15/07/2024
Panjab University Research Scholars Association stands in solidarity with the protesting research scholars of Deenbandu Chhotu Ram University of Science and Technology, Murthal, Sonipat, Haryana.
Research Scholars Unity long live
The issue is explained below by the protesting scholars
साथियो
हम दीनबंधु छोटू राम यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मुरथल, सोनीपत, हरियाणा के शोधार्थी, चीफ वार्डन के तुगलकी फ़रमान और वेब ऑफ़ साइंस में दो पेपरों की अनिवार्यता के खिलाफ़ अकादमिक भवन में 10 जुलाई से अनिश्चितकालीन दिन रात के धरने पर बैठे हुए हैं। अब यह आन्दोलन इन दो मांगों तक सीमित न रहकर व्यापक रूप ले चुका है।
बॉयज हॉस्टल के चीफ वार्डन ने एक फ़रमान जारी किया है इस फ़रमान के अनुसार शोधकर्ताओं को तुरन्त हास्टल खाली करने को कहा गया है। साथ ही जो भी रिसर्च स्कॉलर अपनी रिसर्च के 4 साल पूरी कर चुके हैं उन्हें दोबारा हॉस्टल रूम अलॉट नहीं किया जायेगा। ऐसा किसी भी प्रकार का कोई भी नियम किसी भी यूनिवर्सिटी में नहीं है। यूनिवर्सिटी के पीएचडी आर्डिनेंस के अनुसार 6 साल तक कोई भी रिसर्च स्कॉलर रेगुलर रिसर्च कर सकता है तो ऐसे में इस तुगलकी फ़रमान का मतलब समझ नहीं आ रहा है।
चीफ वार्डन की नियुक्ति भी सभी नियमों की धज्जिया उड़ाकर की गई। यह नियुक्ति यूनिवर्सिटी में भाई भतीजावाद के चलते की गई है। डा अजय कुमार सिंह वाइस चांसलर जी के जीजा जी हैं , इसलिए ही पहले वाले चीफ वार्डन को समय से पहले हटाकर इनको चीफ वार्डन बनाया गया है। हॉस्टल में वार्डन्स अपने कार्यकाल पूरा करने के बाद भी अपने पद पर बने हुए हैं। हॉस्टल में जान बूझकर ऐसे नियम बनाये जा रहे हैं जिनसे छात्रों को प्रताड़ित किया जा सके और उनके शोध में खलल डाला जा सके।
यूनिवर्सिटी का वाईस चांसलर एक राजशाही की तरह व्यवहार कर रहा है जहाँ एक तरफ़ यूजीसी के अनुसार पेपरों की बाध्यता शोध पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है और पेपर की अनिवार्यता को हटा दिया गया है दूसरी तरफ़ यूनिवर्सिटी वाईस चांसलर एक तरफे निर्णय ले रहा है। और वेब ऑफ़ साइंस के जर्नल्स में दो पेपरों को प्रकाशित करना पीएचडी पूरी करने के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। यह शर्त सिर्फ़ 2020-21 और 2021-22 के ही शोधार्थीयों पर लागु है उसके बाद यह शर्त हटा दी गई। आप बताइये यह बात कहाँ से तर्कसंगत लग रही है कि एक ही यूनिवर्सिटी के शोधार्थीयों के लिए अलग अलग नियम हों। इससे यूनिवर्सिटी के शोधार्थी तो मानसिक रूप से प्रताड़ित हो ही रहे हैं इसके साथ ही यूनिवर्सिटी में पढ़ाई और शोध दोनों की गुणवत्ता भी लगातार गिर रही है।
हमारी माँगे :
1.अवैध रूप से नियुक्त चीफ वार्डन को हटाकर नए चीफ वार्डन की नियुक्ति जो छात्रों और शोधार्थियों की जायज जरूरतों को समझ सके।
2.कार्यकाल पूरा हो चुके वार्डन को हटाकर नई नियुक्ति और हॉस्टल छात्र फंड के दुरुपयोग करने वाले वार्डन और चीफ वार्डन के खिलाफ जांच की जाए।
3.PhD submission के लिए Web of Science में प्रकाशित शोध पत्र की शर्त को हटाकर UGC CARE की शर्त लागू की जाए। (Ph.D Prospectus की क्लॉज 11.6 को amend किया जाए।)
4.लड़कियों के हॉस्टल की टाईमिंग 7 बजे से बढ़ाकर 10 बजे की जाए ताकि लैब में आराम से काम किया जा सके।
5.CIL (Central Instrumentation Laboratory) में कोई भी इंस्ट्रूमेंट वर्किंग में नहीं है और विभागों में भी ऐसा ही है। इस समस्या का भी समाधान निकाला जाये। (eg. XRD, FTIR, BET, TGA-DSC) शोधकर्ताओं को यें इंस्ट्रूमेंट मुफ्त में इस्तेमाल करने की छूट दी जाए।
6.Controller of Finance द्वारा Research Scholar's के साथ बदतमीजी से बात करना एवं फाईलों को बार-बार comments लिख कर वापिस भेजना।
7.DST - INSPIRE Scholars की 10 महीने से Fellowship लंबित है क्योंकि COF(कंट्रोलर ऑफ फाइनेंस) मनमानी करके vouchers expire होने देते है तथा कोई ठोस कदम नहीं लेते। "COF की जवाबदेही तय हो "
8.सभी Research scholars को Non-Net fellowship दी जाए
9. वीसी साहब विश्वविद्यालय को अपनी जागीर समझना बन्द करें। छात्र और कर्मचारी (टीचिंग और नान टीचिंग) दोनों को साथ लेकर और सहमति से फैसले लिए जाएं।
यह लड़ाई सिर्फ एक विश्वविद्यालय की लड़ाई नहीं है। बल्कि सभी विश्वविद्यालयों में जनवादी माहौल कायम करने के लिए है। यह हम सबकी लड़ाई है।
आप हमारे समर्थन में प्रैस नोट जारी करके इस लड़ाई में हमारे साथी बन सकते हैं।
धन्यवाद
निवेदक
तमाम शोधकर्ता
दीनबंधु छोटूराम यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी
मुरथल, सोनीपत
संपर्क:
जसमिन्दर:8059138729
सरु सचदेवा: 9996819678
मंजीत: 9992130260