Mahatma Gandhi Antarrashtriya Hindi Vishwavidyalaya

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19/10/2026

काशी से तमिलनाडु तक : भाषा, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा का संगम

काशी तमिल संगमम् 5.0 के लिए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा को महाराष्ट्र का राज्य नोडल संस्थान नामित किया गया है।

शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की इस महत्त्वपूर्ण पहल के अंतर्गत देश के 1,000 उच्चतर शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रव्यापी विद्यार्थी सहभागिता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। महाराष्ट्र के कुल 100 उच्चतर शिक्षण संस्थानों की सहभागिता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस वर्ष का विषय है - 'तिरुक्कुरल पयिल्वोम – तिरुक्कुरल अभ्यास करें' अर्थात् आइए, तिरुक्कुरल का अध्ययन करें।

संत कवि तिरुवल्लुवर द्वारा रचित तिरुक्कुरल भारतीय चिंतन की ऐसी कालजयी कृति है, जिसमें नैतिकता, सामाजिक जीवन, शासन, सदाचार और मानवीय संबंधों पर गहन विचार मिलता है।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक सहभागी संस्थान से एक विद्यार्थी का चयन किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को एक माह के शोध एवं शैक्षणिक कार्य के लिए ₹10,000 की वृत्ति प्रदान की जाएगी। उनके शोध-पत्र राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा एवं प्रकाशन के लिए विचारार्थ प्रस्तुत होंगे तथा देश के श्रेष्ठ 100 विद्यार्थियों को वाराणसी में सम्मानित किया जाएगा।

28 नवंबर से 12 दिसंबर 2026 तक आयोजित होने वाला काशी तमिल संगमम् भारतीय भाषाओं के बीच संवाद, सांस्कृतिक एकात्मता और ज्ञान परंपराओं के पारस्परिक आदान-प्रदान का महत्त्वपूर्ण अवसर है।

हिंदी विश्वविद्यालय को तमिल के शास्त्रीय साहित्य पर आधारित इस कार्यक्रम के महाराष्ट्र स्तरीय समन्वय का दायित्व मिलना हमारी बहुभाषिक सांस्कृतिक विरासत का सुंदर उदाहरण है।

महाराष्ट्र के सभी संबंधित उच्चतर शिक्षण संस्थानों से इस राष्ट्रीय पहल में सक्रिय सहभागिता का आग्रह है।

संस्थागत सहभागिता की पुष्टि की अंतिम समय-सीमा : 21 अक्टूबर 2026, प्रातः 11 बजे।

#भारतीयज्ञानपरंपरा #काशीतमिलसंगमम्

Ministry of Education

हिंदी विश्‍वविद्यालय में साहित्‍य के स्‍वरूप की स्‍वतंत्र सत्ता और आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल पर हुआ व्‍याख्‍यानआचार्य रामचं...
09/10/2026

हिंदी विश्‍वविद्यालय में साहित्‍य के स्‍वरूप की स्‍वतंत्र सत्ता और आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल पर हुआ व्‍याख्‍यान

आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल के साहित्‍य ने आत्‍महीनता की ग्रंथि से निकालने का काम किया : प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्‍त

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में कालजयी आलोचक आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल की जयंती के अवसर पर हिंदी साहित्‍य विभाग की ओर से साहित्‍य के स्‍वरूप की स्‍वतंत्र सत्ता और आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल विषय पर आयोजित विशेष व्‍याख्‍यान में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्‍थान के पूर्व कार्यकारी अध्‍यक्ष तथा दीनदयाल उपाध्‍याय, गोरखपुर विश्‍व‍विद्यालय के हिंदी विभाग के अवकाश प्राप्‍त अध्‍यक्ष प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्‍त ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल ने अपने साहित्‍य के माध्‍यम से लोगों को आत्‍महीनता की ग्रंथि से निकालने का काम किया। उन्‍होंने कहा कि विश्‍वबोध का रास्‍ता देश बोध से होकर निकलता है। हमें भारत के स्‍वत्‍व की रक्षा करनी चाहिए।

विश्‍वविद्यालय के महादेवी वर्मा सभागार में सोमवार, 05 अक्‍टूबर को आयोजित व्‍याख्‍यान में हिंदी साहित्‍य विभाग की अध्‍यक्ष प्रो. प्रीति सागर ने स्‍वागत एवं प्रास्‍तावित वक्‍तव्‍य दिया। प्रो. गुप्‍त ने अपने व्‍याख्‍यान में आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल की समग्र साहित्‍य-दृष्टि पर विस्‍तार से प्रकाश डाला। उन्‍होंने कहा कि आचार्य शुक्‍ल रचना ही नहीं, आलोचना के क्षेत्र में भी स्‍वतंत्र सत्ता चाहते थे। वे पहले आलोचक हैं जो विदेशी आलोचकों से संवाद करते हैं। वे साहित्‍य में लोकमंगल की साधनावस्‍था को अधिक महत्‍व देते थे। उन्‍होंने आलोचना के साथ-साथ बहुत सारे पत्र और पत्रिकाओं के लिए शब्‍दावली दी। वे कल्‍पना को साध्‍य नहीं साधन मानते थे। अपने व्‍याख्‍यान में प्रो. गुप्‍त ने कर्मवाद, भारतीय आदर्श, वैचारिक और सांस्‍कृतिक गुलामी आदि मुद्दों को लेकर आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल के रचना संसार को व्‍याख्‍यायित किया। प्रो. गुप्‍त का स्‍वागत प्रो. प्रीति सागर ने सूतमाला एवं विश्‍वविद्यालय का प्रतीक चिह्न देकर किया।

कार्यक्रम का संचालन हिंदी साहित्‍य विभाग के एसोशिएट प्रोफेसर डॉ. रूपेश कुमार सिंह ने किया तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्‍ज्‍वलन एवं आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल के चित्र पर पुष्‍पांजलि अर्पण कर किया गया। इस अवसर पर कालिंदी गुप्‍त, प्रो. श्‍यामसुंदर पाण्‍डेय, डॉ. रामानुज अस्‍थाना, डॉ. अमरेन्‍द्र कुमार शर्मा, डॉ. शैलेश मरजी कदम, डॉ. कोमल कुमार परदेशी सहित बड़ी संख्‍या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Ministry of Education University Grants Commission

अनिकेत समाज कार्य महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने किया वर्धा समाज कार्य संस्थान का शैक्षणिक भ्रमणवर्धा, 08 अक्टूबर 2026 ...
08/10/2026

अनिकेत समाज कार्य महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने किया वर्धा समाज कार्य संस्थान का शैक्षणिक भ्रमण

वर्धा, 08 अक्टूबर 2026 : अनिकेत समाज कार्य महाविद्यालय के समाज कार्य पाठ्यक्रम के तृतीय सेमेस्टर, सामुदायिक विकास विशेषीकरण के विद्यार्थियों ने बुधवार, 07 अक्टूबर को वर्धा समाज कार्य संस्थान, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को समाज कार्य शिक्षा, क्षेत्र कार्य, सामुदायिक विकास तथा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था।

भ्रमण के दौरान वर्धा समाज कार्य संस्थान के सहायक प्रोफेसर डॉ. शिव सिंह बघेल ने विद्यार्थियों को संस्थान एवं विश्वविद्यालय के इतिहास, शैक्षणिक गतिविधियों, खेलकूद, क्षेत्र कार्य, प्रवेश प्रक्रिया तथा समाज कार्य शिक्षा से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को समाज कार्य के सैद्धांतिक ज्ञान को क्षेत्रीय अनुभवों से जोड़ते हुए व्यावहारिक शिक्षा के महत्व से अवगत कराया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में वर्धा समाज कार्य संस्थान के सहायक अध्यापक डॉ. शिवाजी जोगदंड ने अनिकेत समाज कार्य महाविद्यालय से आए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का स्वागत किया। इस अवसर पर अनिकेत समाज कार्य महाविद्यालय के विद्यार्थी पर्यवेक्षक डॉ. रूपेश कुचेवार तथा सहयोगी प्राध्यापक डॉ. दीपक उईके उपस्थित रहे।

भ्रमण के अंतर्गत विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक एवं संस्थागत गतिविधियों का अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने मीडिया लैब, गांधी हिल्स, सहजानंद संग्रहालय सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कर उनके शैक्षणिक एवं सामाजिक महत्व को समझा। इस दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान एवं विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, शैक्षणिक वातावरण तथा समाज कार्य के क्षेत्रीय आयामों के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. दीपक उईके ने वर्धा समाज कार्य संस्थान एवं महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों तथा क्षेत्र कार्य के संबंध में विद्यार्थियों को दिए गए मार्गदर्शन के लिए संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर वर्धा समाज कार्य संस्थान के निदेशक प्रो. के. बालराजु, डॉ. अंकित पाण्डेय, डॉ. ज्योति कुमारी सहित संस्थान के शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे। शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं अनुभवपरक रहा तथा इससे उन्हें समाज कार्य की शिक्षा को व्यावहारिक एवं सामुदायिक संदर्भों में समझने का अवसर प्राप्त हुआ।

हिंदी विश्वविद्यालय के डॉ. अनिर्बाण घोष ने पीकिंग की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में पढ़ा शोध पत्रवर्धा, 8 अक्टूबर 2026 : महा...
08/10/2026

हिंदी विश्वविद्यालय के डॉ. अनिर्बाण घोष ने पीकिंग की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में पढ़ा शोध पत्र

वर्धा, 8 अक्टूबर 2026 : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के भाषा विद्यापीठ अंतर्गत अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अनिर्बाण घोष ने 19–20 सितंबर को चीन के प्रतिष्ठित पीकिंग विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में सहभागिता कर शोध पत्र प्रस्तुत किया। डॉ. घोष की इस अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहभागिता को विश्वविद्यालय की वैश्विक शैक्षणिक उपस्थिति और भारत-चीन सांस्कृतिक एवं भाषाई अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने इसे विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहचान के रूप में रेखांकित करते हुए डॉ. अनिर्बाण घोष को बधाई दी।

पीकिंग विश्वविद्यालय के पूर्वी साहित्य अनुसंधान केंद्र तथा विदेशी भाषा विद्यापीठ के प्राच्य अध्ययन विभाग की स्थापना के 80 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. घोष ने “चीन में भारतीय भाषाओं का अध्ययन : पीकिंग विश्वविद्यालय के प्राच्य अध्ययन विभाग की स्थापना में चीनी और भारतीय विद्वानों का योगदान” विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी में भारत के दो विश्वविद्यालय महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय सहित ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड और एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, अमेरिका के न्यूयॉर्क, फिलीपींस के मनीला, जर्मनी के बॉन, दक्षिण कोरिया के सियोल, मंगोलिया राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वियतनाम के चियांग माई विश्वविद्यालय तथा चीन के लगभग 20 से अधिक विश्वविद्यालयों के करीब 70 विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया।

संगोष्ठी के दौरान एशिया तथा विश्व में प्राच्य विद्या के इतिहास, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। विद्वानों ने विशेष रूप से चीन में भारत अध्ययन की लगभग एक शताब्दी पुरानी परंपरा तथा उसके समकालीन महत्व पर चर्चा की। उल्लेखनीय है कि चीन में भारत अध्ययन की औपचारिक शुरुआत लगभग 100 वर्ष पूर्व पीकिंग विश्वविद्यालय से ही हुई थी।

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में पीकिंग विश्वविद्यालय के अतिरिक्त चिंगहु, रेनमिन, बीजिंग फॉरेन स्टडीज़ विश्वविद्यालय तथा शंघाई, चोंगकिंग, निंगश्या और वुहान सहित विभिन्न क्षेत्रों के विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञों ने भी सहभागिता की।

Ministry of Education University Grants Commission India in China (Embassy of India, Beijing) India in Vietnam (Embassy of India, Hanoi)

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रदर्शनकारी कला विभाग के वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर एवं प्रख्यात नाटककार,...
08/10/2026

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रदर्शनकारी कला विभाग के वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर एवं प्रख्यात नाटककार, नाट्य निर्देशक, नाट्य समीक्षक तथा नाट्य प्रशिक्षक डॉ. सतीश पावड़े को साहित्य विद्या में उच्चतम शोध उपाधि डि.लिट. (विद्यावाचस्पति) प्रदान करने की घोषणा की गई है। राजकुमारी इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़, छत्तीसगढ़ के कला संकाय द्वारा यह घोषणा की गई है।

डॉ. पावड़े विगत चार वर्षों से इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में “नाट्यशास्त्र का समाजशास्त्रीय अध्ययन एवं विश्लेषण” विषय पर शोधकार्य कर रहे थे। उनके शोध का केंद्र भारतीय नाट्यपरंपरा, नाट्यशास्त्र तथा उसके सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों का अध्ययन एवं विश्लेषण रहा है। उन्हें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की रवीन्द्रनाथ टैगोर रिसर्च फेलोशिप तथा संगीत नाटक अकादमी की शोध परियोजना स्कॉलरशिप प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के अतिरिक्त कनाडा और श्रीलंका में भी नाट्यशास्त्र विषय पर व्याख्यान दिए हैं।

नाट्यलेखन, नाट्य आलोचना, चरित्र-लेखन, संपादन, अनुवाद एवं रूपांतरण की उनकी 28 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे पूर्व में महाराष्ट्र राज्य के नाटक सेंसर बोर्ड के तीन बार सदस्य तथा राज्य शासन के ही मराठी विश्वकोश नाट्यज्ञानमंडल के दो बार सलाहकार एवं सदस्य भी रहे हैं।

वर्तमान में डॉ. पावड़े श्रीलंका की प्लेटो अकादेमी ऑफ परफार्मिंग आर्ट्स तथा टाइम्स इंटरनेशनल अकादमी फॉर ग्रैजुएट स्टडीज के वरिष्ठ अकादमिक सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे हैं। साथ ही वे संगीतसूर्य केशवराव भोसले सांस्कृतिक परिषद, भारत गणराज्य के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी दायित्व निभा रहे हैं। उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कारों एवं सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनका "नाट्यशास्त्र: परंपरा, प्रयोग आणि विमर्श" यह समीक्षा ग्रंथ का प्रकाशन अगले माह में अनामिका प्रकाशन, प्रयागराज कर रहा है ।

विशेष उल्लेखनीय है कि डॉ. सतीश पावड़े ने इससे पूर्व नागपुर विश्वविद्यालय से नाट्यकला विषय में ललित कला संकाय में प्रदर्शनकारी कला (नाट्यकला) की महाराष्ट्र की पहली शोध उपाधि (1996) प्राप्त की थी। डि.लिट. की प्रस्तावित उपाधि उनके दीर्घकालीन नाट्य-अध्ययन, शोध, लेखन एवं अकादमिक योगदान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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वैश्विक गांधी: भारतवंशी चित्त के शिल्पी पुस्तक का हुआ लोकार्पणवर्धा, 06 अक्टूबर 2026 : महात्मा गांधी जी की जयंती के अवसर...
06/10/2026

वैश्विक गांधी: भारतवंशी चित्त के शिल्पी पुस्तक का हुआ लोकार्पण

वर्धा, 06 अक्टूबर 2026 : महात्मा गांधी जी की जयंती के अवसर पर "वैश्विक गांधी: भारतवंशी चित्त के शिल्पी" पुस्‍तक का लोकार्पण महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में 02 अक्‍टूबर को कुलपति प्रो.कुमुद शर्मा मध्‍य प्रदेश के पूर्व अतिरिक्त सचिव मनोज कुमार श्रीवास्तव, गांधी एवं शांति अध्‍ययन विभाग के अध्‍यक्ष प्रो. मनोज कुमार राय, कुलानुशासक डॉ. राकेश कुमार मिश्र द्वारा किया गया।

इसी पुस्‍तक का लोकार्पण सेवाग्राम आश्रम में सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान की अध्यक्ष श्रीमती आशा बोथरा, गांधी चिंतक दर्शन शंकर, आश्रम प्रतिष्ठान के मंत्री विजय ताम्बे के द्वारा किया गया। नयी किताब से प्रकाशित इस पुस्तक का संपादन विश्वविद्यालय के श्री चमनलाल प्रवासन एवं डायस्पोरा अध्ययन विभाग के डॉ. मुन्नालाल गुप्ता और डॉ. राजीव रंजन राय ने किया। डॉ. अर्चना बलवीर पुस्‍तक की सह-संपादक हैं। पुस्तक में 27 आलेख हैं, जो मॉरीशस, इंग्लैंड, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, जापान, अमेरिका, फीजी, सूरीनाम, नीदरलैंड, बुल्गारिया, क़तर, नेपाल, न्यूज़ीलैंड, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका और त्रिनिदाद एवं टोबैगो सहित कई देशों और प्रवासी समाजों में गांधी के प्रभाव और विरासत पर लिखे हैं। कुछ आलेख विषय-आधारित भी हैं, जैसे गांधी के जीवन में 'बा' की भूमिका, प्रवासी हिंदी साहित्य में गांधी, जर्मन साहित्य में गांधी और गांधी के व्यक्तित्व में प्रवास की भूमिका।

इस अवसर पर पुस्तक के संपादक डॉ. मुन्नालाल गुप्ता, डॉ. राजीव रंजन राय और सह-संपादक डॉ. अर्चना बलवीर उपस्थित रहे। डॉ. मुन्नालाल गुप्ता ने पुस्तक में सहयोग देने वाले सभी भारतवंशी विद्वानों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैंकॉक में 'दूत वाक्यम्' नाटक की सफल प्रस्तुति हिंदी विश्वविद्यालय की डॉ. विधु खरे दास ने शोध पत्र प्रस्तुत किया -वर्धा,...
06/10/2026

बैंकॉक में 'दूत वाक्यम्' नाटक की सफल प्रस्तुति

हिंदी विश्वविद्यालय की डॉ. विधु खरे दास ने शोध पत्र प्रस्तुत किया -

वर्धा, 06 अक्‍टूबर 2026 : कोलाज कल्चरल सोसाइटी द्वारा सिल्पाकोर्न यूनिवर्सिटी, बैंकॉक में आयोजित 'ग्लोबल संस्कृत कॉन्फ्रेंस - 2026' में नाटक 'दूत वाक्यम्' का सफल मंचन किया गया। यह नाटक महाकवि भास की प्रसिद्ध रचना और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की कृति 'रश्मिरथी' पर आधारित था।

इस मंचन की परिकल्पना एवं निर्देशन विधु खरे दास और अनिमेष खरे दास ने मिलकर किया। उल्लेखनीय है कि विधु खरे दास महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के प्रदर्शनकारी कला विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने अपना एक शोध पत्र भी प्रस्तुत किया, जिसे वहां उपस्थित विद्वानों और शोधार्थियों द्वारा काफी सराहा गया। इस नाटक में सहायक निर्देशक की भूमिका शारदा यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा के डॉ. राघवेंद्र मिश्रा ने निभाई। वहीं, मंच पर अपनी प्रभावी अभिनय क्षमता से दर्शकों को प्रभावित करने वाले एकल कलाकार पंकज कुमार पांडे रहे।

ग्लोबल संस्कृत कॉन्फ्रेंस के मंच पर भारतीय संस्कृति, संस्कृत साहित्य और रंगमंच के इस सुंदर संयोजन को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों ने खूब सराहा।

बारह वर्ष के बाजी राउत का समर्पण हर युवा के लिए प्रेरणा : प्रो. कुमुद शर्माहिंदी विश्वविद्यालय में शहीद बाजी राउत की विर...
03/10/2026

बारह वर्ष के बाजी राउत का समर्पण हर युवा के लिए प्रेरणा : प्रो. कुमुद शर्मा

हिंदी विश्वविद्यालय में शहीद बाजी राउत की विरासत पर राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का समापन; निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता के विजेता पुरस्कृत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में “शहीद बाजी राउत की विरासत पर राष्ट्रीय युवा सम्मेलन : राष्ट्र-निर्माण हेतु युवा अभिप्रेरण” का समापन कस्तूरबा सभागार में 2 अक्टूबर को हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के तत्वावधान में, ओडिशा अनुसंधान केंद्र के सहयोग से यह सम्मेलन 25 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक आयोजित था।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति ने कहा कि अनेक स्वतंत्रता सेनानी इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हैं। वे लोककथाओं, लोककाव्य, लोकवार्ताओं और साहित्य में जीवित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के साथ सभी भारतीय भाषाओं के साहित्य और प्रांतीय इतिहास को खंगालने का आह्वान किया, ताकि ऐसे नायक संवाद के मंच पर आ सकें। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा मिले, तो कोई शक्ति भारत को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। ओड़िया कवि सच्चिदानंद राउत राय का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि बाजी राउत पर लिखी कविता उनकी कीर्ति का आधार बनी। उन्होंने कहा, “बारह साल के बच्चे का अपने देश के प्रति समर्पण इस तरह से हो सकता है, तो हमारी क्यों नहीं हो सकती।”
कुलसचिव डॉ. सुरेंद्र पी. गादेवार ने कहा कि यह आयोजन कुलपति के मार्गदर्शन और आयोजन टीम के समन्वित प्रयास से संभव हुआ। दूरशिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. शंभु जोशी ने कहा कि बाजी राउत ने लोभ के स्थान पर देश के सम्मान को चुना। पूर्ण स्वराज की वह यात्रा आज भी जारी है और उसमें युवाओं का दायित्व है।
नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर पाण्डेय ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उद्घाटन में 150 से अधिक और कार्यशाला में 50 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने निबंधों में वैष्णव चरण पटनायक, सारंगधर दास, कल्याणी दास, माधवगिरी और शुकदेव प्रसाद सिंह जैसे अनेक गुमनाम नायकों को खोजा। समारोह में वीडियो प्रतिवेदन का प्रसारण हुआ और सम्मेलन पर केंद्रित स्मृति पत्र “शौर्य-स्मृति” का लोकार्पण भी हुआ।
इस दौरान आयोजित निबंध प्रतियोगिता में मो. सोहैल अली (इतिहास विभाग) प्रथम, अभिषेक कुमार पाठक (मनोविज्ञान विभाग) द्वितीय और खुशी लोधी (शिक्षा विभाग) तृतीय रहे एवं भाषण
प्रतियोगिता में कृष्ण मुरारी (विधि विभाग) प्रथम, दिगंत दिग्विजय स्वाँई (शिक्षा विभाग) द्वितीय और अभिषेक कुमार ओझा (विधि विभाग) तृतीय रहे। विजेताओं को पुरस्कार राशि दी गई।
मंच संचालन डॉ. गौरी शर्मा (शिक्षा विभाग) ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. योगेन्द्र बाबू (शिक्षा विभाग) ने किया। डॉ. हरीश पाण्डेय, डॉ. देवेन्द्र कुमार और दत्तुराम देउने ने कार्यक्रम के संयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया । समारोह में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। डॉ. विश्वजीत, डॉ. रवि आर्य, आनन्द साहू, अभिषेक शर्मा , अविनाश, देवेश, किशोर कुणाल, ओम प्रकाश, निवेदिता, रोशनी, अभय दूबे, दिलीप कुमार , नीतेश आर्या (वीडियो संपादन कार्य) इत्यादि विद्यार्थियों ने कार्यक्रम के सफल संचालन में मुख्य भूमिका निभाई ।

हिंदी विश्‍वविद्यालय में मनाई गई महात्‍मा गांधी जी की जयंतीकुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण ...
02/10/2026

हिंदी विश्‍वविद्यालय में मनाई गई महात्‍मा गांधी जी की जयंती

कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण

गांधी जी के प्रिय भजनों के गायन से गूंज उठा परिसर

वर्धा, 02 अक्‍टूबर 2026 : महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी जी की जयंती के अवसर पर 02 अक्‍टूबर को सुबह 07:00 बजे आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अभिवादन किया।

इस अवसर पर गांधी हिल पर गांधी जी के प्रिय भजनों के गायन की प्रस्तुति से पूरा परिसर गूंज उठा। प्रदर्शनकारी कला विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. तेजस्वी एच. आर. और समूह ने वैष्णव जन तो तेने कहिए जो पीर पराई जाने रे, रघुपति राघव राजा राम, दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल, पायो जी मैंने राम रतन धन पायो, श्री रामचन्द्र कृपालु भजमन और मराठी गीत रामा रघु नंदना आदि गीतों की शानदार प्रस्तुतियों ने समा बांधा।

कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने समता भवन स्थित बाबासाहेब डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर और दूर शिक्षा निदेशालय स्थित पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर भी माल्‍यार्पण कर अभिवादन किया। इस दौरान स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने उपस्थितों को स्वच्छता की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर कुलसचिव एवं परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र गादेवार, वित्ताधिकारी क़ादर नवाज़ ख़ान, विद्यार्थी कल्याण अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार, कुलानुशासक डॉ. राकेश मिश्र सहित अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में शोध उपकरणों का वैज्ञानिक विकास एवं प्रमाणीकरण आवश्यक : प्रो. विशाल सूदशोध एवं विकास प्रकोष्...
01/10/2026

सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में शोध उपकरणों का वैज्ञानिक विकास एवं प्रमाणीकरण आवश्यक : प्रो. विशाल सूद

शोध एवं विकास प्रकोष्ठ (RDC) द्वारा आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान : शोध उपकरणों का विकास, वैधता एवं मानकीकरण

वर्धा, 30 सितंबर 2026। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के शोध एवं विकास प्रकोष्ठ द्वारा दिनांक 30 सितंबर 2026 (बुधवार) को अपराह्न 04:00 बजे से “समाज विज्ञान अनुसंधान में शोध उपकरणों का विकास, वैधता एवं मानकीकरण” विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन मा. कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा के संरक्षण में किया गया। व्याख्यान के मुख्य वक्ता हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के शिक्षा विद्यापीठ के आचार्य एवं अधिष्ठाता प्रो. विशाल सूद थे।
कार्यक्रम का उद्देश्य शोधार्थियों एवं शिक्षकों को शोध उपकरणों के वैज्ञानिक विकास, परीक्षण एवं मानकीकरण की प्रक्रिया से परिचित कराना था। व्याख्यान में प्रो. विशाल सूद ने सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में शोध उपकरणों की भूमिका को महत्त्‍वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी शोध के निष्कर्षों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता उसके लिए प्रयुक्त शोध उपकरण की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। उन्होंने शोधकर्ताओं को शोध उपकरण तैयार करते समय शोध के उद्देश्य, शोध प्रश्न, लक्षित समूह तथा संबंधित साहित्य को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने शोध उपकरण के विकास की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रश्‍नों/कथनों का एकत्रीकरण (आइटम पूल) तैयार करने, प्रारंभिक प्रारूप विकसित करने, विशेषज्ञों से समीक्षा कराने, भाषा एवं कथनों के परीक्षण, लघु समूह परीक्षण तथा वृहत समूह परीक्षण जैसे विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि किसी प्रश्न या कथन में एक से अधिक विचारों को एक साथ नहीं रखा जाना चाहिए तथा शोध उपकरण की भाषा लक्षित उत्तरदाताओं की सामाजिक एवं भाषायी पृष्ठभूमि के अनुरूप होनी चाहिए।
प्रो. सूद ने सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में मुख्‍यत: गुणात्मक आंकड़ों की प्रकृति पर चर्चा करते हुए साक्षात्कार, अवलोकन, फोकस ग्रुप डिस्कशन, प्रश्नावली, रेटिंग स्केल आदि के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के संदर्भ में शोध उपकरण के उपयुक्त चयन तथा उसके परीक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों द्वारा शोध उपकरण की वैधता, प्रश्नों के निर्माण, कथनों की भाषा तथा उपकरण के परीक्षण से संबंधित प्रश्न पूछे गए, जिनका मुख्य वक्ता द्वारा समाधान किया गया।

कार्यक्रम में कुल 94 प्रतिभागियों ने पंजीकरण किया, जिसमें 15 राज्‍यों एवं 01 केंद्रशासित प्रदेश से 10 केंद्रीय, 11 राज्‍य, 05 निजी विश्वविद्यालयों एवं 08 महाविद्यालयों से संकाय सदस्‍यों, पी-एच.डी. शोधार्थियों तथा स्‍नातक एवं स्‍नातकोत्तर विद्यार्थियों ने भागीदारी की।
शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. शंभू जोशी ने कार्यक्रम का संचालन तथा सभी अतिथियों, मुख्य वक्ता एवं देशभर से जुड़े प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में शोध एवं विकास प्रकोष्‍ठ के श्री दुर्गेश पाण्‍डेय ने तकनीकी समन्‍वय प्रदान किया। आयोजन में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के संकाय सदस्‍य, शोधार्थी और विद्यार्थी ऑनलाइन उपस्थित रहे।

Ministry of Education Pralhad Joshi

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