यै नमः ।
ॐ कालरात्र्यै नमः ।
ॐ निशितृप्तायै नमः ।
ॐ सुदुर्जयायै नमः ।
ॐ विरूपाक्ष्यै नमः ।
ॐ विशालाक्ष्यै नमः ।
ॐ भक्तानां परिरक्षिण्यै नमः ।
ॐ बहुरूपास्वरूपायै नमः ।
ॐ विरूपायै नमः । ५३०
ॐ रूपवर्जितायै नमः ।
ॐ घण्टानिनादबहुलायै नमः ।
ॐ जीमूतध्वनिनिस्वनायै नमः ।
ॐ महासुरेन्द्रमथिन्यै नमः ।
ॐ भ्रुकुटीकुटिलाननायै नमः ।
ॐ सत्योपयाचितायै एकायै नमः ।
ॐ कौबेर्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः ।
ॐ आर्यायै नमः ।
ॐ यशोदासुतदायै नमः । ५४०
ॐ धर्मकामार्थमोक्षदायै नमः ।
ॐ दारिद्र्यदुःखशमन्यै नमः ।
ॐ घोरदुर्गार्तिनाशिन्यै नमः ।
ॐ भक्तार्तिशमन्यै नमः ।
ॐ भव्यायै नमः ।
ॐ भवभर्गापहारिण्यै नमः ।
ॐ क्षीराब्धितनयायै नमः ।
ॐ पद्मायै नमः ।
ॐ कमलायै नमः ।
ॐ धरणीधरायै नमः । ५५०
ॐ रुक्मिण्यै नमः ।
ॐ रोहिण्यै नमः ।
ॐ सीतायै नमः ।
ॐ सत्यभामायै नमः ।
ॐ यशस्विन्यै नमः ।
ॐ प्रज्ञाधारायै नमः ।
ॐ अमितप्रज्ञायै नमः ।
ॐ वेदमात्रे नमः ।
ॐ यशोवत्यै नमः ।
ॐ समाध्यै नमः । ५६०
ॐ भावनायै नमः ।
ॐ मैत्र्यै नमः ।
ॐ करुणायै नमः ।
ॐ भक्तवत्सलायै नमः ।
ॐ अन्तर्वेदीदक्षिणायै नमः ।
ॐ ब्रह्मचर्यपरागत्यै नमः ।
ॐ दीक्षायै नमः ।
ॐ वीक्षायै नमः ।
ॐ परीक्षायै नमः ।
ॐ समीक्षायै नमः । ५७०
ॐ वीरवत्सलायै नमः ।
ॐ अम्बिकायै नमः ।
ॐ सुरभ्यै नमः ।
ॐ सिद्धायै नमः ।
ॐ सिद्धविद्याधरार्चितायै नमः ।
ॐ सुदीप्तायै नमः ।
ॐ लेलिहानायै नमः ।
ॐ करालायै नमः ।
ॐ विश्वपूरकायै नमः ।
ॐ विश्वसंहारिण्यै नमः । ५८०
ॐ दीप्त्यै नमः ।
ॐ तपिन्यै नमः ।
ॐ ताण्डवप्रियायै नमः ।
ॐ उद्भवायै नमः ।
ॐ विरजाराज्ञ्यै नमः ।
ॐ तापन्यै नमः ।
ॐ बिन्दुमालिन्यै नमः ।
ॐ क्षीरधारासुप्रभावायै नमः ।
ॐ लोकमात्रे नमः ।
ॐ सुवर्चलायै नमः । ५९०
ॐ हव्यगर्भायै नमः ।
ॐ आज्यगर्भायै नमः ।
ॐ जुह्वतो यज्ञसम्भवायै नमः ।
ॐ आप्यायन्यै नमः ।
ॐ पावन्यै नमः ।
ॐ दहन्यै नमः ।
ॐ दहनाश्रयायै नमः ।
ॐ मातृकायै नमः ।
ॐ माधव्यै नमः ।
ॐ मुच्यायै नमः । ६००
ॐ मोक्षलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ महर्द्धिदायै नमः ।
ॐ सर्वकामप्रदायै नमः ।
ॐ भद्रायै नमः ।
ॐ सुभद्रायै नमः ।
ॐ सर्वमङ्गलायै नमः ।
ॐ श्वेतायै नमः ।
ॐ सुशुक्लवसनायै नमः ।
ॐ शुक्लमाल्यानुलेपनायै नमः ।
ॐ हंसायै नमः । ६१०
ॐ हीनकर्यै नमः ।
ॐ हंस्यै नमः ।
ॐ हृद्यायै नमः ।
ॐ हृत्कमलालयायै नमः ।
ॐ सितातपत्रायै नमः ।
ॐ सुश्रेण्यै नमः ।
ॐ पद्मपत्रायतेक्षणायै नमः ।
ॐ सावित्र्यै नमः ।
ॐ सत्यसङ्कल्पायै नमः ।
ॐ कामदायै नमः । ६२०
ॐ कामकामिन्यै नमः ।
ॐ दर्शनीयायै नमः ।
ॐ दृश्यादृश्यायै नमः ।
ॐ स्पृश्यायै नमः ।
ॐ सेव्यायै नमः ।
ॐ वराङ्गनायै नमः ।
ॐ भोगप्रियायै नमः ।
ॐ भोगवत्यै नमः ।
ॐ भोगीन्द्रशयनासनायै नमः ।
ॐ आर्द्रायै नमः । ६३०
ॐ पुष्करिण्यै नमः ।
ॐ पुण्यायै नमः ।
ॐ पावन्यै नमः ।
ॐ पापसूदन्यै नमः ।
ॐ श्रीमत्यै नमः ।
ॐ शुभाकारायै नमः ।
ॐ परमैश्वर्यभूतिदायै नमः ।
ॐ अचिन्त्यानन्तविभवायै नमः ।
ॐ भवभावविभावन्यै नमः ।
ॐ निश्रेण्यै नमः । ६४०
ॐ सर्वदेहस्थायै नमः ।
ॐ सर्वभूतनमस्कृतायै नमः ।
ॐ बलायै नमः ।
ॐ बलाधिकायै देव्यै नमः ।
ॐ गौतम्यै नमः ।
ॐ गोकुलालयायै नमः ।
ॐ तोषिण्यै नमः ।
ॐ पूर्णचन्द्राभायै नमः ।
ॐ एकानन्दायै नमः ।
ॐ शताननायै नमः । ६५०
ॐ उद्याननगरद्वारहर्म्योपवनवासिन्यै नमः ।
ॐ कूष्माण्ड्यै नमः ।
ॐ दारुणायै नमः ।
ॐ चण्डायै नमः ।
ॐ किरात्यै नमः ।
ॐ नन्दनालयायै नमः ।
ॐ कालायनायै नमः ।
ॐ कालगम्यायै नमः ।
ॐ भयदायै नमः ।
ॐ भयनाशिन्यै नमः । ६६०
ॐ सौदामिन्यै नमः ।
ॐ मेघरवायै नमः ।
ॐ दैत्यदानवमर्दिन्यै नमः ।
ॐ जगन्मात्रे नमः ।
ॐ अभयकर्यै नमः ।
ॐ भूतधात्र्यै नमः ।
ॐ सुदुर्लभायै नमः ।
ॐ काश्यप्यै नमः ।
ॐ शुभदानायै नमः ।
ॐ वनमालायै नमः । ६७०
ॐ शुभायै नमः ।
ॐ वरायै नमः ।
ॐ धन्यायै नमः ।
ॐ धन्येश्वर्यै नमः ।
ॐ धन्यायै नमः ।
ॐ रत्नदायै नमः ।
ॐ वसुवर्धिन्यै नमः ।
ॐ गान्धर्व्यै नमः ।
ॐ रेवत्यै नमः ।
ॐ गङ्गायै नमः । ६८०
ॐ शकुन्यै नमः ।
ॐ विमलाननायै नमः ।
ॐ इडायै नमः ।
ॐ शान्तिकर्यै नमः ।
ॐ तामस्यै नमः ।
ॐ कमलालयायै नमः ।
ॐ आज्यपायै नमः ।
ॐ वज्रकौमार्यै नमः ।
ॐ सोमपायै नमः ।
ॐ कुसुमाश्रयायै नमः । ६९०
ॐ जगत्प्रियायै नमः ।
ॐ सरथायै नमः ।
ॐ दुर्जयायै नमः ।
ॐ खगवाहनायै नमः ।
ॐ मनोभवायै नमः ।
ॐ कामचारायै नमः ।
ॐ सिद्धचारणसेवितायै नमः ।
ॐ व्योमलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।
ॐ तेजोलक्ष्म्यै नमः । ७००
ॐ सुजाज्वलायै नमः ।
ॐ रसलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ जगद्योनये नमः ।
ॐ गन्धलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ वनाश्रयायै नमः ।
ॐ श्रवणायै नमः ।
ॐ श्रावणीनेत्रायै नमः ।
ॐ रसनाप्राणचारिण्यै नमः ।
ॐ विरिञ्चिमात्रे नमः ।
ॐ विभवायै नमः । ७१०
ॐ वरवारिजवाहनायै नमः ।
ॐ वीर्यायै नमः ।
ॐ वीरेश्वर्यै नमः ।
ॐ वन्द्यायै नमः ।
ॐ विशोकायै नमः ।
ॐ वसुवर्धिन्यै नमः ।
ॐ अनाहतायै नमः ।
ॐ कुण्डलिन्यै नमः ।
ॐ नलिन्यै नमः ।
ॐ वनवासिन्यै नमः । ७२०
ॐ गान्धारिण्यै नमः ।
ॐ इन्द्रनमितायै नमः ।
ॐ सुरेन्द्रनमितायै नमः ।
ॐ सत्यै नमः ।
ॐ सर्वमङ्गलमाङ्गल्यायै नमः ।
ॐ सर्वकामसमृद्धिदायै नमः ।
ॐ सर्वानन्दायै नमः ।
ॐ महानन्दायै नमः ।
ॐ सत्कीर्त्यै नमः ।
ॐ सिद्धसेवितायै नमः । ७३०
ॐ सिनीवाल्यै नमः ।
ॐ कुह्वै नमः ।
ॐ राकायै नमः ।
ॐ अमायै नमः ।
ॐ अनुमत्यै नमः ।
ॐ द्युत्यै नमः ।
ॐ अरुन्धत्यै नमः ।
ॐ वसुमत्यै नमः ।
ॐ भार्गव्यै नमः ।
ॐ वास्तुदेवतायै नमः । ७४०
ॐ मयूर्यै नमः ।
ॐ वज्रवेताल्यै नमः ।
ॐ वज्रहस्तायै नमः ।
ॐ वराननायै नमः ।
ॐ अनघायै नमः ।
ॐ धरण्यै नमः ।
ॐ धीरायै नमः ।
ॐ धमन्यै नमः ।
ॐ मणिभूषणायै नमः ।
ॐ राजश्रीरूपसहितायै नमः । ७५०
ॐ ब्रह्मश्रिये नमः ।
ॐ ब्रह्मवन्दितायै नमः ।
ॐ जयश्रियै नमः ।
ॐ जयदायै नमः ।
ॐ ज्ञेयायै नमः ।
ॐ सर्गश्रियै नमः ।
ॐ स्वर्गत्यै नमः ।
ॐ सुपुष्पायै नमः ।
ॐ पुष्पनिलयायै नमः ।
ॐ फलश्रियै नमः । ७६०
ॐ निष्कलप्रियायै नमः ।
ॐ धनुर्लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ अमिलितायै नमः ।
ॐ परक्रोधनिवारिण्यै नमः ।
ॐ कद्र्वै नमः ।
ॐ धनायवे नमः ।
ॐ कपिलायै नमः ।
ॐ सुरसायै नमः ।
ॐ सुरमोहिन्यै नमः ।
ॐ महाश्वेतायै नमः । ७७०
ॐ महानीलायै नमः ।
ॐ महामूर्त्यै नमः ।
ॐ विषापहायै नमः ।
ॐ सुप्रभायै नमः ।
ॐ ज्वालिन्यै नमः ।
ॐ दीप्त्यै नमः ।
ॐ तृत्यै नमः ।
ॐ व्याप्त्यै नमः ।
ॐ प्रभाकर्यै नमः ।
ॐ तेजोवत्यै नमः । ७८०
ॐ पद्मबोधायै नमः ।
ॐ मदलेखायै नमः ।
ॐ अरुणावत्यै नमः ।
ॐ रत्नायै नमः ।
ॐ रत्नावलीभूतायै नमः ।
ॐ शतधामायै नमः ।
ॐ शतापहायै नमः ।
ॐ त्रिगुणायै नमः ।
ॐ घोषिण्यै नमः ।
ॐ रक्ष्यायै नमः । ७९०
ॐ नर्दिन्यै नमः ।
ॐ घोषवर्जितायै नमः ।
ॐ साध्यायै नमः ।
ॐ अदित्यै नमः ।
ॐ दित्यै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ मृगवाहायै नमः ।
ॐ मृगाङ्कगायै नमः ।
ॐ चित्रनीलोत्पलगतायै नमः ।
ॐ वृतरत्नाकराश्रयायै नमः । ८००
ॐ हिरण्यरजतद्वन्द्वायै नमः ।
ॐ शङ्खभद्रासनस्थितायै नमः ।
ॐ गोमूत्रगोमयक्षीरदधिसर्पिर्जलाश्रयायै नमः ।
ॐ मरीचये नमः ।
ॐ चीरवसनायै नमः ।
ॐ पूर्णचन्द्रार्कविष्टरायै नमः ।
ॐ सुसूक्ष्मायै नमः ।
ॐ निर्वृत्यै नमः ।
ॐ स्थूलायै नमः ।
ॐ निवृत्तारात्यै नमः । ८१०
ॐ मरीच्यै नमः ।
ॐ ज्वालिन्यै नमः ।
ॐ धूम्रायै नमः ।
ॐ हव्यवाहायै नमः ।
ॐ हिरण्यदायै नमः ।
ॐ दायिन्यै नमः ।
ॐ कालिनीसिद्ध्यै नमः ।
ॐ शोषिण्यै नमः ।
ॐ सम्प्रबोधिन्यै नमः ।
ॐ भास्वरायै नमः । ८२०
ॐ संहत्यै नमः ।
ॐ तीक्ष्णायै नमः ।
ॐ प्रचण्डज्वलनोज्ज्वलायै नमः ।
ॐ साङ्गायै नमः ।
ॐ प्रचण्डायै नमः ।
ॐ दीप्तायै नमः ।
ॐ वैद्युत्यै नमः ।
ॐ सुमहाद्युत्यै नमः ।
ॐ कपिलायै नमः ।
ॐ नीलरक्तायै नमः । ८३०
ॐ सुषुम्नायै नमः ।
ॐ विस्फुलिङ्गिन्यै नमः ।
ॐ अर्चिष्मत्यै नमः ।
ॐ रिपुहरायै नमः ।
ॐ दीर्घायै नमः ।
ॐ धूमावल्यै नमः ।
ॐ जरायै नमः ।
ॐ सम्पूर्णमण्डलायै नमः ।
ॐ पूषायै नमः ।
ॐ स्रंसिन्यै नमः । ८४०
ॐ सुमनोहरायै नमः ।
ॐ जयायै नमः ।
ॐ पुष्टिकर्यै नमः ।
ॐ च्छायायै नमः ।
ॐ मानसायै नमः ।
ॐ हृदयोज्ज्वलायै नमः ।
ॐ सुवर्णकरण्यै नमः ।
ॐ श्रेष्ठायै नमः ।
ॐ मृतसञ्जीवन्यै नमः ।
ॐ विशल्यकरण्यै नमः । ८५०
ॐ शुभ्रायै नमः ।
ॐ सन्धिन्यै नमः ।
ॐ परमौषध्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मिष्ठायै नमः ।
ॐ ब्रह्मसहितायै नमः ।
ॐ ऐन्दव्यै नमः ।
ॐ रत्नसम्भवायै नमः ।
ॐ विद्युत्प्रभायै नमः ।
ॐ बिन्दुमत्यै नमः ।
ॐ त्रिस्वभावगुणायै नमः । ८६०
ॐ अम्बिकायै नमः ।
ॐ नित्योदितायै नमः ।
ॐ नित्यदृष्टायै नमः ।
ॐ नित्यकामायै नमः ।
ॐ करीषिण्यै नमः ।
ॐ पद्माङ्कायै नमः ।
ॐ वज्रजिह्वायै नमः ।
ॐ वक्रदण्डायै नमः ।
ॐ विभासिन्यै नमः ।
ॐ विदेहपूजितायै नमः । ८७०
ॐ कन्यायै नमः ।
ॐ मायायै नमः ।
ॐ विजयवाहिन्यै नमः ।
ॐ मानिन्यै नमः ।
ॐ मङ्गलायै नमः ।
ॐ मान्यायै नमः ।
ॐ मानिन्यै नमः ।
ॐ मानदायिन्यै नमः ।
ॐ विश्वेश्वर्यै नमः ।
ॐ गणवत्यै नमः । ८८०
ॐ मण्डलायै नमः ।
ॐ मण्डलेश्वर्यै नमः ।
ॐ हरिप्रियायै नमः ।
ॐ भौमसुतायै नमः ।
ॐ मनोज्ञायै नमः ।
ॐ मतिदायिन्यै नमः ।
ॐ प्रत्यङ्गिरायै नमः ।
ॐ सोमगुप्तायै नमः ।
ॐ मनोभिज्ञायै नमः ।
ॐ वदन्मत्यै नमः । ८९०
ॐ यशोधरायै नमः ।
ॐ रत्नमालायै नमः ।
ॐ कृष्णायै नमः ।
ॐ त्रैलोक्यबन्धिन्यै नमः ।
ॐ अमृतायै नमः ।
ॐ धारिण्यै नमः ।
ॐ हर्षायै नमः ।
ॐ विनतायै नमः ।
ॐ वल्लक्यै नमः ।
ॐ शच्यै नमः । ९००
ॐ सङ्कल्पायै नमः ।
ॐ भामिन्यै नमः ।
ॐ मिश्रायै नमः ।
ॐ कादम्बर्यै नमः ।
ॐ अमृतायै नमः ।
ॐ प्रभायै नमः ।
ॐ आगतायै नमः ।
ॐ निर्गतायै नमः ।
ॐ वज्रायै नमः ।
ॐ सुहितायै नमः । ९१०
ॐ सहितायै नमः ।
ॐ अक्षतायै नमः ।
ॐ सर्वार्थसाधनकर्यै नमः ।
ॐ धातवे नमः ।
ॐ धारणिकायै नमः ।
ॐ अमलायै नमः ।
ॐ करुणाधारसम्भूतायै नमः ।
ॐ कमलाक्ष्यै नमः ।
ॐ शशिप्रियायै नमः ।
ॐ सौम्यरूपायै नमः । ९२०
ॐ महादीप्तायै नमः ।
ॐ महाज्वालायै नमः ।
ॐ विकासिन्यै नमः ।
ॐ मालायै नमः ।
ॐ काञ्चनमालायै नमः ।
ॐ सद्वज्रायै नमः ।
ॐ कनकप्रभायै नमः ।
ॐ प्रक्रियायै नमः ।
ॐ परमायै नमः ।
ॐ योक्त्र्यै नमः । ९३०
ॐ क्षेभिकायै नमः ।
ॐ सुखोदयायै नमः ।
ॐ विजृम्भणायै नमः ।
ॐ वज्राख्यायै नमः ।
ॐ श‍ृङ्खलायै नमः ।
ॐ कमलेक्षणायै नमः ।
ॐ जयङ्कर्यै नमः ।
ॐ मधुमत्यै नमः ।
ॐ हरितायै नमः ।
ॐ शशिन्यै नमः । ९४०
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ मूलप्रकृत्यै नमः ।
ॐ ईशानायै नमः ।
ॐ योगमात्रे नमः ।
ॐ मनोजवायै नमः ।
ॐ धर्मोदयायै नमः ।
ॐ भानुमत्यै नमः ।
ॐ सर्वाभासायै नमः ।
ॐ सुखावहायै नमः ।
ॐ धुरन्धरायै नमः । ९५०
ॐ बालायै नमः ।
ॐ धर्मसेव्यायै नमः ।
ॐ तथागतायै नमः ।
ॐ सुकुमारायै नमः ।
ॐ सौम्यमुख्यै नमः ।
ॐ सौम्यसम्बोधनायै नमः ।
ॐ उत्तमायै नमः ।
ॐ सुमुख्यै नमः ।
ॐ सर्वतोभद्रायै नमः ।
ॐ गुह्यशक्त्यै नमः । ९६०
ॐ गुहालयायै नमः ।
ॐ हलायुधायै नमः ।
ॐ कावीरायै नमः ।
ॐ सर्वशास्त्रसुधारिण्यै नमः ।
ॐ व्योमशक्त्यै नमः ।
ॐ महादेहायै नमः ।
ॐ व्योमगायै नमः ।
ॐ मधुमन्मय्यै नमः ।
ॐ गङ्गायै नमः ।
ॐ वितस्तायै नमः । ९७०
ॐ यमुनायै नमः ।
ॐ चन्द्रभागायै नमः ।
ॐ सरस्वत्यै नमः ।
ॐ तिलोत्तमायै नमः ।
ॐ ऊर्वश्यै नमः ।
ॐ रम्भायै नमः ।
ॐ स्वामिन्यै नमः ।
ॐ सुरसुन्दर्यै नमः ।
ॐ बाणप्रहरणायै नमः ।
ॐ बालायै नमः । ९८०
ॐ बिम्बोष्ठ्यै नमः ।
ॐ चारुहासिन्यै नमः ।
ॐ ककुद्मिन्यै नमः ।
ॐ चारुपृष्ठायै नमः ।
ॐ दृष्टादृष्टफलप्रदायै नमः ।
ॐ काम्याचार्यै नमः ।
ॐ काम्यायै नमः ।
ॐ कामाचारविहारिण्यै नमः ।
ॐ हिमशैलेन्द्रसङ्काशायै नमः ।
ॐ गजेन्द्रवरवाहनायै नमः । ९९०
ॐ अशेषसुखसौभाग्यसम्पदां योनये नमः ।
ॐ उत्तमायै नमः ।
ॐ सर्वोत्कृष्टायै नमः ।
ॐ सर्वमय्यै नमः ।
ॐ सर्वायै नमः ।
ॐ सर्वेश्वरप्रियायै नमः ।
ॐ सर्वाङ्गयोन्यै नमः ।
ॐ अव्यक्तायै नमः ।
ॐ सम्प्रदानेश्वरेश्वर्यै नमः ।
ॐ विष्णुवक्षःस्थलगतायै नमः । १०००

इति श्रीकमलासहस्रनामावलिः सम्पूर्णा ॥
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02..🌷🌷🌷श्रीकमलाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् 🌷🌷

श्रीशिव उवाच
शतमष्टोत्तरं नाम्नां कमलाया वरानने ।
प्रवक्ष्याम्यतिगुह्यं हि न कदापि प्रकाशयेत् ॥ १॥

महामाया महालक्ष्मीर्महावाणी महेश्वरी ।
महादेवी महारात्रिर्महिषासुरमर्दि नी ॥ २॥

कालरात्रिः कुहूः पूर्णा नन्दाऽऽद्या भद्रिका निशा ।
जया रिक्ता महाशक्तिर्देवमाता कृशोदरी ॥ ३॥

शचीन्द्राणी शक्रनुता शङ्करप्रियवल्लभा ।
महावराहजननी मदनोन्मथिनी मही ॥ ४॥

वैकुण्ठनाथरमणी विष्णुवक्षःस्थलस्थिता ।
विश्वेश्वरी विश्वमाता वरदाऽभयदा शिवा ॥ ५॥

शूलिनी चक्रिणी मा च पाशिनी शङ्खधारिणी ।
गदिनी मुण्डमाला च कमला करुणालया ॥ ६॥

पद्माक्षधारिणी ह्यम्बा महाविष्णुप्रियङ्करी ।
गोलोकनाथरमणी गोलोकेश्वरपूजिता ॥ ७॥

गया गङ्गा च यमुना गोमती गरुडासना ।
गण्डकी सरयूस्तापी रेवा चैव पयस्विनी ॥ ८॥

नर्मदा चैव कावेरी केदारस्थलवासिनी ।
किशोरी केशवनुता महेन्द्रपरिवन्दिता ॥ ९॥

ब्रह्मादिदेवनिर्माणकारिणी वेदपूजिता ।
कोटिब्रह्माण्डमध्यस्था कोटिब्रह्माण्डकारिणी ॥ १०॥

श्रुतिरूपा श्रुतिकरी श्रुतिस्मृतिपरायणा ।
इन्दिरा सिन्धुतनया मातङ्गी लोकमातृका ॥ ११॥

त्रिलोकजननी तन्त्रा तन्त्रमन्त्रस्वरूपिणी ।
तरुणी च तमोहन्त्री मङ्गला मङ्गलायना ॥ १२॥

मधुकैटभमथनी शुम्भासुरविनाशिनी ।
निशुम्भादि हरा माता हरिशङ्करपूजिता ॥ १३॥

सर्वदेवमयी सर्वा शरणागतपालिनी ।
शरण्या शम्भुवनिता सिन्धुतीरनिवासिनी ॥ १४॥

गन्धर्वगानरसिका गीता गोविन्दवल्लभा ।
त्रैलोक्यपालिनी तत्त्वरूपा तारुण्यपूरिता ॥ १५॥

चन्द्रावली चन्द्रमुखी चन्द्रिका चन्द्रपूजिता ।
चन्द्रा शशाङ्कभगिनी गीतवाद्यपरायणा ॥ १६॥

सृष्टिरूपा सृष्टिकरी सृष्टिसंहारकारिणी ।
इति ते कथितं देवि रमानामशताष्टकम् ॥ १७॥

त्रिसन्ध्यं प्रयतो भूत्वा पठेदेतत्समाहितः ।
यं यं कामयते कामं तं तं प्राप्नोत्यसंशयम् ॥ १८॥

इमं स्तवं यः पठतीह मर्त्यो वैकुण्ठपत्न्याः परसादरेण ।
धनाधिपाद्यैः परिवन्दितः स्यात् प्रयास्यति श्रीपदमन्तकाले ॥ १९॥

इति श्रीकमलाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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