Mahatma Gandhi Antarrashtriya Hindi Vishwavidyalaya

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हिंदी विवि में विभाजन विभीषिका स्‍मृति दिवस पर हुआ विशेष व्‍याख्‍यानविभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का हुआ उद्घाटनमहात्‍मा गां...
17/08/2026

हिंदी विवि में विभाजन विभीषिका स्‍मृति दिवस पर हुआ विशेष व्‍याख्‍यान

विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का हुआ उद्घाटन

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में विभाजन विभीषिका स्‍मृति दिवस पर विशेष व्‍याख्‍यान का आयोजन किया गया। भारत विभाजन के दौरान हुई मानवीय त्रासदी, विस्‍थापन एवं पीड़ा को स्‍मरण करते हुए नई पीढ़ी को उस दौर के ऐतिहासिक अनुभवों से अवगत कराना तथा राष्‍ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता एवं आपसी सद्भाव के महत्‍व को रेखांकित करना इस आयोजन का उद्देश्‍य था। इस अवसर पर वाचस्‍पति भवन में विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।

महादेवी वर्मा सभागार में आयोजित व्‍याख्‍यान में मुख्‍य अतिथि राष्‍ट्रसंत तुकडोजी महाराज विश्‍वविद्यालय, नागपुर के सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. शामराव कोरेटी ने संबोधित किया। उन्‍होंने कहा कि विभाजन के कारण लाखों महिला, पुरूषों का संहार हुआ और कई लोग इस भयानक त्रासदी के शिकार बने। विभाजन की घोषणा 03 जून 1947 को हुई परंतु इसका कोई सटीक विश्‍लेषण नहीं हो पाया। उन्‍होंने देश के कई हिस्‍सों में विभाजन को लेकर हुई नरसंहार की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना रक्‍तरंजीत इतिहास की याद दिलाती है। उन्‍होंने कहा कि हमें आज़ादी की भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्‍होंने विभाजन में मारे गए लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके द्वारा दी गयी कुर्बानी का स्‍मरण किया।

कार्यक्रम की अध्‍यक्षता साहित्‍य विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने की। उन्‍होंने अखंड भारत के लिए भाईचारा और शांति के द्वारा काम करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का प्रारंभ कुलगीत से तथा समापन राष्‍ट्रगीत एवं राष्‍टगान से किया गया। कार्यक्रम का संचालन संगोष्‍ठी के संयोजन डॉ. बालाजी चिरडे ने किया। इस अवसर पर प्रो. प्रीति सागर, डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी, डॉ. रामानुज अस्‍थाना, डॉ. राकेश मिश्र, डॉ. राजेश लेहकपुरे, डॉ. जयंत उपाध्‍याय, डॉ. राम प्रकाश यादव, डॉ. संदीप सपकाले, डॉ. शैलेश मरजी कदम, डॉ. रूपेश कुमार सिंह, डॉ. रेणु सिंह, डॉ. मुन्नालाल गुप्‍ता, डॉ. मीरा निचळे, डॉ. सूर्य प्रकाश पाण्‍डेय, डॉ. कोमल कुमार परदेशी, डॉ. रणंजय कुमार सिंह, बी.एस. मिरगे सहित बड़ी संख्‍या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

#विभाजन_विभीषिका

हिंदी विश्वविद्यालय में उल्लास के साथ मनाया गया स्वतंत्रता दिवस  हमें स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए...
15/08/2026

हिंदी विश्वविद्यालय में उल्लास के साथ मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

हमें स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए : कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा

वर्धा, 15 अगस्त 2026: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह उल्लास एवं उमंग के साथ मनाया गया।‌ वाचस्पति भवन के प्रांगण में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने ध्वजारोहण किया। उन्होंने उपस्थितों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी का भी निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित आजादी के लिए योगदान देने वाले तमाम महापुरुषों एवं सेनानियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने योगदान से शक्ति और दृष्टि का परिचय दिया।स्वाधीनता आंदोलन के युद्ध में असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान रहा है। कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता की जिम्मेदारी हमारी भावी पीढ़ी पर है। उन्होंने आह्वान किया कि हमें स्वतंत्रता का इस्तेमाल विवेक और अत्यंत जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। अनेकों के बलिदान से मिली आजादी को हमें सजग रहकर अक्षुण्ण रखना चाहिए और हमें हमारी एकता पर कही आच नहीं आने देनी चाहिए। वंदे मातरम् गीत के लिखे जाने की कहानी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह गीत सन 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा। स्वाधीनता आंदोलन में यह गीत देश के जागरण का मंत्र, उत्स और भारत माता की मुक्ति का शंखनाद बन गया था। हमें युवा पीढ़ी को इस गीत का महत्व बताना चाहिए।

विकसित भारत-2047 को साकार करने में युवाओं की भूमिका के संबंध में कुलपति ने कहा कि विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। ‌विकसित भारत का लक्ष्य युवा शक्ति को साथ लेकर हासिल किया जा सकता है। युवा शक्ति से ऊर्जावान इस देश की भावी पीढ़ी के कंधों पर बहुत बड़ा दायित्व है। हम भूमंडलीकरण के दौर में तेजी से बदलाव की ओर बढ़ रहे हैं। प्रौद्योगिकी, डिजिटलीकरण, ए आई, अंतरिक्ष विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में आ रही चुनौतियों को हम अवसर में परिवर्तित कर रहे हैं। यही कारण है कि आज हर गांव और हर किसान डिजिटलीकरण से जुड़ रहा है। अपने उद्बोधन के अंत में कुलपति ने कहा कि हम ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

ध्वजारोहण समारोह के प्रारंभ में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने महात्मा गांधी एवं बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर अभिवादन किया।‌ ध्वजारोहण समारोह के दौरान राष्ट्रगीत बजाया गया। राष्ट्रध्वज फहराने बाद ने सुरक्षा कर्मियों के बैंड समूह ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया तथा राष्ट्रीय कैडेट कोर के छात्रों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

ध्वजारोहण के अवसर पर मंच पर कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र गादेवार, वित्ताधिकारी पी. सरदार सिंह, अधिष्ठातागण प्रो. हनुमानप्रसाद शुक्ल, प्रो. अवधेश कुमार, प्रो. गोपाल कृष्ण ठाकुर, प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी, पुस्तकालय अध्यक्ष मैत्रेयी घोष, एनसीसी के एसोसिएट ऑफिसर अनिकेत आंबेकर, सुरक्षा अधिकारी आर. बी. डोंगरे की उपस्थिति रही। इस अवसर पर शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।‌

#स्वतंत्रता #स्वतंत्रता_दिवस

सामाजिक बदलाव की दिशा में संवाद का नया अध्याय : ‘सेवा संकल्प-2026’ का आयोजन गुरुवार कोवर्धा, 12 अगस्‍त 2026 : महात्मा गा...
12/08/2026

सामाजिक बदलाव की दिशा में संवाद का नया अध्याय : ‘सेवा संकल्प-2026’ का आयोजन गुरुवार को

वर्धा, 12 अगस्‍त 2026 : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के वर्धा समाज कार्य संस्थान एवं सामाजिक नीति अनुसंधान प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में ‘सेवा संकल्प-2026’ के अंतर्गत संवाद बैठक का आयोजन गुरुवार, 13 अगस्त को प्रातः10:30 बजे किया जा रहा है।

वर्धा समाज कार्य संस्थान के निदेशक प्रो. के. बालराजु ने बताया कि इस संवाद बैठक का उद्देश्य सामाजिक सेवा, समाज कार्य तथा सामाजिक नीति के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के साथ संवाद एवं समन्वय स्थापित करना है। बैठक में विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ सामाजिक विकास, जनकल्याण एवं सेवा कार्यों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा करेंगी। संयोजक के रूप में वर्धा समाज कार्य संस्थान के सहायक प्रोफेसर डॉ. शिवसिंह बघेल सहित संबंधित प्रतिनिधि सहभागिता करेंगे।

प्रो. बालराजु ने कहा कि समाज कार्य शिक्षा को व्यवहारिक सामाजिक सरोकारों से जोड़ने तथा सामाजिक संस्थाओं के साथ सहयोगात्मक कार्य को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण है। संवाद बैठक के माध्यम से सामाजिक सेवा के क्षेत्र में नई संभावनाओं, साझेदारी और प्रभावी हस्तक्षेपों पर चर्चा की जाएगी।

हिंदी विवि में भवन्स लॉयड्स विद्या निकेतन के छात्रों का शैक्षणिक भ्रमणमहात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय म...
10/08/2026

हिंदी विवि में भवन्स लॉयड्स विद्या निकेतन के छात्रों का शैक्षणिक भ्रमण

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में भवन्स लॉयड्स विद्या निकेतन, भूगांव के विद्यार्थियों ने शुक्रवार, 07 अगस्‍त को शैक्षणिक भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने स्‍वामी सहजानंद सरस्‍वती संग्रहालय में राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्‍य में ‘अखिल भारतीय शिक्षा समागम 2026’ के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। भवन्स लॉयड्स विद्या निकेतन की प्राचार्या कीर्ति मिश्रा के मार्गदर्शन में अध्यापक योगेंद्र बाहे, शकुंतला यादव, अंजना ठाकुर सहित 80 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रदर्शन को देख कर भारतीय ज्ञान परंपरा में साहित्‍यकारों के विचारों, कृतियों और उनके योगदान को जाना। उन्‍हें संग्रहालय प्रभारी डॉ. अमित विश्‍वास ने संग्रहालय में संरक्षित हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों, ग्रंथों आदि के बारे में अवगत कराया। संग्रहालय में 19वीं सदी से अब तक की ऐतिहासिक महत्त्व की पत्रिकाएँ और पांडुलिपियाँ सुरक्षित हैं। इन कृतियों को देखने और पढ़ने का अनुभव साहित्य इतिहास के जीवंत स्पर्श का एहसास कराता है। संग्रहालय में तुलसीदास रचित हनुमान बाहुक, विजय दोहावली, विनयपत्रिका सटीक, षोड्श रामायण, कुंडलिया रामायण आदि की पांडुलिपियों को संरक्षित की गई हैं। हिंदी की साहित्यिक धरोहर के माध्‍यम से भारतीय ज्ञान परंपरा का विकास करने के उद्देश्‍य से संग्रहालय में उपलब्‍ध सामग्री की प्रदर्शनी लगायी गई।

प्रदर्शनी को वर्धा स्थित विभिन्‍न स्‍कूलों और महाविद्यालयों के अध्‍यापकों एवं विद्यार्थियों ने भेंट दी। प्रदर्शनी में प्रदर्शित की गयी दुर्लभ पांडुलिपियों और ग्रंथों का अवलोकन कर सभी ने इस प्रकार के अनूठे आयोजन की सराहना की।

अखिल भारतीय शिक्षा समागम के तहत हिंदी विश्वविद्यालय में कला योग उत्सव का हुआ आयोजनवर्धा, 07 अगस्‍त, 2026 : महात्‍मा गांध...
07/08/2026

अखिल भारतीय शिक्षा समागम के तहत हिंदी विश्वविद्यालय में कला योग उत्सव का हुआ आयोजन

वर्धा, 07 अगस्‍त, 2026 : महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्‍य में अखिल भारतीय शिक्षा समागम 2026 के तहत कला योग उत्सव का आयोजन गुरुवार, 06 अगस्‍त को ग़ालिब सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ाना व योग के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता फैलाना था। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि व कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रदर्शनकारी कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश भारती ने किया। कार्यक्रम का प्रारंभ सहायक प्रोफेसर डॉ. तेजस्वी एच.आर. और उनकी टीम ने मृदुल हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से हुआ। इस अवसर पर दस रागों भैरव से भैरवी तक की प्रस्तुति दी तो पूरा वातावरण एक अलौकिक शक्ति और ऊर्जा से भर गया, जिसमें उन्होंने जागो मोहन प्यारे, इतनी शक्ति हमें दे न दाता जैसे गीत गाये। उनके साथ तबले पर जीवन बांगडे ने तथा गायन में विद्यार्थी विजय महेश गौरी, प्रांजलि गायकवाड, रिद्धि लेकुरवाळे ने सहयोग किया।

प्रदर्शनकारी कला विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. विधु खरे दास के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों द्वारा ‘योग प्रवाह’ विषय पर लघु नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक का लेखन एवं निर्देशन प्रदर्शनकारी कला विभाग के शोधार्थी उत्कर्ष उपेन्द्र सहस्त्रबुद्धे ने किया। नाटक के सूत्रधार मनीष कुमार थे। नाटक में जनार्दन दीक्षित ने आदियोगी शिव का, अंकिता कुशवाहा ने माता पार्वती का, कार्तिक बनवारी ने ऋषि पतंजलि का एवं विशाल परिहार, रमज़ान, अमित कुमार पटेल, रवि राज ने ऋषि एवं शिष्य के किरदार में भगवान शिव और पार्वती के वार्तालाप से योग की महत्ता को दर्शाया।

योग नृत्य की प्रस्तुति में विद्यार्थियों ने योग के विभिन्न आसन-मुद्राओं को प्रस्तुत किया। नृत्य में कपिल बहादुरे, संघमित्रा पंत, संगम कुमारी, सलोनी स्वाती कुमारी, शिया, षडानन दुआन, उमाकांत जेना ने सहभागिता की।

कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि कला खाली आकाश के लिए प्रकाश में जमीन तैयार करती है, ताकि रोशनियां नए सत्य को जन्म दे सके। उन्‍होंने विद्यार्थियों की प्रस्‍तुतियों की सराहना की। इस अवसर पर अधिष्‍ठाता, अध्‍यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों की बड़ी संख्‍या में उपस्थिति रही।

गांधी ने जो काम राजनीति के माध्यम से किया, प्रेमचंद ने वही काम साहित्य के द्वारा किया : प्रो. हितेंद्र मिश्रहिंदी विश्वव...
07/08/2026

गांधी ने जो काम राजनीति के माध्यम से किया, प्रेमचंद ने वही काम साहित्य के द्वारा किया : प्रो. हितेंद्र मिश्र

हिंदी विश्वविद्यालय में प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर विशेष व्याख्यान में साहित्य, समाज और राष्ट्रीयता के विकास में प्रेमचंद के योगदान पर हुआ गंभीर विमर्श

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर ‘प्रेमचंद का साहित्यिक अवदान’ विषय पर विशेष व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. हितेंद्र मिश्र ने कहा कि गांधी ने जो काम राजनीति में किया, प्रेमचंद ने वही काम साहित्य में किया। प्रेमचंद ने केवल साहित्य नहीं लिखा बल्कि भारतीय समाज को देखने की दृष्टि प्रदान की। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने किसान, मजदूर, स्त्री, दलित और वंचित समाज की पीड़ा को साहित्य के केंद्र में स्थापित किया। उन्होंने साहित्य को सत्ता, वैभव और कल्पना की दुनिया से निकालकर खेतों, खलिहानों, चौपालों, झोपड़ियों और सामान्य मनुष्य के जीवन तक पहुँचाया। यही कारण है कि प्रेमचंद आज भी भारतीय समाज की सबसे प्रासंगिक आवाज़ हैं। वे हमारे अतीत ही नहीं बल्कि वर्तमान हैं और हम उनमें अपना भविष्य भी देख सकते हैं। प्रेमचंद सजग लेखक थे। वे विश्व साहित्य में मानक बनकर खड़े नजर आते हैं।

प्रो. मिश्र ने कहा कि बाजारवाद के दौर में साहित्य की गंभीरता लगातार कम होती जा रही है जबकि प्रेमचंद का साहित्य धैर्य, गंभीर अध्ययन, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदना का पाठ पढ़ाता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे प्रेमचंद के साहित्य को सामाजिक परिवर्तन के दस्तावेज़ के रूप में पढ़ें। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में अन्याय, शोषण और विषमता मौजूद है, तब तक प्रेमचंद हमारे समकालीन बने रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। उन्होंने विकसित भारत की अवधारणा को प्रेमचंद के साहित्य से जोड़ते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी मानवीय मूल्यों और सामाजिक चेतना का सशक्त आधार है। प्रेमचंद अपने समय से आगे देखने वाले युगद्रष्टा साहित्यकार थे। ‘सोजे वतन’ और ‘दुनिया का सबसे अनमोल रतन’ जैसी उनकी तमाम रचनाएं हमें बताती हैं कि वे राष्ट्रीय चेतना के सच्चे अर्थों में संवाहक थे। प्रो. शर्मा ने प्रेमचंद द्वारा दी गई साहित्य की प्रसिद्ध परिभाषा ‘साहित्य जीवन की आलोचना है’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कथन आज भी उतना ही सार्थक है, जितना उनके समय में था। वस्तुतः प्रेमचंद का साहित्य आज भी सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय पुनर्जागरण की सबसे विश्वसनीय अभिव्यक्ति है। प्रेमचंद ने जीवन के मर्म को जाना और सहजता से उसे प्रस्तुत किया। यही उन्हें महान रचनाकार बनाता है। यह आयोजन राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्‍य में ‘अखिल भारतीय शिक्षा समागम 2026’ के तहत किया गया।

महादेवी वर्मा सभागार में आयोजित कार्यक्रम में स्वागत एवं प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए हिंदी साहित्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. अवधेश कुमार ने कहा कि प्रेमचंद ने कथाकार, उपन्यासकार, निबंधकार, पत्रकार, संपादक, अनुवादक और विचारक के रूप में साहित्य, भाषा, पत्रकारिता, समाज, राजनीति और संस्कृति से जुड़े प्रश्नों पर गंभीर वैचारिक हस्तक्षेप किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ ने किया तथा डॉ. अशोकनाथ त्रिपाठी ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का आरंभ प्रेमचंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि, दीप प्रज्ज्वलन तथा कुलगीत गायन से हुआ। इस आयोजन में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी-विद्यार्थी तथा साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

21 महाराष्ट्र बटालियन एनसीसी, वर्धा के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल जैसिंतो ने हिंदी विश्वविद्यालय की एनसीसी इकाई का किया निरीक्...
07/08/2026

21 महाराष्ट्र बटालियन एनसीसी, वर्धा के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल जैसिंतो ने हिंदी विश्वविद्यालय की एनसीसी इकाई का किया निरीक्षण

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की एनसीसी इकाई का निरीक्षण 21 महाराष्ट्र बटालियन एनसीसी, वर्धा के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल जैसिंतो द्वारा गुरुवार, 06 अगस्‍त को किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत कर्नल जैसिंतो ने विश्वविद्यालय के एनसीसी कार्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कार्यालयीन अभिलेखों, कैडेट नामांकन संबंधी दस्तावेजों एवं एनसीसी इकाई की विभिन्न गतिविधियों तथा उपलब्ध व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। निरीक्षण के उपरांत उन्होंने विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा से शिष्टाचार भेंट की तथा विश्वविद्यालय में संचालित एनसीसी गतिविधियों एवं भावी योजनाओं पर चर्चा की। अपनी भेंट के दौरान कर्नल जैसिंतो ने एनसीसी कैडेट्स के साथ संवाद करते हुए उन्हें अनुशासन, नेतृत्व, राष्ट्रसेवा एवं व्यक्तित्व विकास के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कैडेट्स को एनसीसी प्रशिक्षण का पूर्ण लाभ उठाने तथा अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण हेतु शुभकामनाएँ प्रदान की।

इस अवसर पर एनसीसी लेफ्टिनेंट एवं एसोसिएट एनसीसी ऑफिसर डॉ. अनिकेत अनिल आंबेकर, जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे, हिंदी अधिकारी राजेश यादव, सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रीति खोड़े, परेड इंस्ट्रक्टर आकाश मंदाडे, कर्मी सचिन नाखले, भूषण सालवे उपस्थित रहे। यह निरीक्षण विश्वविद्यालय की एनसीसी इकाई के प्रभावी संचालन, अनुशासन तथा प्रशिक्षण गतिविधियों के मूल्यांकन एवं सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।

भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित प्रदर्शनी का शिक्षकों, विद्यार्थियों ने किया अवलोकनमहात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्व...
07/08/2026

भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित प्रदर्शनी का शिक्षकों, विद्यार्थियों ने किया अवलोकन

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के सहजानंद सरस्‍वती संग्रहालय में राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्‍य में ‘अखिल भारतीय शिक्षा समागम 2026’ के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित त्रिदिवसीय (04-06 अगस्‍त, 2026) प्रदर्शनी के दूसरे दिन वर्धा के रमाबाई देशमुख पब्लिक स्कूल, वर्धा के अध्यापक आरती महाजन, रीना अम्बुलकर, संदीप दरने सहित 47 छात्रा एवं 68 छात्रों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा से पूजा लोहिया, नाहिद शेख, निरूता कोसम, रेमी, पेले, एसे और विश्वविद्यालय के डॉ. अंजनी राय, डॉ. सीमा बर्गट, पूनम कुमारी, शिक्षा यादव, विद्यानंद कुमार, बलवंत कुमार, राहुल, अतुल अवथरे सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

स्‍वामी सहजानंद सरस्‍वती संग्रहालय के प्रभारी डॉ. अमित विश्‍वास ने संग्रहालय में संरक्षित हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों, ग्रंथों आदि के बारे में अवगत कराया। संग्रहालय में 19वीं सदी से अब तक की ऐतिहासिक महत्त्व की पत्रिकाएँ और पांडुलिपियाँ सुरक्षित हैं। इन कृतियों को देखने और पढ़ने का अनुभव साहित्य इतिहास के जीवंत स्पर्श का एहसास कराता है। संग्रहालय में तुलसीदास रचित हनुमान बाहुक, विजय दोहावली, विनयपत्रिका सटीक, षोड्श रामायण, कुंडलिया रामायण आदि की पांडुलिपियों को संरक्षित की गई हैं। हिंदी की साहित्यिक धरोहर के माध्‍यम से भारतीय ज्ञान परंपरा का विकास करने के उद्देश्‍य से संग्रहालय में उपलब्‍ध सामग्री की प्रदर्शनी लगायी गई है।

प्रदर्शनी के दौरान सहायक प्रोफेसर डॉ अनिर्बाण घोष, जनसंपर्क अधिकारी बी एस मिरगे, हर्ष आनंद, शिया, प्रियांशु, नयन आड़े ने सहयोग किया।

हिंदी विश्वविद्यालय के रिद्धपुर केंद्र पर महानुभाव साहित्य की प्रदर्शनी व डिजिटल पुस्तकालय का हुआ शुभारंभभारतीय ज्ञान पर...
07/08/2026

हिंदी विश्वविद्यालय के रिद्धपुर केंद्र पर महानुभाव साहित्य की प्रदर्शनी व डिजिटल पुस्तकालय का हुआ शुभारंभ

भारतीय ज्ञान परंपरा की विरासत से विद्यार्थी जुड़े - कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा

भारतीय ज्ञान परंपरा को तकनीकी के साथ जोड़कर वैश्विक आवश्यकता देखते हुए उसे ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ में शामिल किया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को विद्यार्थियों में साझा करें जिससे विद्यार्थी देश के वर्तमान से जुड़े और भविष्य की आकांशाओं को पूरा कर सके, यह वक्तव्य महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने बुधवार, 5 अगस्त को विश्वविद्यालय के सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी मराठी भाषा तथा तत्वज्ञान अध्ययन केंद्र, रिद्धपुर (अमरावती) में आयोजित ‘महानुभाव साहित्य की प्रदर्शनी’ के उद्घाटन के अवसर पर दिया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को छह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय शिक्षा समागम के तहत महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी मराठी भाषा तथा तत्वज्ञान अध्ययन केंद्र, रिद्धपुर (अमरावती) द्वारा 5 अगस्त को ‘महानुभाव साहित्य की प्रदर्शनी’ में उद्घाटक तथा कार्यक्रम की अध्यक्ष के रूप में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा बोल रही थी। उन्होंने अपने वक्तव्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को शिक्षा क्षेत्र का एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बताया, जो शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तन कर रहा है। उन्होंने ने बताया कि विश्वविद्यालय के रिद्धपुर केंद्र पर संचालित पायलट परियोजना का कार्य भी भारतीय ज्ञान परंपरा के कार्य से संबधित है, जिसके माध्यम से सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी की ज्ञान संपदा को वर्तमान पीढ़ी तक लाने का कार्य हो रहा है। प्रदर्शनी के उद्घाटन कार्यक्रम में मंच पर रिद्धपुर केंद्र की प्रभारी डॉ. नीता मेश्राम, पायलट परियोजना के समन्वयक डॉ. राजेश लेहकपुरे की उपस्थिति थी।

महानुभाव साहित्य की प्रदर्शनी में 12 वी शताब्दी की 36 हस्तलिखित पांडुलिपियाँ, वस्तुएं, ग्रंथ, रिद्धपुर के पुरातन विशेष स्थानों के चित्र (जिसमे राजमठ, सासु-सुन विहिर, लिळा चरित्र ग्रंथ निर्मिती स्थान (वाजेश्वरी), भैरव बुरूज, दोन्ही देवा भेटी स्थान, राजमठ प्रवेश द्वार, मातंग विहीर तथा लिळा) आदि साहित्य प्रदर्शित किया गया। साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा और हिंदी भाषा के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार में विशेष योगदान के लिए ‘अंतरराष्ट्रीय प्रेमचंद सम्मान-2026’ मिलने पर कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा का रिद्धपुर केंद्र द्वारा सम्मान किया गया । प्रदर्शनी को शिक्षक, विद्यार्थियों ने भेट देकर प्राचीन साहित्य की जानकारी प्राप्त की। पांडुलिपियों के संरक्षण हेतु तैयार किए जा रहे डिजिटल पुस्तकालय का शुभारंभ तथा मराठी भाषा गौरव दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी पर आधारित शोध जर्नल का विमोचन कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा के द्वारा किया गया। कार्यक्रम का प्रास्ताविक रिद्धपुर केंद्र की प्रभारी डॉ. नीता मेश्राम ने तथा अतिथियों का परिचय पायलट परियोजना के समन्वयक डॉ. राजेश लेहकपुरे ने किया। कार्यक्रम का संचालन सुमित वेलकर ने किया तथा कुनाल हरणे ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर रिद्धपुर केंद्र पर कार्यरत सहायक महेश राठोड, एमटीएस भूषण शिरभाते, सुरक्षाकर्मी रवीन्द्र ठाकरे, सफाईकर्मी निखिल गजभिये सहित आकाश गजभिये, सुमित वेलकर, उज्ज्वल गेदाम, पूजा हरणे, मनीषकुमार शेण्डे, कांचन श्रीराव, मोनिका श्रीराव, आस्था कांबले, अभिजीत पडोले, रामेश्वर नागोसे, प्रवीण गजभिये,सीमा पंजाबी, विद्या इल्लेकर, अंकिता देशमुख, योगेश पाटिल, सिद्धेस्वर काले, विशाल हिवरखेडकर, डॉ. स्वप्निल मून , डॉ. नितिन रामटेके, डॉ. मनोज मुनेश्वर,श्रेयश कोल्हेकर, अजय पटोले आदि की उपस्थित थी ।

त्रिदिवसीय प्रदर्शनी उद्घाटितहिंदी विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर प्रदर्शनी का कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने किय...
05/08/2026

त्रिदिवसीय प्रदर्शनी उद्घाटित

हिंदी विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर प्रदर्शनी का कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने किया उद्घाटन

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति : 2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्‍य में अखिल भारतीय शिक्षा समागम, 2026 के तहत अटल बिहारी वाजपेयी भवन स्थित स्‍वामी सहजानंद सरस्‍वती संग्रहालय में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन मंगलवार 04 अगस्त को कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा द्वारा किया गया। यह प्रदर्शनी 06 अगस्त तक आयोजित रहेगी। इस अवसर पर कुलसचिव कादर नवाज ख़ान, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र गादेवार, वित्त अधिकारी पी. सरदार सिंह, कुलानुशासक डॉ. राकेश मिश्र, जनसंचार विभाग के प्रो. कृपाशंकर चौबे, विधि विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी सहित अध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। प्रदर्शनी में उपलब्ध पांडुलिपियों एवं अन्य दुर्लभ पत्रिकाओं की जानकारी संग्रहालय प्रभारी डॉ. अमित विश्वास ने प्रदान की। ‌

इस प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय के संग्रहालय में उपलब्ध 19वीं सदी से अब तक की ऐतिहासिक महत्त्व की पत्रिकाएँ और पांडुलिपियाँ सुरक्षित हैं, इन कृतियों को देखने और पढ़ने का अनुभव साहित्य इतिहास के जीवंत स्पर्श का अहसास कराता है। संग्रहालय में तुलसीदास रचित हनुमान बाहुक, विजय दोहावली, विनयपत्रिका सटीक, षोड्श रामायण, कुंडलिया रामायण सहित हजारों महत्त्वपूर्ण पांडुलिपियाँ संरक्षित की गई हैं। हिंदी की साहित्यिक धरोहर के माध्‍यम से भारतीय ज्ञान परंपरा पर संग्रहालय में उपलब्‍ध सामग्री प्रदर्शनी में लगायी गई है। विश्‍वविद्यालय ने सभी स्‍कूलों महाविद्यालयों के शिक्षकों तथा विद्यार्थियों से प्रदर्शनी देखने की अपील की है।

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Wardha
442001

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Tuesday 9:30am - 6pm
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