03/04/2017
एक अंग्रेज़ी गाना है - आई एम किसिंग यू। बढ़िया गाना है। ऊपी का रोमियो भी किस करना चाहता है, जूलियट भी चाहती है। लेकिन कहाँ करे। अपने घर में? जूलियट के घर में? वहाँ तो कोई स्कोप नहीं है। स्कूल में? वहाँ भी कोई स्कोप नहीं। सड़कों पर, किसी झील के किनारे? समाज की आँखें सजग हैं। कहीं कोई स्कोप नहीं।
होटल में कमरा लेने के पैसे नहीं। वे पार्क पहुँचते हैं। किसी झाड़ की आड़ में बैठते हैं। वहाँ पुलिस आ टपकती है। छुप के इसलिए करते हैं लगता है जैसे कोई अपराध करने जा रहे हों। अपराध ही ठैरा। दोनों ने अपने-अपने माँ-बाप को कभी एक दूसरे को बाँहों में लेते नहीं देखा, चूमते हुए देखना तो बहुत दूर की बात है। स्त्री पुरुष संबंध क्या होते हैं वे क्या जानें।

बचपन में पता चला था कि भगवान जी की वजह से बच्चा हो जाता है, बाद में लगा नहीं, कुछ ऐसा नहीं। बस, इतना समझ आया कि रात के अँधेरे में कोई सर्जिकल स्ट्राइक होती है और बच्चे हो जाते हैं, और बस इत्ता ही होता है स्त्री-पुरुष संबंध। लड़का मसें भींजने के साथ अँधेरे में छाती पर हाथ मारना, दबोच लेना टाइप शिक्षा तो अपने सीनियरों से पा लेता है, इससे अधिक परिवार से उसे कुछ ज्ञान नहीं मिल पाता, न स्कूल में कि किसी स्त्री से कैसे व्यवहार किया जाए।
ऐसे पिछड़े परिवेश से आने वाले लड़कों से समझदार लोग कहते हैं - ऐ नालायक, प्रेम महज देह नहीं और यदि प्रेम करते हो तो बग़ावत कर डालो। लड़का, न लड़की, समझ नहीं पाते किससे बग़ावत करें। समझदार कहता है- ग़र बग़ावत नहीं कर सकते तो डूब मरो चुल्लू भर पानी में। चुल्लू भर पानी में डूबना संभव नहीं तो एक दिन रोमियो जूलियट फाँसी खा लेते हैं या किसी नदी में डूब मरते हैं हिंदुस्तान में। इति वार्ता हो जाता है, समाज की संस्कृति बची रह जाती है। समझदार की बात भी सही साबित हो जाती है कि ये जनता ही मूरख व कायर है।
जो स्पेस हम अपने नौजवानों का छीन रहे हैं, फ्री सेक्स, देह की भूख टाइप फ़ालतू बातें करके, हम नहीं जानते हम कितने असामान्य इंसान तैयार कर रहे हैं। स्त्रियों की तो मुझे नहीं पता, लेकिन पुरुषों में जिन पुरुषों को स्त्रियों का सानिध्य मिला यानी स्त्री का एक इंसान के रूप में सहज स्वाभाविक सानिध्य मिला। जिन्होंने प्रेम किया। जिनके जीवन में कम पाबंदियाँ रहीं।
ब्रह्मचर्य के नाम पर पैंतीस-चालीस बरस तक ब्याह होने तक ज